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जूते-मोजे का नमूना बेहतर, भेज दिए लोकल
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बीआरसी मोहम्मदाबाद में रखे जूते।
- फोटो : FARRUKHABAD
अच्छे दिखाए लेकिन भेजे घटिया जूते
फर्रुखाबाद। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को देने के लिए आए जूते-मोजों की सत्यापन में पोल खुल गई है। फर्म ने जो नमूना दिखाया था, उससे अलग जूतों की सप्लाई कर दी है। किसी भी जूते में नमूने में लिखी कंपनी का नाम नहीं है। कई अन्य कमियां भी पकड़ी गईं हैं। मोजों की भी गुणवत्ता खराब निकली है। इसकी रिपोर्ट एसडीएम सदर ने बीएसए को भेजी है। गुणवत्ता अच्छी न होने का बावजूद जूतों व मोजों का वितरण कराया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले करीब एक लाख 71 हजार बच्चों के लिए एक फर्म ने जूतों और मोजों की सप्लाई की है। इसका टेंडर राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ से हुआ था। वहां फर्म ने सप्लाई से पूर्व जूते व मोजे का नमूना दिया था। नमूना राज्य परियोजना कार्यालय से बीएसए कार्यालय में आया। इसे सभी बीआरसी पर सत्यापन के लिए भेजा गया।
एसडीएम सदर की अध्यक्षता में बिहार इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व बीईओ मोहम्मदाबाद ने 18 जनवरी को मोहम्मदाबाद बीआरसी पर आए 22 हजार जूतों और 44 हजार मोजों का सत्यापन किया। इस दौरान मोजों की गुणवत्ता खराब और जूते नमूने से भिन्न पाए गए। इसकी रिपोर्ट एसडीएम सदर ने बीएसए को भेजी है। इसमें कहा कि नमूने वाले जूते के पैतावे में लहर कंपनी का नाम लिखा है और पैतावा जूते में चिपका है। तली में लहर कंपनी की मुहर लगी है जबकि फर्म ने जिन जूतों की आपूर्ति की है उनमें कंपनी का नाम नहीं है और न सोल में सील लगी है।
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पैतावा भी चिपका नहीं है। जूते की तली भी नमूने के जूते से आधा इंच कम मोटी है। यही स्थिति बालिकाओं के लिए आई जूतियों की है। उनमें भी कंपनी का न तो नाम है और न मुहर लगी है। जो मोजे आए हैं, उनमें मोटे-पतले मोजे हैं। एक ही पैर का एक मोजा छोटा तो दूसरा बड़ा है।
आपूर्ति हुए मोजों की लंबाई नमूने से कम है। एसडीएम ने मोजा की गुणवत्ता खराब होने का रिपोर्ट में जिक्र किया है। इसके बावजूद जूतों और मोजों का वितरण करा दिया गया है। इसी प्रकार अन्य ब्लॉकों में भी एसडीएम व बीडीओ ने जूतों और मोजों का सत्यापन किया था। वहां भी कमियां पाई गईं हैं।
एक हजार जूते-मोजे निकले खराब
राजेपुर ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले 28900 बच्चों के लिए आए जूतों-मोजों में एक हजार खराब निकल गए हैं। इनमें अधिकांश जूते एक पैर के डबल हैं या किसी में कोई अन्य कमी हैं। मोजा भी बहुत खराब स्थिति में हैं। इससे यह बीआरसी पर रखे हैं।
सर्दी उतार पर, लेकिन सभी को नहीं मिले जूते-मोजे
फरवरी शुरू होने से सर्दी खत्म होने की ओर है लेकिन अभी तक सभी बच्चों को जूते-मोजे नहीं मिल पाए हैं। नवाबगंज बीआरसी पर 16700 जोड़ी जूते आए हैं। सत्यापन न होने से वितरण नहीं हो सका। बीआरसी बढ़पुर में 17 हजार जोड़ी जूते आए थे। इनमें सभी का वितरण नहीं हो सका है। नगर क्षेत्र में करीब 6 हजार जोड़ी जूते आए हैं। इनका सत्यापन हो गया है। अब वितरण कराया जाएगा। अन्य ब्लॉकों में जूतों और मोजों का वितरण करा दिया गया है।
