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बही अध्यात्म की बयार पर बदइंतजामी बेशुमार
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 06 Jan 2015 11:22 PM IST
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रामनगरिया में अध्यात्म की बयार बहनी शुरू हो गई है। कहीं रामप्रसंग तो
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कहीं कृष्ण प्रसंग पर चर्चा होती दिखी। कल्पवासी धार्मिक अनुष्ठानों में
दिनभर मशगूल रहे। क्षेत्र में साधुसंतों के लिए जगह-जगह भोज हुए लेकिन मेला
प्रशासन के तमाम वादे 24 घंटे बीतते ही खोखले नजर आए।
प्रशासनिक क्षेत्र में बने अस्पताल में डाक्टर नदारद दिखे तो दुकानदार दुकानों के चिन्हांकन के लिए चिंतित दिखे। संतों ने व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया है। कोटेदार मेला में पहुंचे ही नहीं। शौचालय बेपरदा हैं। पुलिस भले ही पूरी तरह से न पहुंची हो लेकिन अराजकतत्वों का आना शुरू हो चुका है। इसको देखते हुए संतों ने सुरक्षा की मांग की है।
राम का चरित्र जीवन में उतारें
रामनगरिया क्षेत्र में हरदोई से पधारीं मानस मर्मज्ञ साध्वी साधना में रामकथा का वर्णन करते हुए कहा कि राम का चरित्र अनुकरणीय है। जो लोग भगवान राम के चरित्र को जीवन में उतारेंगे, उनका जीवन धन्य हो जाएगा। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। मनुष्य को मर्यादा में रहकर सांसारिक भोग करना चाहिए। वहीं बच्चा बाबा आश्रम में कथावाचक रमेशचंद्र पांडेय ने
रामचरित मानस का प्रसंग सुनाया कि मानस में माघ मास का बड़ा महत्व है। गंगा में स्नान का पुण्य कमाने के लिए देवात्माएं भी इस पृथ्वी पर अवतरित होती हैं। मेला क्षेत्र के साधुसंतों को बुला-बुलाकर भोजन कराया गया। दान-दक्षिणा दी गई।
आदर्श आश्रम के सत्यस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने सती प्रसंग में कहा कि सती ने भगवान शंकर से हठधर्म निभाते हुए भगवान राम की परीक्षा ली। इससे नाराज होकर भगवान शंकर ने उनको त्याग दिया। उन्होंने कहा कि हठधर्मिता किसी भी स्वरूप में स्वीकार नहीं की जा सकती।
कोतवाल बाबा ने किया अचंभित
नागा कोतवाल फरसा बाबा जगह-जगह लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते दिखे। उन्होंने कहा कि भले ही पुलिस प्रशासन सुरक्षा देने में चूक जाए लेकिन वह पूरे रामनगरिया क्षेत्र में दिन भर भ्रमण करेंगे । कल्पवासियाें को वह को सुरक्षा मुहैया कराएंगे। किसी भी गृहस्थ या कल्पवासी की समस्या के मेला प्रशासन से लड़ने से नहीं चूकेंगे।
बाबा बीमार, डाक्टर नदारद
दोपहर करीब 2.30 बजे रामप्रसाद आश्रम के महंत का अचानक बीपी बढ़ गया। अनुयायी मेला इलाके के अस्थायी अस्पताल पहुंचे तो कोई भी डाक्टर वहां तैनात नहीं मिला। सूचना पर प्रशासन की ओर से तत्काल डा. मेहरोत्रा को बुलाया गया। तब बाबा को उपचार मिल सका। वहां उपस्थित बाबा डाक्टरों के नदारद होने की खबर से भड़क गए। उनका कहना था कि अभी एक दिन भी नहीं बीता है कि प्रशासन के वादे झूठे साबित होने लगे हैं।
शौचालय में नहीं पर्दा
प्रशासन की ओर से बनाए गए शौचालयों को ऐसे ही खुला छोड़ दिया गया है। कई लोगों ने पन्नी तो किसी ने सपा के झंडे से ही पर्दे का काम चलाना मुनासिब समझा। शौचालयों में पर्दा न होने से कल्पवासी खुले में शौच को मजबूर हैं। प्रशासन ने वादा किया था कि मेले में स्वच्छता बनाई रखी जाएगी और इसका लोगों को पाठ भी पढ़ाया था। खुले में शौच के कारण स्वच्छता अभियान धरा रह गया।
