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Farrukhabad News: कैमरों की नजर से दूर हैं थानाध्यक्षों के कमरे, मुख्य गेट भी अछूते
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फर्रुखाबाद। थानों में बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों को लेकर गाइडलाइन जारी की है। यहां के अधिकांश थानों में सात-आठ कैमरे लगे हैं। कोर्ट के निर्देश हैं कि 18 महीनों के फुटेज सुरक्षित रखने हैं, मगर मात्र तीन महीने की ही क्षमता वाली डीवीआर हैं। कई थानों में मुख्य गेटों पर भी कैमरे नहीं लगाए गए। थानाध्यक्षों के कमरों के अंदर शायद ही कहीं कैमरा लगा हो। शौचालय क्षेत्र समेत कई बड़े परिसरों में स्थानों को कैमरों की नजर से दूर रखा गया है। इन्हीं स्थानों को थर्ड डिग्री के उपयोग में लिया जाता है।
पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश थे। कैमरे केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि थाने में पुलिस की कार्रवाई, हिरासत में लिए लोगों के साथ व्यवहार और किसी शिकायत या कथित उत्पीड़न की जांच के लिए भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के ताैर पर इस्तेमाल हो सकते हैं। फुटेज सुरक्षित रखने की अवधि 18 माह तय की है, मगर थानों की डीवीआर मात्र तीन महीने सुरक्षित रखने वाली लगी हैं।
शहर कोतवाली व कादरीगेट थाने में लगे सात कैमरे चालू हैं। कोतवाली में आवासीय परिसर को छोड़कर अधिकांश एरिया कैमरे की नजर में हैं। कादरीगेट थाना आवास विकास चौकी में अस्थायी रूप से संचालित है। यहां सभी सातों कैमरे चल रहे हैं। मऊदरवाजा थाने में लगे आठ कैमरों की दो माह स्टोरेज क्षमता है। परिसर काफी बड़ा होने से बड़े हिस्से पर नजर नहीं है। राजेपुर थाने में लगे आठ कैमरे चालू हैं। सभी मुख्य स्थानों पर नजर का दावा है। तीन महीने की ही मेमोरी है।
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कंपिल थाने में लगे आठ कैमरों में मुख्य गेट पर एक भी नहीं है। लिहाजा आने-जाने वाले पर कोई नजर नहीं रखी जा सकती। शमसाबाद थाने में सात कैमरे लगे हैं। इनकी अधिकांश परिसर पर नजर रहती है। जहानगंज थाने के मुख्य गेट पर दो कैमरे अंदर और बाहर नजर रखते हैं। आठ कैमरों में दो माह तक फुटेज सुरक्षित रखी जाती है।
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एक साल की रिकार्डिंग स्टोरेज की क्षमता
कमालगंज। थाने में लगे आठ सीसीटीवी कैमरों में दो गेट पर हैं। हवालात के कैदियों समेत सभी प्रमुख स्थानों पर कैमरे की नजर है। स्टोरेज क्षमता मात्र दो महीने की थी। करीब छह माह पहले एक साल तक की स्टोरेज क्षमता वाली डीवीआर लगवा दी गई है। (संवाद)
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कायमगंज कोतवाली में एक सप्ताह से दो कैमरे बंद
कायमगंज। कोतवाली परिसर में लगे आठ सीसीटीवी कैमरों में से दो कैमरे एक सप्ताह से बंद हैं। नाइटविजन कैमरों में ऑडियो भी रिकॉर्ड होती है। रिकार्डिंग 12 महीने तक सुरक्षित रखी जा सकती है। महिला हेल्प डेस्क और कार्यालय के बाहर का कैमरा बंद है। (संवाद)
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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सभी थानों में कैमरे लगे हैं। उनकी स्टोरेज क्षमता भी उसी के अनुसार है। कोई कैमरा खराब होता है तो जीडी में तस्करा डालने के साथ तत्काल उन्हें सही करा दिया जाता है।
आरती सिंह, पुलिस अधीक्षक
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पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश थे। कैमरे केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि थाने में पुलिस की कार्रवाई, हिरासत में लिए लोगों के साथ व्यवहार और किसी शिकायत या कथित उत्पीड़न की जांच के लिए भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के ताैर पर इस्तेमाल हो सकते हैं। फुटेज सुरक्षित रखने की अवधि 18 माह तय की है, मगर थानों की डीवीआर मात्र तीन महीने सुरक्षित रखने वाली लगी हैं।
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शहर कोतवाली व कादरीगेट थाने में लगे सात कैमरे चालू हैं। कोतवाली में आवासीय परिसर को छोड़कर अधिकांश एरिया कैमरे की नजर में हैं। कादरीगेट थाना आवास विकास चौकी में अस्थायी रूप से संचालित है। यहां सभी सातों कैमरे चल रहे हैं। मऊदरवाजा थाने में लगे आठ कैमरों की दो माह स्टोरेज क्षमता है। परिसर काफी बड़ा होने से बड़े हिस्से पर नजर नहीं है। राजेपुर थाने में लगे आठ कैमरे चालू हैं। सभी मुख्य स्थानों पर नजर का दावा है। तीन महीने की ही मेमोरी है।
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कंपिल थाने में लगे आठ कैमरों में मुख्य गेट पर एक भी नहीं है। लिहाजा आने-जाने वाले पर कोई नजर नहीं रखी जा सकती। शमसाबाद थाने में सात कैमरे लगे हैं। इनकी अधिकांश परिसर पर नजर रहती है। जहानगंज थाने के मुख्य गेट पर दो कैमरे अंदर और बाहर नजर रखते हैं। आठ कैमरों में दो माह तक फुटेज सुरक्षित रखी जाती है।
एक साल की रिकार्डिंग स्टोरेज की क्षमता
कमालगंज। थाने में लगे आठ सीसीटीवी कैमरों में दो गेट पर हैं। हवालात के कैदियों समेत सभी प्रमुख स्थानों पर कैमरे की नजर है। स्टोरेज क्षमता मात्र दो महीने की थी। करीब छह माह पहले एक साल तक की स्टोरेज क्षमता वाली डीवीआर लगवा दी गई है। (संवाद)
कायमगंज कोतवाली में एक सप्ताह से दो कैमरे बंद
कायमगंज। कोतवाली परिसर में लगे आठ सीसीटीवी कैमरों में से दो कैमरे एक सप्ताह से बंद हैं। नाइटविजन कैमरों में ऑडियो भी रिकॉर्ड होती है। रिकार्डिंग 12 महीने तक सुरक्षित रखी जा सकती है। महिला हेल्प डेस्क और कार्यालय के बाहर का कैमरा बंद है। (संवाद)
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सभी थानों में कैमरे लगे हैं। उनकी स्टोरेज क्षमता भी उसी के अनुसार है। कोई कैमरा खराब होता है तो जीडी में तस्करा डालने के साथ तत्काल उन्हें सही करा दिया जाता है।
आरती सिंह, पुलिस अधीक्षक