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Farrukhabad News: शाहजहांपुर मार्ग बंद, बदायूं मार्ग पर दो पहिया वाहनों पर रोक
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फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर मंगलवार को खतरे के निशान 137.10 मीटर को पार कर पांच सेंटीमीटर ऊपर 137.10 मीटर पर पहुंच गया। वहीं, रामगंगा का जलस्तर बढ़कर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों नदियों में बाढ़ का पानी बढ़ने के चलते शाहजहांपुर मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। बदायूं मार्ग पर दोपहिया वाहनों के पहिये थम गए हैं।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर गांव चौरा गांव के सामने करीब 300 मीटर सड़क पर पानी बह रहा है। करीब 10 मीटर सड़क पर गड्ढा भी हो गया। खतरा देखते हुए पुलिस ने यातायात रोक दिया है। थानाध्यक्ष अमित गंगवार ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से सड़क पर यातायात बंद कर दिया गया है। आवागमन का एकमात्र सहारा नाव है।
फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग चित्रकूट डिप पर करीब ढाई फीट से अधिक पानी तेज धार से बह रहा है। अनहाेनी की आशंका को देखते हुए थाना प्रभारी ने चित्रकूट मार्ग बंद कर दिया। दोनों ओर पुलिस का पहरा लगा दिया है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। वह बाइक सवार व कार चालकों वापस कर रहे हैं। रास्ता बंद होने से वाहन डबरी व कुइया मार्ग से आ-जा रहे हैं।
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गंगा में नरौरा बांध से 1,62,668 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। बिजनौर बैराज से 79567 क्यूसेक, हरिद्वार बांध से 75299 क्यूसेक छोड़ा गया पानी निकाला जा रहा है। इससे गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खो हरेली रामनगर बैराज से 17575 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं, रामगंगा के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।
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छतों पर जिंदगी, रोटी व दवाई का संकट
अमृतपुर। घरों में बाढ़ का पानी भरने से ग्रामीणों ने छतों पर या ऊंचे स्थानों पर बसेरा बना लिया है। ईंधन न होने से जहां रोटी के लाले हैं, वहीं स्वास्थ्य टीमें न जाने से दवाई का भी संकट है।
जलस्तर बढ़ने से गांव कोलासोता, भटौली के पास कटान होने लगा है। गंगा की बाढ़ से क्षेत्र के 50 गांवों में पानी भरा है। इससे ग्रामीण घरों में कैद हो गए। अब घरों में पानी भरने से ग्रामीण छतों पर पहुंचने लगे हैं। जबकि कई गांव के बाढ़ पीड़ित ऊंचे स्थान पर जाने को मजबूर हैं। वह पॉलिथीन तानकर रह रहे है। गांव के रास्ते बंद होने से ग्रामीण नाव के सहारे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घर में खाद्य सामग्री खत्म हो चुकी है। गेंहू पिसवाने के लिए जान जोखिम में डालकर जाना पड़ रहा है। करीब दो माह से बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। बाढ़ के साथ बारिश होने से कंडा, लकड़ी भी भीग गई। गैस सिलिंडर भरवाने के लिए पैसे नहीं है। ईंधन न होने से दो वक्त का भोजन भी नहीं बन पा रहा है। किसी तरह दिन में एक बार भोजन बन रहा है। कई बार तो बिना रोटी खाए ही रात काटनी पड़ रही है। (संवाद)
बाढ़ से घिरे गांव में फैलने लगी बीमारी
गंगा की बाढ़ से गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, तीसराम की मड़ैया, रामप्रसाद नगला, कालिका नगला, फुलहा, जटपुरा, उदयपुर, रामपुर, नगरिया जवाहर, रतनपुर सहित करीब 50 गांवों में पानी भरा है। इन गांवों में जुकाम, बुखार, खुजली के मरीज बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद न तो गांव में स्वास्थ्य शिविर लग रहे और न ही दवाई बांटने टीमें आ रही हैं। तहसील कर्मचारी भी गांव नहीं आते, सड़क के किनारे ही खड़े होकर हालचाल लेकर चले जाते। या फिर प्रधान को फोन पर गांव का हाल लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी कागजों तक ही सीमित हैं।
त्वचा रोग से बाढ़ पीड़ित परेशान
कंपिल। क्षेत्र के करीब आठ गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से जनजीवन बेपटरी है। गांव टपुआ चौड़ेरा के सभी रास्तों में पानी भरा होने से ग्रामीण काम चला रहे हैं। गांव हमीरपुर मजरा जात में भी बाढ़ पीड़ितों के सामने रोजी-रोटी व पशुओं की चारे की समस्या है। इन गांवों में जुकाम-बुखार के साथ त्वचा रोगी भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें न तो गांव में शिविर लगा रहीं और न ही दवाई बांटी जा रही है। (संवाद)
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर गांव चौरा गांव के सामने करीब 300 मीटर सड़क पर पानी बह रहा है। करीब 10 मीटर सड़क पर गड्ढा भी हो गया। खतरा देखते हुए पुलिस ने यातायात रोक दिया है। थानाध्यक्ष अमित गंगवार ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से सड़क पर यातायात बंद कर दिया गया है। आवागमन का एकमात्र सहारा नाव है।
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फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग चित्रकूट डिप पर करीब ढाई फीट से अधिक पानी तेज धार से बह रहा है। अनहाेनी की आशंका को देखते हुए थाना प्रभारी ने चित्रकूट मार्ग बंद कर दिया। दोनों ओर पुलिस का पहरा लगा दिया है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। वह बाइक सवार व कार चालकों वापस कर रहे हैं। रास्ता बंद होने से वाहन डबरी व कुइया मार्ग से आ-जा रहे हैं।
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गंगा में नरौरा बांध से 1,62,668 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। बिजनौर बैराज से 79567 क्यूसेक, हरिद्वार बांध से 75299 क्यूसेक छोड़ा गया पानी निकाला जा रहा है। इससे गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खो हरेली रामनगर बैराज से 17575 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं, रामगंगा के जलस्तर में 40 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।
छतों पर जिंदगी, रोटी व दवाई का संकट
अमृतपुर। घरों में बाढ़ का पानी भरने से ग्रामीणों ने छतों पर या ऊंचे स्थानों पर बसेरा बना लिया है। ईंधन न होने से जहां रोटी के लाले हैं, वहीं स्वास्थ्य टीमें न जाने से दवाई का भी संकट है।
जलस्तर बढ़ने से गांव कोलासोता, भटौली के पास कटान होने लगा है। गंगा की बाढ़ से क्षेत्र के 50 गांवों में पानी भरा है। इससे ग्रामीण घरों में कैद हो गए। अब घरों में पानी भरने से ग्रामीण छतों पर पहुंचने लगे हैं। जबकि कई गांव के बाढ़ पीड़ित ऊंचे स्थान पर जाने को मजबूर हैं। वह पॉलिथीन तानकर रह रहे है। गांव के रास्ते बंद होने से ग्रामीण नाव के सहारे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घर में खाद्य सामग्री खत्म हो चुकी है। गेंहू पिसवाने के लिए जान जोखिम में डालकर जाना पड़ रहा है। करीब दो माह से बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। बाढ़ के साथ बारिश होने से कंडा, लकड़ी भी भीग गई। गैस सिलिंडर भरवाने के लिए पैसे नहीं है। ईंधन न होने से दो वक्त का भोजन भी नहीं बन पा रहा है। किसी तरह दिन में एक बार भोजन बन रहा है। कई बार तो बिना रोटी खाए ही रात काटनी पड़ रही है। (संवाद)
बाढ़ से घिरे गांव में फैलने लगी बीमारी
गंगा की बाढ़ से गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, तीसराम की मड़ैया, रामप्रसाद नगला, कालिका नगला, फुलहा, जटपुरा, उदयपुर, रामपुर, नगरिया जवाहर, रतनपुर सहित करीब 50 गांवों में पानी भरा है। इन गांवों में जुकाम, बुखार, खुजली के मरीज बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद न तो गांव में स्वास्थ्य शिविर लग रहे और न ही दवाई बांटने टीमें आ रही हैं। तहसील कर्मचारी भी गांव नहीं आते, सड़क के किनारे ही खड़े होकर हालचाल लेकर चले जाते। या फिर प्रधान को फोन पर गांव का हाल लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी कागजों तक ही सीमित हैं।
त्वचा रोग से बाढ़ पीड़ित परेशान
कंपिल। क्षेत्र के करीब आठ गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से जनजीवन बेपटरी है। गांव टपुआ चौड़ेरा के सभी रास्तों में पानी भरा होने से ग्रामीण काम चला रहे हैं। गांव हमीरपुर मजरा जात में भी बाढ़ पीड़ितों के सामने रोजी-रोटी व पशुओं की चारे की समस्या है। इन गांवों में जुकाम-बुखार के साथ त्वचा रोगी भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें न तो गांव में शिविर लगा रहीं और न ही दवाई बांटी जा रही है। (संवाद)