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Farrukhabad News: खराब भोजन से बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद एसबीएल स्कूल खाली
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फर्रुखाबाद। एसबीएल इंटरनेशनल स्कूल में बीते दिन खराब भोजन से बीमार हुए 19 बच्चों की घटना के बाद दूसरे दिन सभी अभिभावक स्कूल से अपने-अपने बच्चों को घर ले गए। स्कूल प्रबंधन विद्यालय में बैठकर अभिलेखों में लिखा-पढ़ी कर रहा था। स्कूल प्रबंधन स्टाफ की लापरवाही से घटना होने की बात कह रहा है।
कायमगंज-फर्रुखाबाद बाईपास मार्ग पर स्थित एसबीएल इंटरनेशनल स्कूल को प्रबंधकों ने हॉस्टल भी बना रखा है। मौजूदा समय विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक के 162 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 100 हॉस्टल में रुकते हैं, जबकि बाकी प्रतिदिन स्कूल आते-जाते हैं। शनिवार को भोजन खाने के बाद 19 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। 14 बच्चों को लोहिया अस्पताल और पांच को सिटी हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। घटना की जानकारी मिलने पर उप जिलाधिकारी सदर रजनीकांत पांडेय और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी गौतम प्रसाद ने लोहिया अस्पताल के साथ ही स्कूल पहुंचकर छानबीन की थी।
बीएसए ने नोटिस जारी कर रिकार्ड तलब किया। घटना की जानकारी होते ही हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को उनके अभिभावक घर लेकर चले गए। रविवार को हॉस्टल में एक भी बच्चा नहीं था। प्रबंधक आदेश राजपूत स्टाफ के साथ बैठकर रजिस्टरों में लिखा-पढ़ी कर रहे थे। प्रबंधक ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश होने के चलते अभिभावक बच्चों को घर ले गए हैं। देर शाम बीएसए कार्यालय में स्कूल का रिकार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्कूल को कक्षा एक से आठ तक यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम की मान्यता वर्ष 2020-21 में मिली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि स्टाफ की लापरवाही के चलते घटना हुई। दरअसल पेंट वाली बाल्टी में चावल रख दिए गए। मेस इंचार्ज थे नहीं तो बच्चों ने खुद ही चावल परोस लिए, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।
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बच्चों की देखभाल के लिए है पर्याप्त स्टाफ
प्रबंधक अजीत राजपूत ने बताया कि विद्यालय में बच्चों की देखभाल के लिए चार वार्डन, पांच मैस कीपर, दो सफाई कर्मी और 15 शिक्षक हैं। इनमें से अधिकतर स्टाफ स्कूल में ही रुकता है।
मान्यता के बाद निरीक्षण करना भूले जिम्मेदार
विद्यालय को मान्यता देने के बाद जिम्मेदार निरीक्षण करना भूल गए। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ। विद्यालय प्रबंधक के अनुसार स्कूल की मान्यता वर्ष 2020-21 में हुई थी। मान्यता के समय मानक देखने के समय ही कोई जांच अधिकारी भवन देखने गया था। इसके बाद विद्यालय कैसे संचालित हो रहा है, विद्यालय में पढ़ाई के अलावा और क्या गतिविधियां संचालित हैं, इसको जानने की जिम्मेदारों ने कभी भी सुध नहीं ली। यह हाल इसी विद्यालय का नहीं है। परिषदीय विद्यालयों को छोड़कर किसी भी विद्यालय में अधिकारी निरीक्षण को नहीं जाते हैं। घटना होने के बाद जांच के नाम पर सभी स्कूलों में पत्र जारी कर इतिश्री कर दी जाती है।
बोले जिम्मेदार
एसबीएल स्कूल को नोटिस भेजकर रिकार्ड तलब किए थे। स्कूल ने रिकार्ड भिजवाए कि नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। स्कूल के रिकार्डों को गहनता से दिखवाया जाएगा। विभाग ने कक्षा एक से आठ तक अंग्रेजी माध्यम की मान्यता दी थी। स्कूल में हॉस्टल का संचालन कैसे होने लगा। इस बारे में भी स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा।
- गौतम प्रसाद, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी।
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कायमगंज-फर्रुखाबाद बाईपास मार्ग पर स्थित एसबीएल इंटरनेशनल स्कूल को प्रबंधकों ने हॉस्टल भी बना रखा है। मौजूदा समय विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक के 162 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 100 हॉस्टल में रुकते हैं, जबकि बाकी प्रतिदिन स्कूल आते-जाते हैं। शनिवार को भोजन खाने के बाद 19 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। 14 बच्चों को लोहिया अस्पताल और पांच को सिटी हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। घटना की जानकारी मिलने पर उप जिलाधिकारी सदर रजनीकांत पांडेय और जिला बेसिक शिक्षाधिकारी गौतम प्रसाद ने लोहिया अस्पताल के साथ ही स्कूल पहुंचकर छानबीन की थी।
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बीएसए ने नोटिस जारी कर रिकार्ड तलब किया। घटना की जानकारी होते ही हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को उनके अभिभावक घर लेकर चले गए। रविवार को हॉस्टल में एक भी बच्चा नहीं था। प्रबंधक आदेश राजपूत स्टाफ के साथ बैठकर रजिस्टरों में लिखा-पढ़ी कर रहे थे। प्रबंधक ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश होने के चलते अभिभावक बच्चों को घर ले गए हैं। देर शाम बीएसए कार्यालय में स्कूल का रिकार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्कूल को कक्षा एक से आठ तक यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम की मान्यता वर्ष 2020-21 में मिली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि स्टाफ की लापरवाही के चलते घटना हुई। दरअसल पेंट वाली बाल्टी में चावल रख दिए गए। मेस इंचार्ज थे नहीं तो बच्चों ने खुद ही चावल परोस लिए, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।
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बच्चों की देखभाल के लिए है पर्याप्त स्टाफ
प्रबंधक अजीत राजपूत ने बताया कि विद्यालय में बच्चों की देखभाल के लिए चार वार्डन, पांच मैस कीपर, दो सफाई कर्मी और 15 शिक्षक हैं। इनमें से अधिकतर स्टाफ स्कूल में ही रुकता है।
मान्यता के बाद निरीक्षण करना भूले जिम्मेदार
विद्यालय को मान्यता देने के बाद जिम्मेदार निरीक्षण करना भूल गए। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ। विद्यालय प्रबंधक के अनुसार स्कूल की मान्यता वर्ष 2020-21 में हुई थी। मान्यता के समय मानक देखने के समय ही कोई जांच अधिकारी भवन देखने गया था। इसके बाद विद्यालय कैसे संचालित हो रहा है, विद्यालय में पढ़ाई के अलावा और क्या गतिविधियां संचालित हैं, इसको जानने की जिम्मेदारों ने कभी भी सुध नहीं ली। यह हाल इसी विद्यालय का नहीं है। परिषदीय विद्यालयों को छोड़कर किसी भी विद्यालय में अधिकारी निरीक्षण को नहीं जाते हैं। घटना होने के बाद जांच के नाम पर सभी स्कूलों में पत्र जारी कर इतिश्री कर दी जाती है।
बोले जिम्मेदार
एसबीएल स्कूल को नोटिस भेजकर रिकार्ड तलब किए थे। स्कूल ने रिकार्ड भिजवाए कि नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। स्कूल के रिकार्डों को गहनता से दिखवाया जाएगा। विभाग ने कक्षा एक से आठ तक अंग्रेजी माध्यम की मान्यता दी थी। स्कूल में हॉस्टल का संचालन कैसे होने लगा। इस बारे में भी स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा।
- गौतम प्रसाद, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी।