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Farrukhabad News: गैंगस्टर में कुर्क अनुपम दुबे की जमीन ट्रस्ट की निकली, डीएम ने की रिलीज
Fri, 06 Feb 2026 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:31 AM IST
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फर्रुखाबाद। गैंगस्टर में दो वर्ष कुर्क की गई अनुपम दुबे की जमीन हनुमान ट्रस्ट की निकली। एसओसी न्यायालय से ट्रस्ट के पक्ष में फैसला होने के बाद जिलाधिकारी ने कुर्क की गई भूमि अवमुक्त कर दी है।
बढ़पुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव अर्रापहाड़पुर में वयस्क हनुमानजी महाराज विराजमान मंदिर के नाम पर 12.95 हेक्टेयर भूमि है। इस भूमि का बड़ा हिस्सा चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश पर बेच दिया गया था। फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुपम दुबे के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद हनुमान मंदिर की 4.3810 हेक्टेयर भूमि अनुराग, अभिषेक, रमेश चंद्र आदि के नाम से होने के चलते उनकी अवैध संपत्ति मानते हुए दो वर्ष पूर्व पुलिस व प्रशासन ने कुर्क कर ली थी।
इधर अर्रापहाड़पुर निवासी जगदीश चंद(वर्तमान पता गुजरात प्रांत के जनपद अहमदाबाद जी9 देवकी नंदन फ्लैट निकट यूनियन बैंक नरौदा) व अर्रापहाड़पुर निवासी नरेंद्र मोहन प्रधान पुत्र कैलाश चंद्र(वर्तमान पता मछली टोला फतेहगढ़) ने 10 नवंबर वर्ष 2004 में चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश के आधार पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय वाद दायर किया। इसमें रमेश चंद्र आदि को विपक्षी बनाया। एक अन्य अपील अल्लानगर बढ़पुर निवासी अनिल कुमार ने दायर की।
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उन्होंने जनपद कन्नौज के छिबरामऊ निवासी रमेश चंद्र, निगोह खास निवासी अभिषेक, रंधीरपुर निवासी अनुराग व शहर के मोहल्ला बागकूंचा निवासी कैलाश चंद्र, उनके भाई हरिश्चंद्र नवीन चंद्र, उनके भाई कृष्णचंद्र व जगदीश चंद्र को विपक्षी बनाकर वाद दायर किया। इसमें कहा गया यह भूमि मंदिर के नाम दर्ज है। इस पर न्यायालय ने 10 जुलाई 1968 की पत्रावली नकल का मुआयना कराया गया तो अभिलेखागार में पत्रावली ही नहीं मिली। अनिल कुमार ने 12 जनवरी 2015 व नरेंद्र प्रधान ने सात मई 2015 को अपील वापस लेने का प्रार्थनापत्र दिया। 20 सितंबर 2011 को जगदीश चंद्र का स्वर्गवास होने के बाद सरोज प्रधान को वारिस नामित किया गया और उनकी ओर से एकलव्य कुमार ने पैरवी की।
30 जनवरी 2018 को अपील निरस्त होने से सरोज प्रधान ने आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। इस पर 30 जनवरी का आदेश निरस्त कर दिया गया। नोटिस जारी होने पर विपक्षी उपस्थित नहीं हुए। इससे 17 नवंबर 2025 को एकपक्षीय कार्रवाई की गई। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी केडी राम ने 10 नवंबर 2004 को चकबंदी अधिकारी का आदेश फर्जी व कूटरचित होने से निरस्त कर दिया।
उन्होंने पांच जनवरी को ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया। इसी निर्णय के आधार पर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार 18 मई 2023 को जारी किए गए कुर्की आदेश वापस लेते हुए कुर्क की गई 4.3810 हेक्टेयर भूमि मंदिर ट्रस्ट के पक्ष में अवमुक्त कर दी है। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि अपराधियों के नाम भूमि दर्ज होने से कुर्क की गई थी। चकबंदी न्यायालय से फर्जी तरीके से कराए गए बैनामा निरस्त कर दिए जाने से भूमि हनुमान मंदिर के नाम आ गई। इससे अपराधियों का स्वामित्व खत्म होने से मंदिर ट्रस्ट के नाम भूमि अवमुक्त कर दी गई।
