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बारिश से फिर तबाही, बचीखुची फसल भी उजड़ी

Wed, 15 Apr 2015 11:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Wed, 15 Apr 2015 11:00 PM IST
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The destruction of the rain , devastated crops .
एक बार फिर से हुई मूसलाधार बारिश ने रही सही फसल भी चौपट कर दी है। बुधवार
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की सुबह 8 बजे से शुरू हुई बरसात तकरीबन 11.30 बजे तक जारी रही। खेतों पानी भर गया है। इससे बंधे पड़े गेहूं के गट्ठर व गट्ठरों के ढेर सराबोर हो गए। मड़ाई कम से कम चार से पांच दिन के लिए रुक गई। ऐसे में गट्ठरों में दीमक, दानों के काले पड़ने, सड़ने और खेत में जमने की आशंका बढ़ गई है। इससे पहले कई मर्तबा हुई बरसात से 50 फीसदी से ऊपर नुकसान हो चुका है। बुधवार की

बरसात के बाद से किसानों को बच्ची उम्मीदें भी टूटती दिख रही हैं।अब तो खाने भर को गेहूं और मवेशियों के लिए भूसा की भी आस नहीं है। कर्ज में इन्हें आलू की मंदी डुबो ही चुकी  है। पैदावार से गट्ठरों को सुखाने व मड़ाई का खर्च निकलने की उम्मीद भी नहीं दिख रही। इससे यह खेत में ही फसल छोड़ने का मन बना रहे हैं। अब एक बीघे में एक क्विंटल पैदावार

मिल जाए तो बहुत। बाजार में एक क्विंटल गेहूं की कीमत 1300 रुपये है। गेहूं के साथ ही सरसों, टमाटर व बैंगन की फसल को भी तगड़ा नुकसान पहुंचा है। कुदरत के कहर से किसानों के आगे बेटी की शादी, कर्ज चुकाने और दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अमर उजाला टीम बुधवार को ग्रामीण इलाकों में पहुंची तो दर्द सुनाते-सुनाते किसान रो पड़े।  

कैसे पीले होंगे बेटियों के हाथ
शमसाबाद के गांव ताल का नगरा निवासी जलधारा पत्नी स्व. सेवकराम जाटव घर पर अपने तीन बच्चों के साथ बैठी थीं। बच्चे भोजन मांग रहे थे। अमर उजाला संवाददाता को देखते जलधारा उठ खड़ी हुईं। बरसात में गेहूं के नुकसान के बारे में पूछते ही वह रो पड़ी। रोते हुए बताया कि कैंसर से पति की मौत हो चुकी है। पांच बच्चे हैं। आठ बीघा खेती से परिवार का

भरण पोषण करती है। 29 अप्रैल को बेटी राधा की शादी है। सोचा था फसल बेचकर बेटी की शादी करेंगी लेकिन भगवान ने ऐसा कहर बरपाया कि खाने तक को गेहूं नहीं बचा है। कर्ज से ही शादी करना पड़ेगी। पति का इलाज कराने के लिए केसीसी से ऋण लिया था। वह भी चुकाना है। खेत में खाने भर को गेहूं निकल आए। यही भगवान से प्रार्थना है।

गांव मुरैठी के सत्यभान सिंह ने बताया कि उनके पास ढाई बीघा खेत में गेहूं की फसल की थी। बरसात और ओलावृष्टि से पहले ही फसल 50 से 60 प्रतिशत बर्बाद हो चुकी थी। बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने बची हुई फसल भी बर्बाद कर दी है। इनकी बेटी अंजुम कुमारी की शादी भी 21 अप्रैल को है। कहते हैं कि ‘बरसात में गेहूं पूरो भीग गओ है। सूखन पर सड़ जइयै।  15-20 परसेंट बच जावै बई बहुत है।’

