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बार एसोसिएशन के महासचिव को किया जाए निष्कासित
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जानकारी देते जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। डिबार होने के बाद जिला बार एसोसिएशन के धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते महासचिव पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है। इस संबंध में बार कौंसिल उत्तर प्रदेेश को पूर्व अध्यक्ष की अगुवाई में पत्र भेजा गया है। इसमें महासचिव के निष्कासन की भी मांग की गई है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जवाहर सिंह गंगवार, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर की अगुवाई में गुरुवार को वकीलों की बैठक हुई। इसके बाद दोनों पूर्व अध्यक्षों ने बताया कि बार काउंसिल उत्तर प्रदेश में वकील अभिषेक कुमार सक्सेना ने महासचिव संजीव पारिया के खिलाफ मारपीट करने की शिकायत की थी। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद 14 फरवरी को अनुशासन समिति ने महासचिव संजीव पारिया को पांच वर्ष के लिए डिबार घोषित करने के आदेश दिए थे। महासचिव पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। किंतु महासचिव ने बार काउंसिल के कर्मचारियों की मिलीभगत से आदेश को दबवा दिया था।
डिबार होने के बाद भी पारिया बार एसोसिएशन के महासचिव के रूप में काम करते रहे। उन्होंने बार के कोष के रुपये का दुरुपयोग किया है। उन्हें सदन की बैठक बुलाने अधिकार भी नहीं था। हड़ताल की घोषणा और वकीलों का निष्कासन भी पूरी तरह अवैैध है।
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दोनों पूर्व अध्यक्षों ने बताया कि बार काउंसिल उत्तर प्रदेश, जिला जज और जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र भेजकर महासचिव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और बार एसोसिएशन से निष्कासित करने की मांग की गई है। बैठक में राजीव बाजपेई, श्याम कटियार, नरेश सिंह यादव, रवेंद्र पाल सिंह, नीरज शुक्ला,शैलेंद्र सिंह, कुंवर सिंह यादव आदि वकील मौजूद रहे।
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जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जवाहर सिंह गंगवार, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर की अगुवाई में गुरुवार को वकीलों की बैठक हुई। इसके बाद दोनों पूर्व अध्यक्षों ने बताया कि बार काउंसिल उत्तर प्रदेश में वकील अभिषेक कुमार सक्सेना ने महासचिव संजीव पारिया के खिलाफ मारपीट करने की शिकायत की थी। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद 14 फरवरी को अनुशासन समिति ने महासचिव संजीव पारिया को पांच वर्ष के लिए डिबार घोषित करने के आदेश दिए थे। महासचिव पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। किंतु महासचिव ने बार काउंसिल के कर्मचारियों की मिलीभगत से आदेश को दबवा दिया था।
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डिबार होने के बाद भी पारिया बार एसोसिएशन के महासचिव के रूप में काम करते रहे। उन्होंने बार के कोष के रुपये का दुरुपयोग किया है। उन्हें सदन की बैठक बुलाने अधिकार भी नहीं था। हड़ताल की घोषणा और वकीलों का निष्कासन भी पूरी तरह अवैैध है।
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दोनों पूर्व अध्यक्षों ने बताया कि बार काउंसिल उत्तर प्रदेश, जिला जज और जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र भेजकर महासचिव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और बार एसोसिएशन से निष्कासित करने की मांग की गई है। बैठक में राजीव बाजपेई, श्याम कटियार, नरेश सिंह यादव, रवेंद्र पाल सिंह, नीरज शुक्ला,शैलेंद्र सिंह, कुंवर सिंह यादव आदि वकील मौजूद रहे।