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बागवानी संग जैविक सब्जियां उगा रहीं महिलाएं
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कमालगंज। बीबीपुर ग्राम पंचायत के किसान महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने स्वावलंबन के साथ प्रकृति के संरक्षण का बीड़ा उठाया है। समूह की महिलाएं ग्रामसभा की 12 बीघा जमीन पर अमरूद का बाग लगाकर उसकी देखभाल कर रही हैं। खाली जमीन पर जैविक तरीके से सब्जी की फसल तैयार करने का काम शुरू किया है।
किसान स्वयं सहायता समूह की 11 महिलाओं ने ब्लाक के अधिकारियों से अमरूद का बाग लगाने का प्रस्ताव दिया था। इस पर उन्हें 12 बीघा जमीन में बागवानी के लिए उपलब्ध कराई गई। इस जमीन पर बीच में अमरूद के 700 पौधे और मेड़ों के किनारे नीबू, कटहल, आम और जामुन के करीब 200 पौधे लगे हैं। अब तक दो बार ट्यूबवेल से पौधों की सिंचाई कराई गई है। बची जगह में जैविक तरीके से सब्जी उगाने की योजना बनाई। दो दिन पूर्व ही महिलाओं ने सब्जी की क्यारी बनाकर टमाटर, बैगन, मिर्च व गोभी की पौध लगाई है।
समूह की अध्यक्ष अंजली ने बताया कि पहले चरण में टमाटर, बैगन व मिर्च 250-250 पौधे लगाए गए हैं। पौध को कीटों से बचाने के लिए पहले मिट्टी का उपचार किया गया। अब गोबर की खाद डाली जाएगी। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं जल संरक्षण का कार्य भी कर रही हैं।
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प्रकृति संरक्षण के लिए वर्षा के पानी को सहेजना बड़ी जरूरत है। जून में मनरेगा से कैच द रेन एट जून अभियान चलाया गया था। इसमें कई तालाबों व नालों का जीर्णोद्धार कराया गया। बारिश शुरू होने के साथ ही वर्षा जल संचयन की उम्मीद बढ़ी है। बघार नाला सहित कई बड़े नालों में परकोलेशन टैंक बनाए गए। अब यह टैंक वर्षा के पानी से भर गए हैं। तालाब में भी वर्षा जल संग्रहीत हो रहा है।
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किसान स्वयं सहायता समूह की 11 महिलाओं ने ब्लाक के अधिकारियों से अमरूद का बाग लगाने का प्रस्ताव दिया था। इस पर उन्हें 12 बीघा जमीन में बागवानी के लिए उपलब्ध कराई गई। इस जमीन पर बीच में अमरूद के 700 पौधे और मेड़ों के किनारे नीबू, कटहल, आम और जामुन के करीब 200 पौधे लगे हैं। अब तक दो बार ट्यूबवेल से पौधों की सिंचाई कराई गई है। बची जगह में जैविक तरीके से सब्जी उगाने की योजना बनाई। दो दिन पूर्व ही महिलाओं ने सब्जी की क्यारी बनाकर टमाटर, बैगन, मिर्च व गोभी की पौध लगाई है।
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समूह की अध्यक्ष अंजली ने बताया कि पहले चरण में टमाटर, बैगन व मिर्च 250-250 पौधे लगाए गए हैं। पौध को कीटों से बचाने के लिए पहले मिट्टी का उपचार किया गया। अब गोबर की खाद डाली जाएगी। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं जल संरक्षण का कार्य भी कर रही हैं।
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प्रकृति संरक्षण के लिए वर्षा के पानी को सहेजना बड़ी जरूरत है। जून में मनरेगा से कैच द रेन एट जून अभियान चलाया गया था। इसमें कई तालाबों व नालों का जीर्णोद्धार कराया गया। बारिश शुरू होने के साथ ही वर्षा जल संचयन की उम्मीद बढ़ी है। बघार नाला सहित कई बड़े नालों में परकोलेशन टैंक बनाए गए। अब यह टैंक वर्षा के पानी से भर गए हैं। तालाब में भी वर्षा जल संग्रहीत हो रहा है।