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Farrukhabad News: मिट्टी से साकार हो रहा माता रानी का दिव्य स्वरूप
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फर्रुखाबाद। नवरात्र की आहट के साथ ही मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं। नेकपुर क्षेत्र में राजस्थान से आए कारीगर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रंग, बांस, डाई और ढुलाई महंगी होने से इस बार प्रतिमाओं के दाम करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कारीगरों के मुताबिक, महंगाई के चलते मांग पिछले वर्ष के मुकाबले कम है।
कार्यशालाओं में मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप तैयार किए जा रहे हैं। प्रतिमाओं में आकार और डिजाइन की विविधता है। कहीं शेर के खुले मुंह वाली प्रतिमा तैयार की गई है तो कहीं बंद मुंह वाले शेर को दर्शाया गया है। मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश और हनुमान जी की मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। बाजार में पौने दो फीट की प्रतिमा 1500 रुपये और साढ़े सात फीट की प्रतिमा 8500 रुपये में मिल रही है।
राजस्थान के पाली जिले से आए कारीगर होली के बाद से ही प्रतिमाएं बनाने में जुट जाते हैं। बांस और धान के पयार से ढांचा तैयार करने के बाद उस पर मिट्टी की परतें चढ़ाई जाती हैं। सूखने पर प्रतिमा की बनावट उभारी जाती है। इसके बाद रंगाई और सजावट की जाती है। करीब चार महीने की मेहनत के बाद प्रतिमाएं स्थापना के लिए तैयार होती हैं।
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फोटो-16 सुरेश।
40 बड़ी प्रतिमाएं बनाईं, 16 के ऑर्डर
मूर्तिकार सुरेश ने बताया कि इस बार मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। महंगाई के कारण प्रतिमाओं के दाम बढ़ाने पड़े हैं। उन्होंने 40 बड़ी प्रतिमाएं बनाई हैं, जिनमें से 16 के ऑर्डर पहले ही बुक हो चुके हैं।
फोटो-17 नर्मदा।
होली के बाद शुरू करते हैं काम
राजस्थान के पाली जिले की नर्मदा ने बताया कि उनका परिवार होली मनाने के बाद फर्रुखाबाद आ जाता है। इसके बाद गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाने का काम शुरू होता है। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में मांग कम है।
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कार्यशालाओं में मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप तैयार किए जा रहे हैं। प्रतिमाओं में आकार और डिजाइन की विविधता है। कहीं शेर के खुले मुंह वाली प्रतिमा तैयार की गई है तो कहीं बंद मुंह वाले शेर को दर्शाया गया है। मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश और हनुमान जी की मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। बाजार में पौने दो फीट की प्रतिमा 1500 रुपये और साढ़े सात फीट की प्रतिमा 8500 रुपये में मिल रही है।
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राजस्थान के पाली जिले से आए कारीगर होली के बाद से ही प्रतिमाएं बनाने में जुट जाते हैं। बांस और धान के पयार से ढांचा तैयार करने के बाद उस पर मिट्टी की परतें चढ़ाई जाती हैं। सूखने पर प्रतिमा की बनावट उभारी जाती है। इसके बाद रंगाई और सजावट की जाती है। करीब चार महीने की मेहनत के बाद प्रतिमाएं स्थापना के लिए तैयार होती हैं।
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फोटो-16 सुरेश।
40 बड़ी प्रतिमाएं बनाईं, 16 के ऑर्डर
मूर्तिकार सुरेश ने बताया कि इस बार मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। महंगाई के कारण प्रतिमाओं के दाम बढ़ाने पड़े हैं। उन्होंने 40 बड़ी प्रतिमाएं बनाई हैं, जिनमें से 16 के ऑर्डर पहले ही बुक हो चुके हैं।
फोटो-17 नर्मदा।
होली के बाद शुरू करते हैं काम
राजस्थान के पाली जिले की नर्मदा ने बताया कि उनका परिवार होली मनाने के बाद फर्रुखाबाद आ जाता है। इसके बाद गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाने का काम शुरू होता है। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में मांग कम है।