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Farrukhabad News: आरोग्य मंदिरों पर नहीं पहुंची 48 लाख की जांच सामग्री
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फर्रुखाबाद। 48 लाख रुपये से खरीदी गई जांच सामग्री छह माह बाद भी 17 आरोग्य मंदिरों पर नहीं पहुंच सकी। जिन आरोग्य मंदिरों के लिए यह सामग्री खरीदी गई, उनमें से कुछ में ताले ही पड़े रहते हैं। आलम यह है कि कुछ केंद्र कागजों में ही चल रहे हैं। कुछ केंद्र सहायक स्टाफ व नर्स के भरोसे चलाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
जनपद में स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। 12 आरोग्य मंदिर शहर में व पांच कस्बों में संचालित बताए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इस वित्तीय वर्ष में सभी 17 केंद्रों के लिए 48 लाख रुपये की जांच सामग्री खरीदी गई।
संविदा पर चयन कर डॉक्टरों की तैनाती भी की गई। उन्हें एक लाख रुपये प्रति माह वेतन भी दिया जा रहा है। खास बात यह कि आरोग्य मंदिरों के अधिकांश भवन अपने न होने से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह किराये पर भी खर्च हो रहा है। इसके अलावा फर्नीचर, बेड, जांच उपकरण, अलमारी, एसी, पंखा आदि उपकरणों पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
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हकीकत में कायमगंज में अब तक एक आरोग्य मंदिर संचालित नहीं हो सका है। वहां जांच सामग्री भी नहीं भेजी गई। इस केंद्र के लिए तैनात डॉक्टर से सीएचसी पर काम लिया जा रहा है। मोहम्मदाबाद में आरोग्य मंदिर दोपहर 2:30 बजे बंद मिला। जबकि आरोग्य मंदिर सुबह नौ से चार बजे तक खुलने का समय निर्धारित है।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय से जब इस संदर्भ में जानकारी की गई तो उन्होंने खरीदी गई जांच सामग्री आरोग्य मंदिरों में न पहुंचने का सवाल सुनते ही उसे टालने का प्रयास किया, जब दोबारा पूछा तो उन्होंने फोन काट दिया।
छह माह से नहीं मिली जांच सामग्री
फोटो-32 श्याम नगर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीज देखते डॉ.रविरतन। संवाद
केस 1. शहर के श्याम नगर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में डॉ. रविरतन मरीज देखते मिले। दो में से एक सहायक स्टाफ मौजूद था। यहां बड़ी मात्रा में बोतलों में एक्सपायर दवाएं भी रखी थीं। जांच सामग्री पिछले छह माह से नहीं भेजी गई। डॉक्टर ने बताया कि एलटी न होने से मरीजों की जांच कौन करेगा। इससे पूर्व में आई जांच सामग्री पीएचसी आईटीआई, साहबगंज व रकाबगंज भेज दी गई। कुछ जांच सामग्री उपलब्ध है। एक्सपायर दवाओं के निस्तारण के लिए सूचना भेज दी गई है। 15 दिन से बिजली नहीं आ रही है। हैंडपंप खराब है। बारिश में छत से पानी टपकता है। कई जगह भवन की दीवारें व छत दरकी हैं।
फोटो-33 नरायनपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीज देखते डॉ.प्रिंस चौधरी। संवाद
केस 2. नरायनपुर स्थित आरोग्य मंदिर में डॉ. प्रिंस चौधरी, स्टाफ नर्स व दो सहायक स्टाफ मौजूद थीं। बताया गया कि फरवरी में जांच सामग्री मिली थी, उसी से मरीजों की जांच की जा रही है। दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। खांसी का सिरप नहीं है।
टोकरी में दवा, जांच सामग्री मिलती नहीं
फोटो-34 बेवर रोड भोलेपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मौजूद स्टाफ नर्स, बाई तरफ रखीं दवाएं। संवाद
केस 3. फतेहगढ़ के बेवर रोड भोलेपुर स्थित आरोग्य मंदिर में स्टाफ नर्स शीतल जॉर्ज मौजूद थीं। दो में से कोई सहायक स्टाफ मौजूद नहीं था। पूछने पर स्टाफ नर्स ने बताया कि एक वर्ष से वह तैनात हैं। उन्हें सिर्फ प्रेग्नेंसी जांच किट मिली थी। अन्य कोई भी जांच सामग्री कभी मिली हीं नहीं। जब एलटी तैनात नहीं है तो सभी जांचें कौन करेगा। यहां किसी डॉक्टर की भी तैनाती नहीं है।
सहायक स्टाफ के भरोसे आरोग्य मंदिर
फोटो-35 बंधौआ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में रखी दवाएं व गेट पर खड़ा कर्मचारी। संवाद
केस 4. फतेहगढ़ के मोहल्ला बंधौआ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सहायक स्टाफ राजेश कुमार परिसर में खड़े मिले। पूछने पर बताया कि यहां किसी डॉक्टर की तैनाती न होने से मरीजों को पीएचसी भोलेपुर व नवदिया भेज देते हैं। करीब एक वर्ष से जांच सामग्री न तो आई है और न ही जरूरत पड़ी। बिना डॉक्टर मरीजों को न तो वह दवाई दे सकते और न ही जांच कर सकते। दूसरा सहायक स्टाफ आया नहीं है।
सामग्री न भेजने के कारणों की करेंगे जानकारी
एसीएमओ स्टोर डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि जांच सामग्री की खरीद की गई है, लेकिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर क्यों नहीं भेजी, इसके कारणों की जानकारी करेंगे। जरूरत वाले स्थानों पर सामग्री भिजवाकर 14 प्रकार की जांचों का मानक पूरा कराया जाएगा। कायमगंज में एक आरोग्य मंदिर अभी नहीं खुल सका है। उसे भी जल्द चालू कराया जाएगा। मोहम्मदाबाद में बंद मिले आरोग्य मंदिर की जांच कराई जाएगी।
