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Farrukhabad News: ग्रामीण का लटका मिला शव, सुसाइड नोट में पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप

Sun, 28 Dec 2025 01:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Sun, 28 Dec 2025 01:29 AM IST
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The body of a villager was found hanging; the suicide note accused the police of harassment.
फोटो-6 ग्रामीण की जेब से मिला सुसाइड नोट। संवाद
फर्रुखाबाद। मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नगला मना निवासी ग्रामीण का शव शनिवार सुबह घर के सामने लगे बबूल के पेड़ पर मफलर के फंदे से लटका मिला। पत्नी का आरोप है कि पुलिस की प्रताड़ना से परेशान होकर पति के आत्महत्या की है। ग्रामीण की जेब में सुसाइड नोट मिला है। इसमें पुलिस के दबाव में आत्महत्या करने की बात लिखी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि वर्ष 1998 में तमंचा रखने के आरोप में पकड़ा गया था। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। ग्रामीण पढ़ा लिखा नहीं था तो वह सुसाइड नोट कैसे लिख सकता है। मामले की जांच कराई जाएगी।
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ग्राम पंचायत बिजौरी के मजरा नगला मना निवासी प्रमोद कुमार (44) टीबी का मरीज था। वह वर्ष 1998 में तमंचा रखने के आरोप में पकड़ा गया था। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। इस मामले में वह लंबे समय से अदालत में पेश नहीं हो रहा था। इससे उसके खिलाफ वारंट जारी होने के बाद कुर्की के आदेश हो गए थे। इसके चलते पुलिस उसे तलाश कर रही थी।
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19 दिसंबर को पुलिस कुर्की के लिए उसके घर गई थी, पर बिना कार्रवाई के लौट गई थी। शुक्रवार शाम भोजन करने के बाद वह सो गया। पत्नी मालती देवी अपने पुत्रों पुत्र रिशू(10), आर्यन(8), आयुष(5) व पियूष(4) के साथ दूसरे कमरे में सो रही थीं। शनिवार सुबह गांव के लोगों ने प्रमोद का शव उसके घर के सामने बबूल के पेड़ पर फंदे से लटका देखा। चीख पुकार करने पर उसकी पत्नी मालती व बच्चे बाहर आ गए। ग्रामीणों ने शव को फंदे से उतार लिया।
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ग्रामीणों व परिजनों का कहना है कि उसकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है कि मैं टीबी का मरीज हूं। मुझे हर दिन पुलिस परेशान करती है। हमारे पास खाने को भी नहीं है। पुलिस के दबाव की वजह से हम आत्महत्या कर रहे हैं। पत्नी मालती देवी ने भी पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। सूचना पर मेरापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पोस्टमार्टम हाउस में मिले रोजगार सेवक जिउराखन ने बताया कि मालती देवी मनरेगा श्रमिक हैं। मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी से ही वह परिवार चलाती है। गांव के लोग भी उसकी मदद करते हैं। टीबी का मरीज होने से प्रमोद अब मजदूरी भी नहीं कर पाता था। उसके खिलाफ वारंट होने से पुलिस आए दिन दबिश देती रहती थी।
सीओ कायमगंज राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रमोद के खिलाफ 1989 में तमंचा बरामद होने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इस मामले में अदालत में पेश न होने से अदालत से वारंट जारी होने के बाद कुर्की के आदेश हुए थे। इसके चलते ही पुलिस 19 दिसंबर को उसके घर गई थी। प्रताड़ित किए जाने का आरोप गलत है। प्रमोद पढ़ा लिखा नहीं था तो वह सुसाइड नोट कैसे लिख सकता है। इस मामले की गंभीरता जांच होगी। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।



रुपये व अंगोछा लेकर पोस्टमार्टम करने का आरोप
प्रमोद कुमार का शव लेकर ग्रामीण पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां मौजूद एक पूर्व आउटसोर्स कर्मचारी ने तत्काल ग्रामीणों से संपर्क किया और एक हजार रुपये व अंगोछा ले लिया। ग्रामीण म्याकू लाल ने पूछा कि यहां रुपये किस बात के जमा होते हैं। इस पर उसने कहा कि समझते तो हो ही। कुछ देर बाद ग्रामीणों को धमकाने लगा कि अब पोस्टमार्टम करवा लो तब जानें। शव लेकर साथ गए रोजगार सेवक जिउराखन ने फोन पर बताया कि रुपये लेने वाला कर्मचारी सभी को धमकी दे रहा है। कहा कि यहां बिना रुपये दिये पोस्टमार्टम नहीं होगा। यदि किसी को बताया तो महंगा पड़ सकता है। पोस्टमार्टम हाउस के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.सर्वेश यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए किसी से रुपये नहीं लिए जा सकते। इसकी गंभीरता से जांच कराकर दाेषी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

फोटो-6 ग्रामीण की जेब से मिला सुसाइड नोट। संवाद

फोटो-6 ग्रामीण की जेब से मिला सुसाइड नोट। संवाद

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