खाने भर को भी गेहूं होना मुश्किल
कंपिल के गांव होतेपुर निवासी सूरज सिंह (70) कहते हैं कि छह बीघे में 10 हजार रुपये कर्ज लेकर गेहूं बोया था। एक-दो दिन पहले ही काटकर खेत में जमा किया था। बुधवार को खंदाई करनी थी लेकिन सुबह हुई जोरदार बारिश से पूरी फसल भीग गई। फसल सूखने के बाद बाली काली हो जाएगी। 10-15 फीसदी फसल ही बच जाए तो बहुत है। खाने तक को गेहूं

निकलना मुश्किल है । प्रेमचंद्र ने बताया कि 50 हजार रुपये केसीसी ऋण है। तीन बीघे में गेहूं किया था। सोचा था कि फसल बेचकर कर्ज चुकाएंगे लेकिन इस बारिश से फसल बचने की उम्मीद ही खत्म हो गई है। मधु (60) पत्नी स्व. मेवाराम ने बताया कि तीन बीघे में गेहूं किया था। मंगलवार को ही कटनई की थी। बरसात से पूरा भीग गया। सूखने पर गेहूं सड़ जाएगा। मधु ने बताया कि बेटी की इसी साल शादी करनी थी। नहीं पता, वह अब क्या करेगी। तेजपाल, बादाम सिंह और

भूरे सिंह का कहना है कि बरसात से 80 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है। खाने तक को लाले पड़ सकते हैं। कोई भी थ्रेसर से कटाई करने को तैयार नहीं है। वह यह कहते हुए मना कर देते हैं कि जब गेहूं निकलेगा ही नहीं तो उन्हें क्या मिलेगा। गिरधारी नगला के अंगनूलाल, वीरपाल, महावीर, खुशीराम, रामनिवास और जमादार का कहना है कि उनकी कटी पड़ी फसल पूरी तरह से भीग गई है। बाली काली पड़ने लगी है। जिला प्रशासन से कोई भी अफसर और कर्मचारी सर्वे करने भी नहीं आया है।

कुदरत की मार ने कहीं का न छोड़ा
राजेपुर के गांव कुइयां निवासी हिसार खां ने बताया कि 20 बीघे में गेहूं की फसल की थी। चार बीघा गेहूं ही काटकर खंदाई की थी। मात्र छह क्विंटल गेहूं निकला था। बाकी गेहूं खेत में कटा पड़ा था। बुधवार की बरसात में सारा गेहूं भीग गया। इसके खराब होने की आशंका है। बताया कि 10 बच्चे हैं। फसल बर्बाद होने से रोजीरोटी का संकट खड़ा होगा। मजदूरी करके जैसे-तैसे बच्चों का पेट पालेगे। उदय पाल निवासी राजेपुर ने बताया कि 15 बीघा खुद के और 15 बीघा बटाई के

खेत में गेहूं किया था। पिछले दिनों हुई बरसात व ओलावृष्टि से पहले ही फसल खराब हो गई थी। सात बीघे में मात्र 16 क्विंटल गेहूं निकला। कुछ गेहूं खेत में कटा पड़ा था और कुछ काटना था। बुधवार की बारिश से सारी फसल भीगकर पूरी तरह बर्बाद हो गई है। ऋण चुकाने और बच्चों के परवरिश की चिंता सताए जा रही है। कुदरत की मार ने कहीं का नहीं छोड़ा है।

सूखने के बाद गेहूं की बाली पड़ेगी काली
नवाबगंज में अब 10 दिनों तक गेहूं की कटनई और खंदाई नहीं हो सकेगी। किसानों का कहना है कि जितनी फसल बची थी आज हुई बरसात से उसमें से 50 फीसदी बर्बाद होने की आशंका है। नगला हीरा सिंह के सत्यभान, गनीपुर निवासी रामआसरे, त्यौरी निवासी मनोज दुबे, नवाबगंज निवासी भगवानदास, स्वदेश कुमार, बरतल निवासी हवलदार, लज्जाराम,