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जनपद में स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। 12 आरोग्य मंदिर शहर में व पांच कस्बों में संचालित बताए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इस वित्तीय वर्ष में सभी 17 केंद्रों के लिए 48 लाख रुपये की जांच सामग्री खरीदी गई।
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संविदा पर चयन कर डॉक्टरों की तैनाती भी की गई। उन्हें एक लाख रुपये प्रति माह वेतन भी दिया जा रहा है। खास बात यह कि आरोग्य मंदिरों के अधिकांश भवन अपने न होने से 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह किराये पर भी खर्च हो रहा है। इसके अलावा फर्नीचर, बेड, जांच उपकरण, अलमारी, एसी, पंखा आदि उपकरणों पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
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हकीकत में कायमगंज में अब तक एक आरोग्य मंदिर संचालित नहीं हो सका है। वहां जांच सामग्री भी नहीं भेजी गई। इस केंद्र के लिए तैनात डॉक्टर से सीएचसी पर काम लिया जा रहा है। मोहम्मदाबाद में आरोग्य मंदिर दोपहर 2:30 बजे बंद मिला। जबकि आरोग्य मंदिर सुबह नौ से चार बजे तक खुलने का समय निर्धारित है।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय से जब इस संदर्भ में जानकारी की गई तो उन्होंने खरीदी गई जांच सामग्री आरोग्य मंदिरों में न पहुंचने का सवाल सुनते ही उसे टालने का प्रयास किया, जब दोबारा पूछा तो उन्होंने फोन काट दिया।
छह माह से नहीं मिली जांच सामग्री
फोटो-32 श्याम नगर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीज देखते डॉ.रविरतन। संवाद
केस 1. शहर के श्याम नगर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में डॉ. रविरतन मरीज देखते मिले। दो में से एक सहायक स्टाफ मौजूद था। यहां बड़ी मात्रा में बोतलों में एक्सपायर दवाएं भी रखी थीं। जांच सामग्री पिछले छह माह से नहीं भेजी गई। डॉक्टर ने बताया कि एलटी न होने से मरीजों की जांच कौन करेगा। इससे पूर्व में आई जांच सामग्री पीएचसी आईटीआई, साहबगंज व रकाबगंज भेज दी गई। कुछ जांच सामग्री उपलब्ध है। एक्सपायर दवाओं के निस्तारण के लिए सूचना भेज दी गई है। 15 दिन से बिजली नहीं आ रही है। हैंडपंप खराब है। बारिश में छत से पानी टपकता है। कई जगह भवन की दीवारें व छत दरकी हैं।
फोटो-33 नरायनपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीज देखते डॉ.प्रिंस चौधरी। संवाद
केस 2. नरायनपुर स्थित आरोग्य मंदिर में डॉ. प्रिंस चौधरी, स्टाफ नर्स व दो सहायक स्टाफ मौजूद थीं। बताया गया कि फरवरी में जांच सामग्री मिली थी, उसी से मरीजों की जांच की जा रही है। दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। खांसी का सिरप नहीं है।
टोकरी में दवा, जांच सामग्री मिलती नहीं
फोटो-34 बेवर रोड भोलेपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मौजूद स्टाफ नर्स, बाई तरफ रखीं दवाएं। संवाद
केस 3. फतेहगढ़ के बेवर रोड भोलेपुर स्थित आरोग्य मंदिर में स्टाफ नर्स शीतल जॉर्ज मौजूद थीं। दो में से कोई सहायक स्टाफ मौजूद नहीं था। पूछने पर स्टाफ नर्स ने बताया कि एक वर्ष से वह तैनात हैं। उन्हें सिर्फ प्रेग्नेंसी जांच किट मिली थी। अन्य कोई भी जांच सामग्री कभी मिली हीं नहीं। जब एलटी तैनात नहीं है तो सभी जांचें कौन करेगा। यहां किसी डॉक्टर की भी तैनाती नहीं है।
सहायक स्टाफ के भरोसे आरोग्य मंदिर
फोटो-35 बंधौआ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में रखी दवाएं व गेट पर खड़ा कर्मचारी। संवाद
केस 4. फतेहगढ़ के मोहल्ला बंधौआ स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सहायक स्टाफ राजेश कुमार परिसर में खड़े मिले। पूछने पर बताया कि यहां किसी डॉक्टर की तैनाती न होने से मरीजों को पीएचसी भोलेपुर व नवदिया भेज देते हैं। करीब एक वर्ष से जांच सामग्री न तो आई है और न ही जरूरत पड़ी। बिना डॉक्टर मरीजों को न तो वह दवाई दे सकते और न ही जांच कर सकते। दूसरा सहायक स्टाफ आया नहीं है।
सामग्री न भेजने के कारणों की करेंगे जानकारी
एसीएमओ स्टोर डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि जांच सामग्री की खरीद की गई है, लेकिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर क्यों नहीं भेजी, इसके कारणों की जानकारी करेंगे। जरूरत वाले स्थानों पर सामग्री भिजवाकर 14 प्रकार की जांचों का मानक पूरा कराया जाएगा। कायमगंज में एक आरोग्य मंदिर अभी नहीं खुल सका है। उसे भी जल्द चालू कराया जाएगा। मोहम्मदाबाद में बंद मिले आरोग्य मंदिर की जांच कराई जाएगी।