{"_id":"3d60e8ea1cdf6866f3ef542468fa51e7","slug":"schools-do-not-pot-towel-soap-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूलों में न बर्तन न तौलिया, साबुन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूलों में न बर्तन न तौलिया, साबुन
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sat, 11 Apr 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
सरकार की तरफ से प्राइमरी और माध्यमिक स्कूलों में मिडडे मील योजना संचालित
विज्ञापन
है। इसके तहत यहां पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है।
योजना में स्कूलों में बर्तन के साथ बच्चों में साफ सफाई की भावना विकसित
करने के लिए तौलिया और साबुन रखने का भी प्रावधान है। बावजूद इसके जिले के
अधिकतर परिषदीय विद्यालयों में न तो बर्तन
हैं और न ही तौलिया व साबुन। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बर्तन खरीदने के लिए बजट मिलता ही नहीं है। कई स्कूलों को दिया गया साबुन व तौलियां भी गायब हैं। पेश है अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट।
घर से बर्तन लेकर आते स्कूल!
मोहम्मदाबाद की प्राइमरी पाठशाला नगला दलजीत सिंह में बच्चे भोजन के लिए घर से बर्तन लेकर आते हैं। हालांकि हाथ धोने के लिए साबुन और तौलिया है। प्रधानाध्यापक विनय कुमार वर्मा ने बताया कि बच्चे बर्तन घर से लेकर आते हैं। बर्तन खरीदने का कोई बजट नहीं आया है। तौलिया और साबुन है। बच्चों को हाथ धुलाने के बाद ही भोजन दिया जाता है।
प्राइमरी पाठशाला, नगला महानंद का भी यही हाल है। प्रधानाध्यापक राहुल यादव ने बताया कि दो माह पहले ही उन्होंने चार्ज संभाला है। बर्तनों के बारे में नहीं बता सकते। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। तौलिया व साबुन है। उधर, प्राइमरी पाठशाला, मोहम्मदाबाद में भी बच्चे घर से ही बर्तन लाते हैं। प्रधानाध्यापक विजय बहादुर यादव ने बताया कि उनसे पहले
रहे प्रधानाध्यापक रतन सिंह ने बर्तन खरीदे थे। यह टूट गए हैं। बर्तन मंगवाए जाएंगे। तौलिया और साबुन है। प्राइमरी पाठशाला नगला अखई गोसरपुर के प्रधानाध्यापक चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि उनके स्कूल में 100 थाली और 100 ग्लास हैं। इनमें बच्चों को भोजन दिया जाता है। साबुन और तौलिया भी उपलब्ध है।
किताबों के झोले में लाते बर्तन
शमसाबाद के प्राथमिक विद्यालय गड़रियन पुरवा में 64 बच्चे पंजीकृत हैं। 33 बच्चे मौजूद थे। बच्चों को मिडडे मील में बनाई गई तहरी उनके बर्तनों में दी गई थी। स्कूल में साबुन और तौलिया मौजूद था। प्रधानाध्यापिका सुनीलबाला ने बताया कि स्कूल से बर्तन देने की जानकारी उन्हें नहीं है। बर्तन हैं भी नहीं। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। प्राथमिक विद्यालय
चिलसरा में 154 बच्चे पंजीकृत हैं। 56 बच्चे मौजूद थे। बच्चे झोला में रखकर बर्तन लाए थे। तौलिया और साबुन स्कूल में था। प्रधानाध्यापिका अफरोज अल्वी ने बताया कि बर्तन स्कूल में हैं नहीं। स्कूल के बर्तनों में भोजन दिए जाने का प्रावधान
भी नहीं है। वहीं प्राथमिक विद्यालय रमापुर जसू में 84 बच्चों के सापेक्ष 46 बच्चे आए थे। बच्चों ने बताया कि मिडडे मील के लिए घर से बर्तन लेकर आते हैं। तौलिया है नहीं। कमीज और बैग से हाथ पोछते हैं। हाथ धोने के लिए साबुन दिया जाता है। प्रधानाध्यापिका शाहिस्ता परवीन ने बताया कि बर्तन हैं नहीं। तौलिया और साबुन है।
बर्तन का नहीं मिला बजट
राजेपुर के जूनियर हाईस्कूल राजेपुर में तौलिया और साबुन था लेकिन बर्तन नहीं थे। बच्चे बर्तन घर से लेकर आ रहे थे। प्रधानाध्यापक विश्राम सिंह यादव ने बताया कि बर्तन का कोई बजट नहीं मिला है। इसलिए खरीदे नहीं गए। प्राइमरी पाठशाला अलीगढ़ में बच्चों को स्कूल से ही बर्तन मिलते हैं। इसके साथ ही साबुन और तौलिया भी मौजूद था।
प्रधानाध्यापक संतोष गुप्ता ने बताया कि 100 थाली और 100 ग्लास बच्चों के लिए दिए गए थे। इन्हीं बर्तनों में बच्चों को मिडेड मील दिया जाता है। साबुन और तौलिया भी है।
न तौलिया और न साबुन
अमृतपुर के प्राथमिक विद्यालय करनपुरदत्त में साबुन और तौलिया नहीं है। खाना खाने के लिए बच्चे घरों से बर्तन लेकर आते हैं। सहायक प्रधानाध्यापिका सुनीता देवी ने बताया कि बर्तन और साबुन, तौलिया खरीदने के लिए बजट नहीं है। वहीं प्राथमिक विद्यालय महोलिया में बच्चों को घर से लाए बर्तनों में भोजन दिया जा रहा था। बच्चों ने बताया कि तौलिया और
साबुन भी नहीं है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने बताया कि बर्तन खरीदने के लिए बजट नहीं है। साबुन और तौलिया अलमारी में रखी है। ये बच्चों को दी जाती है। प्राथमिक विद्यालय इमादपुर पमारान के प्रधानाध्यापक राजेश यादव ने बताया कि बर्तन खरीदने के लिए बजट नहीं है। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। हाथ धोने के लिए साबुन और
तौलिया दिया जाता है। नेल कटर व कंघा-शीशा भी है। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय विरसिंगपुर में न तो बर्तन हैं और न ही साबुन व तौलिया है। प्रेरक सुखवेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रधानाध्यापिका छुट्टी पर हैं। वही इस बारे में बता सकती हैं।
बर्तन खरीदने का नहीं मिला बजट-बीईओ
खंड शिक्षाधिकारी सुमित वर्मा ने बताया कि कुछ विद्यालयों में पांच-छह साल पहले बर्तन खरीदने का बजट दिया गया था। इनसे बर्तन खरीदे गए थे। इसके बाद से अभी तक कोई बजट नहीं मिला है। बर्तन खरीदने का बजट एमडीएम के खाते में आता है। बजट आने पर बर्तन खरीदे जाएंगे।
हैं और न ही तौलिया व साबुन। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। शिक्षकों का कहना है कि बर्तन खरीदने के लिए बजट मिलता ही नहीं है। कई स्कूलों को दिया गया साबुन व तौलियां भी गायब हैं। पेश है अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट।
घर से बर्तन लेकर आते स्कूल!
मोहम्मदाबाद की प्राइमरी पाठशाला नगला दलजीत सिंह में बच्चे भोजन के लिए घर से बर्तन लेकर आते हैं। हालांकि हाथ धोने के लिए साबुन और तौलिया है। प्रधानाध्यापक विनय कुमार वर्मा ने बताया कि बच्चे बर्तन घर से लेकर आते हैं। बर्तन खरीदने का कोई बजट नहीं आया है। तौलिया और साबुन है। बच्चों को हाथ धुलाने के बाद ही भोजन दिया जाता है।
प्राइमरी पाठशाला, नगला महानंद का भी यही हाल है। प्रधानाध्यापक राहुल यादव ने बताया कि दो माह पहले ही उन्होंने चार्ज संभाला है। बर्तनों के बारे में नहीं बता सकते। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। तौलिया व साबुन है। उधर, प्राइमरी पाठशाला, मोहम्मदाबाद में भी बच्चे घर से ही बर्तन लाते हैं। प्रधानाध्यापक विजय बहादुर यादव ने बताया कि उनसे पहले
रहे प्रधानाध्यापक रतन सिंह ने बर्तन खरीदे थे। यह टूट गए हैं। बर्तन मंगवाए जाएंगे। तौलिया और साबुन है। प्राइमरी पाठशाला नगला अखई गोसरपुर के प्रधानाध्यापक चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि उनके स्कूल में 100 थाली और 100 ग्लास हैं। इनमें बच्चों को भोजन दिया जाता है। साबुन और तौलिया भी उपलब्ध है।
किताबों के झोले में लाते बर्तन
शमसाबाद के प्राथमिक विद्यालय गड़रियन पुरवा में 64 बच्चे पंजीकृत हैं। 33 बच्चे मौजूद थे। बच्चों को मिडडे मील में बनाई गई तहरी उनके बर्तनों में दी गई थी। स्कूल में साबुन और तौलिया मौजूद था। प्रधानाध्यापिका सुनीलबाला ने बताया कि स्कूल से बर्तन देने की जानकारी उन्हें नहीं है। बर्तन हैं भी नहीं। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। प्राथमिक विद्यालय
चिलसरा में 154 बच्चे पंजीकृत हैं। 56 बच्चे मौजूद थे। बच्चे झोला में रखकर बर्तन लाए थे। तौलिया और साबुन स्कूल में था। प्रधानाध्यापिका अफरोज अल्वी ने बताया कि बर्तन स्कूल में हैं नहीं। स्कूल के बर्तनों में भोजन दिए जाने का प्रावधान
भी नहीं है। वहीं प्राथमिक विद्यालय रमापुर जसू में 84 बच्चों के सापेक्ष 46 बच्चे आए थे। बच्चों ने बताया कि मिडडे मील के लिए घर से बर्तन लेकर आते हैं। तौलिया है नहीं। कमीज और बैग से हाथ पोछते हैं। हाथ धोने के लिए साबुन दिया जाता है। प्रधानाध्यापिका शाहिस्ता परवीन ने बताया कि बर्तन हैं नहीं। तौलिया और साबुन है।
बर्तन का नहीं मिला बजट
राजेपुर के जूनियर हाईस्कूल राजेपुर में तौलिया और साबुन था लेकिन बर्तन नहीं थे। बच्चे बर्तन घर से लेकर आ रहे थे। प्रधानाध्यापक विश्राम सिंह यादव ने बताया कि बर्तन का कोई बजट नहीं मिला है। इसलिए खरीदे नहीं गए। प्राइमरी पाठशाला अलीगढ़ में बच्चों को स्कूल से ही बर्तन मिलते हैं। इसके साथ ही साबुन और तौलिया भी मौजूद था।
प्रधानाध्यापक संतोष गुप्ता ने बताया कि 100 थाली और 100 ग्लास बच्चों के लिए दिए गए थे। इन्हीं बर्तनों में बच्चों को मिडेड मील दिया जाता है। साबुन और तौलिया भी है।
न तौलिया और न साबुन
अमृतपुर के प्राथमिक विद्यालय करनपुरदत्त में साबुन और तौलिया नहीं है। खाना खाने के लिए बच्चे घरों से बर्तन लेकर आते हैं। सहायक प्रधानाध्यापिका सुनीता देवी ने बताया कि बर्तन और साबुन, तौलिया खरीदने के लिए बजट नहीं है। वहीं प्राथमिक विद्यालय महोलिया में बच्चों को घर से लाए बर्तनों में भोजन दिया जा रहा था। बच्चों ने बताया कि तौलिया और
साबुन भी नहीं है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने बताया कि बर्तन खरीदने के लिए बजट नहीं है। साबुन और तौलिया अलमारी में रखी है। ये बच्चों को दी जाती है। प्राथमिक विद्यालय इमादपुर पमारान के प्रधानाध्यापक राजेश यादव ने बताया कि बर्तन खरीदने के लिए बजट नहीं है। बच्चे घर से ही बर्तन लेकर आते हैं। हाथ धोने के लिए साबुन और
तौलिया दिया जाता है। नेल कटर व कंघा-शीशा भी है। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय विरसिंगपुर में न तो बर्तन हैं और न ही साबुन व तौलिया है। प्रेरक सुखवेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रधानाध्यापिका छुट्टी पर हैं। वही इस बारे में बता सकती हैं।
बर्तन खरीदने का नहीं मिला बजट-बीईओ
खंड शिक्षाधिकारी सुमित वर्मा ने बताया कि कुछ विद्यालयों में पांच-छह साल पहले बर्तन खरीदने का बजट दिया गया था। इनसे बर्तन खरीदे गए थे। इसके बाद से अभी तक कोई बजट नहीं मिला है। बर्तन खरीदने का बजट एमडीएम के खाते में आता है। बजट आने पर बर्तन खरीदे जाएंगे।