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टेक्सटाइल पार्क -41 एकड़ में होगा निर्माण
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 04 Feb 2015 11:04 PM IST
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जिले में लंबे समय से चल रही टेक्सटाइल पार्क मांग पर बुधवार क ो कैबिनेट
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ने मुहर लगा दी। कैबिनेट की बैठक में यह मसौदा पास हो गया है। पार्क
मोहम्मदाबाद इलाके के सकवाई में 41 एकड़ जमीन में डेवलप होगा। यह 126 करोड़
रुपये का प्रोजक्ट है। पार्क बनने के बाद टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार 500 से
5000 करोड़ सालाना होने की उम्मीदें हैं। यहां
कारोबारियाें को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया हाेंगी। इससे यहां के कारोबारियों की टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार में चीन का रुतबा कम करने की मंशा भी पूरी होगी। जिले में टेक्सटाइल प्रिंट का कारोबार 138 साल पुराना है। यहां के कारोबारी 15 मुल्कों को आइटम निर्यात करते हैं।
जिले के कारोबारी साल 2007 से टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन की मांग कर रहे थे। कैबिनेट की बैठक में 35 एकड़ जमीन का मसौदा पास हुआ है। बाकी 6 एकड़ जमीन इलाकाई किसानाें से खरीदी जाएगी। 126 करोड़ के प्रोजेेेेक्ट में से 40 करोड़ केंद्र व 9 करोड़ की हिस्सेदारी यूपी गवर्नमेंट की होगी। 77 करोड़ रुपये फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड कारोबारियाें से जुटाएगी। टेक्सटाइल प्रिंटिंग को ज्योग्राफिकल इंडीकेशन मिला हुआ है।
पार्क में 25 एकड़ में फैक्ट्री एरिया होगा और 4 एकड़ हिस्सा खुला रहेगा। 2 एकड़ जमीन में कॉमन फैसिलिटी सेंटर व 9.50 एकड़ में कॉमन इंफ्र ास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। यहां बुनाई, छपाई, प्रोसेसिंग, गारमेंटिंग,लेवलिंग व पैकेजिंग भी होगी। इससे अगले सालों में 50 हजार बेरोजगाराें को और काम मिलेगा। डिजिटल प्रिंटिंग भी शुरू होगी। शहर में 225 इकाइयां टेक्सटाइल प्रिंटिंग करती हैं।
इनमें से 12 इकाइयां सीधे निर्यात करती हैं। कारोबार की हैंडमेड छापे के परदे, हैंड कुल्टिड बेड कवर कम रजाई, स्टोल, स्कार्फ, शाल व साडियां जर्मनी, बेल्जियम, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली, पाकिस्तान, ईरान, ईराक, दुबई, पाकिस्तान, अफ्रीका, इजरायल, हंगरी, टर्की, रूस देशों को निर्यात होती हैं। 2007 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्रुखाबादी निर्यातकाें ने गुणवत्ता के जरिए चीन को मात दी थी।
इसी साल से निर्यात कारोबार 100 करोड़ सालाना से 500 करोड़ रुपये पर पहुंचा था। इसके बाद से संभावनाआें क ो देखते हुए इंडस्ट्री को संसाधनों से लैस करने के लिए पार्क की मांग शुरू हुई। इनकी मंशा विश्व बाजार में चीन को मात देने की थी। भारतीय बाजार अभी भी 100 करोड़ रु पये सालाना का है। कम संसाधनाें से कारोबारी भारतीय व निर्यात बाजार की मांग ही पूरी नहीं कर पा रहे थे।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेप्टर चेयरमैन रोहित गोयल का कहना है कि कारोबारियाें को बड़ी सौगात मिली है। पहले पार्क में 50 इंडस्ट्री शुरू हाेंगी। इसके बाद यह संख्या 130 तक पहुंचेगी। यह कहते हैं कि पार्क से कारोबार में 10 गुना का इजाफा होगा।
कारोबारियाें को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया हाेंगी। इससे यहां के कारोबारियों की टेक्सटाइल प्रिंट कारोबार में चीन का रुतबा कम करने की मंशा भी पूरी होगी। जिले में टेक्सटाइल प्रिंट का कारोबार 138 साल पुराना है। यहां के कारोबारी 15 मुल्कों को आइटम निर्यात करते हैं।
जिले के कारोबारी साल 2007 से टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन की मांग कर रहे थे। कैबिनेट की बैठक में 35 एकड़ जमीन का मसौदा पास हुआ है। बाकी 6 एकड़ जमीन इलाकाई किसानाें से खरीदी जाएगी। 126 करोड़ के प्रोजेेेेक्ट में से 40 करोड़ केंद्र व 9 करोड़ की हिस्सेदारी यूपी गवर्नमेंट की होगी। 77 करोड़ रुपये फर्रुखाबाद टेक्सटाइल पार्क प्राइवेट लिमिटेड कारोबारियाें से जुटाएगी। टेक्सटाइल प्रिंटिंग को ज्योग्राफिकल इंडीकेशन मिला हुआ है।
पार्क में 25 एकड़ में फैक्ट्री एरिया होगा और 4 एकड़ हिस्सा खुला रहेगा। 2 एकड़ जमीन में कॉमन फैसिलिटी सेंटर व 9.50 एकड़ में कॉमन इंफ्र ास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। यहां बुनाई, छपाई, प्रोसेसिंग, गारमेंटिंग,लेवलिंग व पैकेजिंग भी होगी। इससे अगले सालों में 50 हजार बेरोजगाराें को और काम मिलेगा। डिजिटल प्रिंटिंग भी शुरू होगी। शहर में 225 इकाइयां टेक्सटाइल प्रिंटिंग करती हैं।
इनमें से 12 इकाइयां सीधे निर्यात करती हैं। कारोबार की हैंडमेड छापे के परदे, हैंड कुल्टिड बेड कवर कम रजाई, स्टोल, स्कार्फ, शाल व साडियां जर्मनी, बेल्जियम, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली, पाकिस्तान, ईरान, ईराक, दुबई, पाकिस्तान, अफ्रीका, इजरायल, हंगरी, टर्की, रूस देशों को निर्यात होती हैं। 2007 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में फर्रुखाबादी निर्यातकाें ने गुणवत्ता के जरिए चीन को मात दी थी।
इसी साल से निर्यात कारोबार 100 करोड़ सालाना से 500 करोड़ रुपये पर पहुंचा था। इसके बाद से संभावनाआें क ो देखते हुए इंडस्ट्री को संसाधनों से लैस करने के लिए पार्क की मांग शुरू हुई। इनकी मंशा विश्व बाजार में चीन को मात देने की थी। भारतीय बाजार अभी भी 100 करोड़ रु पये सालाना का है। कम संसाधनाें से कारोबारी भारतीय व निर्यात बाजार की मांग ही पूरी नहीं कर पा रहे थे।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेप्टर चेयरमैन रोहित गोयल का कहना है कि कारोबारियाें को बड़ी सौगात मिली है। पहले पार्क में 50 इंडस्ट्री शुरू हाेंगी। इसके बाद यह संख्या 130 तक पहुंचेगी। यह कहते हैं कि पार्क से कारोबार में 10 गुना का इजाफा होगा।