फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Smallpox disease increases potato farmers' problems in farrukhabad

चेचक रोग ने बढ़ाईं आलू किसानों की दिक्कतें

Thu, 10 Jan 2019 11:34 PM IST
farrukhabad Published by: मनोज कुमार Updated Thu, 10 Jan 2019 11:34 PM IST
विज्ञापन
Smallpox disease increases potato farmers' problems in farrukhabad
आलू - फोटो : getty images
किसानों के लिए आलू की फसल घाटे का सौदा साबित हो रही है। पुराना आलू फेेंकने के बाद अगैती फसल से उम्मीद जगी थी कि उचित दाम मिल सकेगा, लेकिन बाजार के धड़ाम होने से लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। अब आलू में फैल रहे चेचक रोग ने किसानों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं। इसके चलते किसान अपना आलू मंडी में औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


जिले में इस बार 42 हजार हेक्टेयर में आलू बोया गया है। इसमें से लगभग 25 हजार हेक्टेयर में अगैती फसल का आलू शामिल है। पुराने आलू में नुकसान के बाद किसानों को नए आलू की फसल से उम्मीद जगी थी। शुरूआती सीजन में भाव 600-650 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन 15 दिसंबर के बाद से भाव अब तक 400-450 रुपये प्रति क्विंटल पर आ टिका है। किसान बमुश्किल लागत ही निकाल पा रहा है। अब आलू में चेचक रोग ने किसानों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। आढ़ती सुधीर वर्मा का कहना है कि चेचक रोग से प्रभावित आलू को बाहर के व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किसान को अपना आलू स्थानीय व्यापारियों को औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। 
विज्ञापन

 
छिड़काव के बाद भी नहीं सुधरी हालत  
कमालगंज निवासी किसान आकाश का कहना है कि उनके आलू में चेचक रोग लग चुका है। कई दवाओं के छिड़काव के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। वहीं, नगला नान निवासी शिवपाल सिंह बबलू का कहना है कि चेचक रोग के बाबत कोई तकनीकी जानकारी न होने से फसल को चेचक रोग से बचाया नहीं जा सका। ग्राम नौली निवासी अमित का कहना है कि सरकार किसानों के हितों की बात करती है लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। किसान परेशान हैं न तो उसे फसल का उचित दाम मिल रहा है और फसल में लगने वाले चेचक रोग से न कोई निजात। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चेचक रोग का कोई इलाज नहीं             
जिला कृषि अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि चेचक रोग का कोई इलाज नहीं है। किसानों को चाहिए कि वह आलू बीज का शोधन करके ही बुआई करें। साथ ही आलू की नस्ल में बदलाव करते रहें। खेत में कैल्शियम, बोरान तत्व की पूर्ति करें। डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल करें। इस रोग से बचने के लिए गर्मी के सीजन में खेत को गहरी जुताई कर खुला छोड़ दें जहां तक संभव हो मक्का न बोएं। मोनसरीन दवा इसके लिए कारगर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed