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Farrukhabad News: आंधी व पानी से गेहूं व सरसों की फसल को नुकसान

Sat, 22 Mar 2025 11:12 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Sat, 22 Mar 2025 11:12 PM IST
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Storm and rain damage wheat and mustard crops
गांव गुजरपुर में झुका हुआ बिजली का पेड़। - फोटो : गांव गुजरपुर में झुका हुआ बिजली का पेड़।
कमालगंज। शनिवार दोपहर तेज हवाओं से चिंतित किसान शाम को आंधी के साथ बरसे पानी से परेशान हुए। गेहूं व सरसों की फसल को नुकसान हुआ। अन्य फसलों पर भी काफी प्रभाव पड़ा।
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ककरैया के उन्नतिशील किसान शरद कुमार ने कहा कि जिले में छिबरामऊ के पास के कुछ गांवों में तेज पानी गिरा। आंधी के साथ पानी गिरने से गेहूं की फसल बालियां सहित झुक गई। इससे उत्पादन कम हो जाएगा। गेहूं की गुणवत्ता भी गिर जाएगी। दाना पतला रह जाएगा। पकी खड़ी सरसों या कटी हुई सरसों को भी पानी से नुकसान हुआ है। कटी हुई सरसों भीग गई।
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बारिश के कारण दो-तीन दिन में बोई गई मक्का में अंकुरण कम होने की संभावना है। जबकि कुछ किसानों ने दो दिन पहले पानी लगाया था। उनके मक्का के पौधे झुक गए। कुछ किसानों के खेत में आलू की खोदाई हो रही है। आलू के ढेर भी लगे हैं। इससे आलू किसान परेशान हैं।
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तेज हवा चलने पर किसान गेहूं में सिंचाई न करें, जब तक तेज हवा चले, तब तक गेहूं की फसल में सिंचाई न करें। हवा थमने के बाद ही गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई करें। फसल में पानी भरा न रह जाए। उन्होंने बताया कि सरसों, चना आदि तैयार फसलें काटकर सुरक्षित स्थान पर रखें। इससे किसान नुकसान से बच सकते हैं। - अभिमन्यु सिंह यादव, फसल सुरक्षा वैज्ञानिक




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गंगा की कटरी में तरबूज के साथ लौकी की फसल पर कहर

भटपुरा के गांधीनगर निवासी किसान लालू शाक्य ने बताया कि गंगा की कटरी में गेहूं की फसल कई खेतों में झुक गई। वहीं आजादनगर के तरबूज उत्पादक किसान ईदुल ने कहा कि गंगा की रेती में तरबूज व लौकी की फसल को बहुत नुकसान हुआ। आंधी व पानी से तरबूज के फलों की छोटी-छोटी बतियां मर गईं। यदि बतियां न मरती तो 30 से 35 दिन में तरबूज तैयार हो जाता। जिससे अगैती तरबूज फसल का बाहर की मंडियों में अच्छा भाव मिल जाता। अब किल्ला आगे बढ़ने पर नई बतियां तैयार होंगी। इससे उत्पादन करीब 15 दिन पिछड़ जाएगा।
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