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बढ़पुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव अर्रापहाड़पुर में वयस्क हनुमानजी महाराज विराजमान मंदिर के नाम पर 12.95 हेक्टेयर भूमि है। इस भूमि का बड़ा हिस्सा चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश पर बेच दिया गया था। फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुपम दुबे के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद हनुमान मंदिर की 4.3810 हेक्टेयर भूमि अनुराग, अभिषेक, रमेश चंद्र आदि के नाम से होने के चलते उनकी अवैध संपत्ति मानते हुए दो वर्ष पूर्व पुलिस व प्रशासन ने कुर्क कर ली थी।
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इधर अर्रापहाड़पुर निवासी जगदीश चंद(वर्तमान पता गुजरात प्रांत के जनपद अहमदाबाद जी9 देवकी नंदन फ्लैट निकट यूनियन बैंक नरौदा) व अर्रापहाड़पुर निवासी नरेंद्र मोहन प्रधान पुत्र कैलाश चंद्र(वर्तमान पता मछली टोला फतेहगढ़) ने 10 नवंबर वर्ष 2004 में चकबंदी अधिकारी के फर्जी आदेश के आधार पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय वाद दायर किया। इसमें रमेश चंद्र आदि को विपक्षी बनाया। एक अन्य अपील अल्लानगर बढ़पुर निवासी अनिल कुमार ने दायर की।
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उन्होंने जनपद कन्नौज के छिबरामऊ निवासी रमेश चंद्र, निगोह खास निवासी अभिषेक, रंधीरपुर निवासी अनुराग व शहर के मोहल्ला बागकूंचा निवासी कैलाश चंद्र, उनके भाई हरिश्चंद्र नवीन चंद्र, उनके भाई कृष्णचंद्र व जगदीश चंद्र को विपक्षी बनाकर वाद दायर किया। इसमें कहा गया यह भूमि मंदिर के नाम दर्ज है। इस पर न्यायालय ने 10 जुलाई 1968 की पत्रावली नकल का मुआयना कराया गया तो अभिलेखागार में पत्रावली ही नहीं मिली। अनिल कुमार ने 12 जनवरी 2015 व नरेंद्र प्रधान ने सात मई 2015 को अपील वापस लेने का प्रार्थनापत्र दिया। 20 सितंबर 2011 को जगदीश चंद्र का स्वर्गवास होने के बाद सरोज प्रधान को वारिस नामित किया गया और उनकी ओर से एकलव्य कुमार ने पैरवी की।
30 जनवरी 2018 को अपील निरस्त होने से सरोज प्रधान ने आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। इस पर 30 जनवरी का आदेश निरस्त कर दिया गया। नोटिस जारी होने पर विपक्षी उपस्थित नहीं हुए। इससे 17 नवंबर 2025 को एकपक्षीय कार्रवाई की गई। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी केडी राम ने 10 नवंबर 2004 को चकबंदी अधिकारी का आदेश फर्जी व कूटरचित होने से निरस्त कर दिया।
उन्होंने पांच जनवरी को ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया। इसी निर्णय के आधार पर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार 18 मई 2023 को जारी किए गए कुर्की आदेश वापस लेते हुए कुर्क की गई 4.3810 हेक्टेयर भूमि मंदिर ट्रस्ट के पक्ष में अवमुक्त कर दी है। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि अपराधियों के नाम भूमि दर्ज होने से कुर्क की गई थी। चकबंदी न्यायालय से फर्जी तरीके से कराए गए बैनामा निरस्त कर दिए जाने से भूमि हनुमान मंदिर के नाम आ गई। इससे अपराधियों का स्वामित्व खत्म होने से मंदिर ट्रस्ट के नाम भूमि अवमुक्त कर दी गई।