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श्रावणी उपाकर्म कर किया गंगास्नान
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद।
Updated Sun, 30 Aug 2015 12:07 AM IST
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ब्रह्म समाज के लोगों ने श्रावणी उपाकर्म कर गंगास्नान किया। पूजन अर्चन के बाद रक्षासूत्र अभिमंत्रित किए गए।
श्री कैलाश सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से श्रावणी उपकर्म का कार्यक्रम पांचालघाट स्थित गंगातट पर संपन्न हुआ।
यहां गंगास्नान के बाद हवन पूजन हुआ। अध्यक्ष आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल ने बताया कि दस विधि स्नान द्विजातीय, देवऋषि पूजन, तर्पण मार्जन, गंगास्नान वर्ष भर में हुए जाने अनजाने पापों की निवृत्ति के लिए प्रायश्चित स्नान होता है।
उन्होंने बताया कि आज के दिन विप्रजन अपने जनेऊ और रक्षा सूत्रों को अभिमंत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि आज के दिन ही समाज के कल्याण के लिए मंत्रों को जाग्रत किया जाता है।
आचार्य ने रक्षाबंधन का महत्व बताते हुए कहा कि मां लक्ष्मी ने आज के दिन दानवेंद्र राजा बली के हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर भाई बहन के बीच स्नेह संबंध को स्थापित किया था।
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शाम को गंगातट पर महाआरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने आरती में सम्मलित होकर प्रसाद लिया।
कार्यक्रम में ओमकारनाथ शास्त्री, प्रमोद मिश्र, अभय शास्त्री, संजीव शुक्ल, रजनीश मिश्र, शिवनारायण तिवारी, अशोक मिश्रा, संजीव बाजपेई, कैलाशचंद्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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श्री कैलाश सेवा संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से श्रावणी उपकर्म का कार्यक्रम पांचालघाट स्थित गंगातट पर संपन्न हुआ।
यहां गंगास्नान के बाद हवन पूजन हुआ। अध्यक्ष आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल ने बताया कि दस विधि स्नान द्विजातीय, देवऋषि पूजन, तर्पण मार्जन, गंगास्नान वर्ष भर में हुए जाने अनजाने पापों की निवृत्ति के लिए प्रायश्चित स्नान होता है।
उन्होंने बताया कि आज के दिन विप्रजन अपने जनेऊ और रक्षा सूत्रों को अभिमंत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि आज के दिन ही समाज के कल्याण के लिए मंत्रों को जाग्रत किया जाता है।
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आचार्य ने रक्षाबंधन का महत्व बताते हुए कहा कि मां लक्ष्मी ने आज के दिन दानवेंद्र राजा बली के हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर भाई बहन के बीच स्नेह संबंध को स्थापित किया था।
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शाम को गंगातट पर महाआरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने आरती में सम्मलित होकर प्रसाद लिया।
कार्यक्रम में ओमकारनाथ शास्त्री, प्रमोद मिश्र, अभय शास्त्री, संजीव शुक्ल, रजनीश मिश्र, शिवनारायण तिवारी, अशोक मिश्रा, संजीव बाजपेई, कैलाशचंद्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।