नहीं बने राशन कार्ड
सरकारी सस्ते गल्ले की 15 दुकानों का आवंटन तो हो चुका है। उनके लिए स्थान भी निर्धारित कर दिए गए हैं। 6 जनवरी से कार्ड बनाने का प्रशासन ने वादा किया था। मंगलवार को बनाई गई अस्थायी दुकानें खाली पड़ी थीं। सुबह जब कल्पवासी कार्ड बनवाने के लिए पहुंचे तो वहां उन्हें कोई भी नजर नहीं आया। दोपहर तक इंतजार करने के बाद लोग लौट गए। लोगों को मजबूरन महंगे दर पर राशन व केरोसिन खरीदना पड़ा।
कोतवाली बनी, चौकी गायब
मेला रामनगरिया क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने लंबे-चौड़े वादे किए थे। इसको लेकर प्रशासनिक क्षेत्र में कोतवाली भी बनाई गई। कोतवाली तक ही पुलिस के जवान सीमित रहे। करीब चार किलोमीटर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए छह पुलिस चौकी बननी थीं।
अभी तक कोई भी चौकी शुरू नहीं हो पाई है। कल्पवासी अपनी सुरक्षा स्वयं कर रहे हैं। कल्पवास क्षेत्र में आए साधु संतों ने पुलिस प्रशासन से उनके आश्रमों के बाहर गार्ड तैनात करने की मांग की। मेले में लगाए गए होमगार्डों ने अभी तक आमद दर्ज नहीं कराई है। वहीं तैनात 50 पीआरडी जवानों के रुकने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
आयुर्वेद अस्पताल चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले
प्रशासन की ओर से बनाए गए आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डाक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए दवा वितरण का काम वहां तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुरेंद्र सिंह को सौंप दिया है। मेले में यह बीमारों को दवा बांटते हुए देखे गए ।
खुलेआम बिक रहे नशीले पदार्थ
प्रतिबंध के बावजूद भी मेला क्षेत्र में गुटखा की बिक्री जारी है। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई है। लेकिन इस सबको धता बताकर दुकानदार खुलेआम गुटखा व अन्य नशीले पदार्थ बेच रहे हैं। साथ ही पालीथिन भी दुकानदारों के पास दिखाई दी।
प्रशासनिक क्षेत्र में बने अस्पताल में डाक्टर नदारद दिखे तो दुकानदार दुकानों के चिन्हांकन के लिए चिंतित दिखे। संतों ने व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया है। कोटेदार मेला में पहुंचे ही नहीं। शौचालय बेपरदा हैं। पुलिस भले ही पूरी तरह से न पहुंची हो लेकिन अराजकतत्वों का आना शुरू हो चुका है। इसको देखते हुए संतों ने सुरक्षा की मांग की है।
राम का चरित्र जीवन में उतारें
रामनगरिया क्षेत्र में हरदोई से पधारीं मानस मर्मज्ञ साध्वी साधना में रामकथा का वर्णन करते हुए कहा कि राम का चरित्र अनुकरणीय है। जो लोग भगवान राम के चरित्र को जीवन में उतारेंगे, उनका जीवन धन्य हो जाएगा। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। मनुष्य को मर्यादा में रहकर सांसारिक भोग करना चाहिए। वहीं बच्चा बाबा आश्रम में कथावाचक रमेशचंद्र पांडेय ने
रामचरित मानस का प्रसंग सुनाया कि मानस में माघ मास का बड़ा महत्व है। गंगा में स्नान का पुण्य कमाने के लिए देवात्माएं भी इस पृथ्वी पर अवतरित होती हैं। मेला क्षेत्र के साधुसंतों को बुला-बुलाकर भोजन कराया गया। दान-दक्षिणा दी गई।
आदर्श आश्रम के सत्यस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने सती प्रसंग में कहा कि सती ने भगवान शंकर से हठधर्म निभाते हुए भगवान राम की परीक्षा ली। इससे नाराज होकर भगवान शंकर ने उनको त्याग दिया। उन्होंने कहा कि हठधर्मिता किसी भी स्वरूप में स्वीकार नहीं की जा सकती।
कोतवाल बाबा ने किया अचंभित
नागा कोतवाल फरसा बाबा जगह-जगह लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते दिखे। उन्होंने कहा कि भले ही पुलिस प्रशासन सुरक्षा देने में चूक जाए लेकिन वह पूरे रामनगरिया क्षेत्र में दिन भर भ्रमण करेंगे । कल्पवासियाें को वह को सुरक्षा मुहैया कराएंगे। किसी भी गृहस्थ या कल्पवासी की समस्या के मेला प्रशासन से लड़ने से नहीं चूकेंगे।
बाबा बीमार, डाक्टर नदारद
दोपहर करीब 2.30 बजे रामप्रसाद आश्रम के महंत का अचानक बीपी बढ़ गया। अनुयायी मेला इलाके के अस्थायी अस्पताल पहुंचे तो कोई भी डाक्टर वहां तैनात नहीं मिला। सूचना पर प्रशासन की ओर से तत्काल डा. मेहरोत्रा को बुलाया गया। तब बाबा को उपचार मिल सका। वहां उपस्थित बाबा डाक्टरों के नदारद होने की खबर से भड़क गए। उनका कहना था कि अभी एक दिन भी नहीं बीता है कि प्रशासन के वादे झूठे साबित होने लगे हैं।
शौचालय में नहीं पर्दा
प्रशासन की ओर से बनाए गए शौचालयों को ऐसे ही खुला छोड़ दिया गया है। कई लोगों ने पन्नी तो किसी ने सपा के झंडे से ही पर्दे का काम चलाना मुनासिब समझा। शौचालयों में पर्दा न होने से कल्पवासी खुले में शौच को मजबूर हैं। प्रशासन ने वादा किया था कि मेले में स्वच्छता बनाई रखी जाएगी और इसका लोगों को पाठ भी पढ़ाया था। खुले में शौच के कारण स्वच्छता अभियान धरा रह गया।
नहीं बने राशन कार्ड
सरकारी सस्ते गल्ले की 15 दुकानों का आवंटन तो हो चुका है। उनके लिए स्थान भी निर्धारित कर दिए गए हैं। 6 जनवरी से कार्ड बनाने का प्रशासन ने वादा किया था। मंगलवार को बनाई गई अस्थायी दुकानें खाली पड़ी थीं। सुबह जब कल्पवासी कार्ड बनवाने के लिए पहुंचे तो वहां उन्हें कोई भी नजर नहीं आया। दोपहर तक इंतजार करने के बाद लोग लौट गए। लोगों को मजबूरन महंगे दर पर राशन व केरोसिन खरीदना पड़ा।
कोतवाली बनी, चौकी गायब
मेला रामनगरिया क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने लंबे-चौड़े वादे किए थे। इसको लेकर प्रशासनिक क्षेत्र में कोतवाली भी बनाई गई। कोतवाली तक ही पुलिस के जवान सीमित रहे। करीब चार किलोमीटर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए छह पुलिस चौकी बननी थीं।
अभी तक कोई भी चौकी शुरू नहीं हो पाई है। कल्पवासी अपनी सुरक्षा स्वयं कर रहे हैं। कल्पवास क्षेत्र में आए साधु संतों ने पुलिस प्रशासन से उनके आश्रमों के बाहर गार्ड तैनात करने की मांग की। मेले में लगाए गए होमगार्डों ने अभी तक आमद दर्ज नहीं कराई है। वहीं तैनात 50 पीआरडी जवानों के रुकने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
आयुर्वेद अस्पताल चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले
प्रशासन की ओर से बनाए गए आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात डाक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए दवा वितरण का काम वहां तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुरेंद्र सिंह को सौंप दिया है। मेले में यह बीमारों को दवा बांटते हुए देखे गए ।
खुलेआम बिक रहे नशीले पदार्थ
प्रतिबंध के बावजूद भी मेला क्षेत्र में गुटखा की बिक्री जारी है। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई है। लेकिन इस सबको धता बताकर दुकानदार खुलेआम गुटखा व अन्य नशीले पदार्थ बेच रहे हैं। साथ ही पालीथिन भी दुकानदारों के पास दिखाई दी।