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ढाबे पर हरदोई के वेटर का शव फंदे पर लटका मिला
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मोहम्मदाबाद थाने में खड़े ज्ञानेंद्र के परिजन। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद)। बरेली-इटावा हाईवे स्थित ढाबे के कमरे में हरदोई के वेटर का शव फंदे पर लटका मिला। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने हत्या की आशंका जताकर हंगामा कर दिया। उन्होंने कहा कि उनसे ढाबा पहुंचने को कहा गया और पहुचंने पर पता चला कि शव पोस्टमार्टम को भेज दिया गया है। उनके आने से पहले शव को फंदे से क्यों उतारा गया। पुलिस ने परिजनों को समझाकर शांत किया और पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
कोतवाली क्षेत्र के गांव रोहिला निवासी सचिन शर्मा का बरेली-इटावा हाईवे पर गंगा पेट्रोल पंप के पास नीबकरोरी नाम से ढाबा है। हरदोई के थाना सांडी के गांव सहजना निवासी जनमेजय का 27 वर्षीय पुत्र ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ ज्ञानू ढाबे में वेटर था। लॉकडाउन में तीन मई को ज्ञानेंद्र उर्फ ज्ञानू अपने घर चला गया था। 15 दिन बाद ही सचिन ज्ञानेंद्र को घर से काम करने के लिए बुला लाए थे। ज्ञानेंद्र ढाबे पर ही काम कर रहा था। उसने नवरात्रि में नौ दिन के व्रत रखे थे।
बुधवार को ज्ञानेंद्र काम करने के बाद 11 बजे ढाबे पर ऊपरी हिस्से के कमरे में सोने के लिए चला गया। गुरुवार को चौकीदार जगदीश सुबह 10 बजे ज्ञानेंद्र को आवाज देने लगा। काफी देर बाद ज्ञानेंद्र नीचे नहीं आया तो जगदीश ऊपर के कमरे में पहुंचा। वहां ज्ञानेंद्र को छत में लगे कुंडे से बंधी रस्सी के फंदे से लटका देखा। जगदीश ने जानकारी ढाबा मालिक सचिन को दी। सचिन ने पुलिस को बताया कि उसके वेटर ज्ञानेंद्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।
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पुलिस ने परिजनों के आने से पहले ही शव फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। शाम चार बजे ज्ञानेंद्र के पिता जनमेजय, भाई कौशलेंद्र, दिनेश ढाबे पर पहुुंचे। लोगों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस पर वे हंगामा करने लगे और हत्या की आशंका जताते हुए आरोप लगाने लगे। दरोगा रामशरण यादव ने परिजनों को समझाकर शांत कर दिया। उन्होंने परिजनों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबकुछ साफ होने की बात कहकर शांत कर दिया।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव रोहिला निवासी सचिन शर्मा का बरेली-इटावा हाईवे पर गंगा पेट्रोल पंप के पास नीबकरोरी नाम से ढाबा है। हरदोई के थाना सांडी के गांव सहजना निवासी जनमेजय का 27 वर्षीय पुत्र ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ ज्ञानू ढाबे में वेटर था। लॉकडाउन में तीन मई को ज्ञानेंद्र उर्फ ज्ञानू अपने घर चला गया था। 15 दिन बाद ही सचिन ज्ञानेंद्र को घर से काम करने के लिए बुला लाए थे। ज्ञानेंद्र ढाबे पर ही काम कर रहा था। उसने नवरात्रि में नौ दिन के व्रत रखे थे।
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बुधवार को ज्ञानेंद्र काम करने के बाद 11 बजे ढाबे पर ऊपरी हिस्से के कमरे में सोने के लिए चला गया। गुरुवार को चौकीदार जगदीश सुबह 10 बजे ज्ञानेंद्र को आवाज देने लगा। काफी देर बाद ज्ञानेंद्र नीचे नहीं आया तो जगदीश ऊपर के कमरे में पहुंचा। वहां ज्ञानेंद्र को छत में लगे कुंडे से बंधी रस्सी के फंदे से लटका देखा। जगदीश ने जानकारी ढाबा मालिक सचिन को दी। सचिन ने पुलिस को बताया कि उसके वेटर ज्ञानेंद्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।
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पुलिस ने परिजनों के आने से पहले ही शव फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। शाम चार बजे ज्ञानेंद्र के पिता जनमेजय, भाई कौशलेंद्र, दिनेश ढाबे पर पहुुंचे। लोगों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस पर वे हंगामा करने लगे और हत्या की आशंका जताते हुए आरोप लगाने लगे। दरोगा रामशरण यादव ने परिजनों को समझाकर शांत कर दिया। उन्होंने परिजनों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबकुछ साफ होने की बात कहकर शांत कर दिया।