लालाराम दिवाकर और रामरईस दिवाकर आदि किसानों का कहना है कि बुधवार को हुई बरसात ने पूरी तरह फसल बर्बाद कर दी है। अब तो खाने तक का संकट होगा। जब गेहूं सूखेगा तो बाली काली पड़ जाएगी। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि फसल नुकसानी का सर्वे कराकर मुआवजा उपलब्ध करवाएं।

अब तो बस मजदूरी से ही होगा गुजारा
कमालगंज के गांव जीरागौर निवासी शाहिद हुसैन ने बताया कि दो बीघा खेत में गेहूं की फसल की थी। एक तो पहले से ही फसल बर्बाद थी। बुधवार को हुई बरसात ने बची हुई फसल भी चौपट कर दी। कहा कि खाने भर को गेहूं निकल आए तो बड़ी बात है। इमरान ने बताया कि तीन बीघा खेत में गेहूं बोया था। बरसात से सारा गेहूं खराब हो गया है। तीन बच्चे हैं।

बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और पेट भरने की चिंता सता रही है। सिर्फ खाने भर को ही गेहूं निकल आए तो बड़ी बात है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए मजदूरी करेंगे।

कैसे चुकेगा कर्ज और कैसे होगा बेटी का ब्याह
अमृतपुर के गांव परतापुर कला निवासी हरीराम यादव ने बताया कि 25 बीघा गेहूं की बुवाई में करीब 50 हजार की लागत आई थी। बुधवार को हुई बरसात ने उम्मीदें धो दी हैं। बाली सूखने के बाद काली पड़ जाएगी। बेटी सविता की 29 अप्रैल को बारात आनी है। शादी की चिंता सता रही है। फसल बुवाई में 25 हजार रुपये ग्रामीण बैंक और 75 हजार रुपये साधन

सहकारी समिति अमृतपुर बैंक से केसीसी ऋण लिया। कर्ज कैसे चुकाएंगे। बेटी की शादी के इंतजाम भी कैसे होंगे। बरसात से गेहूं की फसल करीब 60 प्रतिशत बर्बाद हो गई है। किसान राजबहादुर ने बताया कि 10 बीघा खेत में गेहूं की फसल है। फसल भीगने से गेहूं सड़ने के आसार हैं। 1.20 लाख रुपये का केसीसी ऋण लिया था। बरसात से गेहूं पूरी तरह खराब हो गया है। खाने भर को ही गेहूं बामुश्किल निकलेगा। कर्ज कैसे चुकाएंगे।

भूसा या गेहूं, क्या लेकर घर जाऊं
मोहम्मदाबाद के गांव नगला दलजीत सिंह के रहने वाले किसान राजेश कुमार कठेरिया ने चार बीघा में गेहूं की फसल की थी। इनका कहना है कि फसल की बर्बादी का ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। खेत से अनाज घर लेकर जाएं या भूसा। यह सोचकर हालत खराब है। पत्नी ऊषा देवी ने बताया कि पांच बच्चे हैं। घर में पशु भी हैं। परिवार के सदस्यों का पेट पालना

तो मुश्किल होगा ही पशुओं के लिए भूसा कहां से आएगा। मजदूरी के अलावा अन्य उपाय नहीं है।  गांव नगला धीमर मौजा मौधा के राजू सविता ने साढ़े चार बीघा में गेहूं की फसल की थी। आधी फसल खेत में कटी पड़ी थी। बुधवार की बरसात से गेहूं सराबोर हो गया। राजू सविता का कहना है कि  खेत में गेहूं कटा पड़ा था। भीगने से इसका सड़ना तय है। भूसे का घूरा

हो जाएगा। अनाज घर पर जाएगा या खेत में पड़ा रहगा यह अब भगवान के भरोसे है। पत्नी कुसुमादेवी ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। सबसे बड़ी पुत्री रुचि की शादी करनी है। गांव के कुछ लोगों से 10 हजार रुपये कर्ज लिया था। पेट भरने के लिए अब मजदूरी का सहारा है।
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