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फर्रुखाबाद। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को देने के लिए आए जूते-मोजों की सत्यापन में पोल खुल गई है। फर्म ने जो नमूना दिखाया था, उससे अलग जूतों की सप्लाई कर दी है। किसी भी जूते में नमूने में लिखी कंपनी का नाम नहीं है। कई अन्य कमियां भी पकड़ी गईं हैं। मोजों की भी गुणवत्ता खराब निकली है। इसकी रिपोर्ट एसडीएम सदर ने बीएसए को भेजी है। गुणवत्ता अच्छी न होने का बावजूद जूतों व मोजों का वितरण कराया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले करीब एक लाख 71 हजार बच्चों के लिए एक फर्म ने जूतों और मोजों की सप्लाई की है। इसका टेंडर राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ से हुआ था। वहां फर्म ने सप्लाई से पूर्व जूते व मोजे का नमूना दिया था। नमूना राज्य परियोजना कार्यालय से बीएसए कार्यालय में आया। इसे सभी बीआरसी पर सत्यापन के लिए भेजा गया।
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एसडीएम सदर की अध्यक्षता में बिहार इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व बीईओ मोहम्मदाबाद ने 18 जनवरी को मोहम्मदाबाद बीआरसी पर आए 22 हजार जूतों और 44 हजार मोजों का सत्यापन किया। इस दौरान मोजों की गुणवत्ता खराब और जूते नमूने से भिन्न पाए गए। इसकी रिपोर्ट एसडीएम सदर ने बीएसए को भेजी है। इसमें कहा कि नमूने वाले जूते के पैतावे में लहर कंपनी का नाम लिखा है और पैतावा जूते में चिपका है। तली में लहर कंपनी की मुहर लगी है जबकि फर्म ने जिन जूतों की आपूर्ति की है उनमें कंपनी का नाम नहीं है और न सोल में सील लगी है।
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पैतावा भी चिपका नहीं है। जूते की तली भी नमूने के जूते से आधा इंच कम मोटी है। यही स्थिति बालिकाओं के लिए आई जूतियों की है। उनमें भी कंपनी का न तो नाम है और न मुहर लगी है। जो मोजे आए हैं, उनमें मोटे-पतले मोजे हैं। एक ही पैर का एक मोजा छोटा तो दूसरा बड़ा है।
आपूर्ति हुए मोजों की लंबाई नमूने से कम है। एसडीएम ने मोजा की गुणवत्ता खराब होने का रिपोर्ट में जिक्र किया है। इसके बावजूद जूतों और मोजों का वितरण करा दिया गया है। इसी प्रकार अन्य ब्लॉकों में भी एसडीएम व बीडीओ ने जूतों और मोजों का सत्यापन किया था। वहां भी कमियां पाई गईं हैं।
एक हजार जूते-मोजे निकले खराब
राजेपुर ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले 28900 बच्चों के लिए आए जूतों-मोजों में एक हजार खराब निकल गए हैं। इनमें अधिकांश जूते एक पैर के डबल हैं या किसी में कोई अन्य कमी हैं। मोजा भी बहुत खराब स्थिति में हैं। इससे यह बीआरसी पर रखे हैं।
सर्दी उतार पर, लेकिन सभी को नहीं मिले जूते-मोजे
फरवरी शुरू होने से सर्दी खत्म होने की ओर है लेकिन अभी तक सभी बच्चों को जूते-मोजे नहीं मिल पाए हैं। नवाबगंज बीआरसी पर 16700 जोड़ी जूते आए हैं। सत्यापन न होने से वितरण नहीं हो सका। बीआरसी बढ़पुर में 17 हजार जोड़ी जूते आए थे। इनमें सभी का वितरण नहीं हो सका है। नगर क्षेत्र में करीब 6 हजार जोड़ी जूते आए हैं। इनका सत्यापन हो गया है। अब वितरण कराया जाएगा। अन्य ब्लॉकों में जूतों और मोजों का वितरण करा दिया गया है।