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निलंबित शिक्षक ने दस वर्ष पहले रुपये लेकर ग्रामीण को सौंप दी थी महिला
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फर्रुखाबाद। नवाबगंज के निलंबित शिक्षक ने दस वर्ष पहले कुशीनगर की महिला को रुपये लेकर ग्रामीण को सौंप दिया था। परिवार के बीच पहुंची महिला सिपाही को आशीर्वाद देते नहीं थक रही है। महिला किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती है। कर्मों का फल बताकर महिला रोने लगी। पुलिस अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।
कुशीनगर के थाना रामकोला के गांव आटहौली निवासी फूलेन कुशवाहा की पत्नी राजमती वर्ष 2010 में बाजार करने गई थीं। रास्ते में डग्गामार वाहन में बैठ गईं। उसमें सवार जहरखुरानी गिरोह का शिकार हो गईं। जब उनको होश आया तो वे कानपुर में थीं। निरक्षर राजमती को कुछ लोग घर पहुंचाने के नाम पर फुसलाकर ले गए और दस हजार रुपये में नवाबगंज के ग्रामीण को सौंप दिया था। 17 अक्तूबर को जब एसओजी के सिपाही सुनील दुबे व सचेंद्र सिंह लूट के मामले में छानबीन करने के लिए गए तो राजमती से उनकी मुलाकात हो गई। भोजपुरी बोलने पर सिपाही सुनील दुबे ने उससे पूछ दिया कि वह कहां की रहने वाली हैं। इस पर राजमती ने पूरे मामले की जानकारी दी। उसकी कहानी सुनने के बाद सुनील दुबे ने उस ग्रामीण को बुलाया जिसके घर राजमती रह रही थीं। ग्रामीण ने बताया कि गांव के ही निलंबित शिक्षक ने पांचाल घाट पर दस हजार रुपये लेकर राजमती को उसके हवाले कर दिया था। राजमती की दिमागी हालत भी कुछ ठीक नहीं थी। बाद में वह सही हो गईं, अपने परिवार को याद करती रहती थीं। सिपाही सुनील दुबे कुशीनगर में तैनात रह चुके थे। उन्होंने थाना रामकोला में अपने साथी सिपाही को फोन करके राजमती के पति फुलेन कुशवाहा के पास भेजा। फुलेन जब उसको लेने के लिए फतेहगढ़ बुधवार को पहुंचे थे, तो वे दंग रह गए। वह दस वर्ष पहले खोई पत्नी को साथ लेकर चले गए। राजमती ने बताया कि वह किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती है। नवाबगंज में जिसके साथ वह रही थीं। उससे भी उन्हें कोई शिकायत नहीं है। एसओजी प्रभारी जेपी शर्मा ने बताया कि महिला ने किसी के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है।
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कुशीनगर के थाना रामकोला के गांव आटहौली निवासी फूलेन कुशवाहा की पत्नी राजमती वर्ष 2010 में बाजार करने गई थीं। रास्ते में डग्गामार वाहन में बैठ गईं। उसमें सवार जहरखुरानी गिरोह का शिकार हो गईं। जब उनको होश आया तो वे कानपुर में थीं। निरक्षर राजमती को कुछ लोग घर पहुंचाने के नाम पर फुसलाकर ले गए और दस हजार रुपये में नवाबगंज के ग्रामीण को सौंप दिया था। 17 अक्तूबर को जब एसओजी के सिपाही सुनील दुबे व सचेंद्र सिंह लूट के मामले में छानबीन करने के लिए गए तो राजमती से उनकी मुलाकात हो गई। भोजपुरी बोलने पर सिपाही सुनील दुबे ने उससे पूछ दिया कि वह कहां की रहने वाली हैं। इस पर राजमती ने पूरे मामले की जानकारी दी। उसकी कहानी सुनने के बाद सुनील दुबे ने उस ग्रामीण को बुलाया जिसके घर राजमती रह रही थीं। ग्रामीण ने बताया कि गांव के ही निलंबित शिक्षक ने पांचाल घाट पर दस हजार रुपये लेकर राजमती को उसके हवाले कर दिया था। राजमती की दिमागी हालत भी कुछ ठीक नहीं थी। बाद में वह सही हो गईं, अपने परिवार को याद करती रहती थीं। सिपाही सुनील दुबे कुशीनगर में तैनात रह चुके थे। उन्होंने थाना रामकोला में अपने साथी सिपाही को फोन करके राजमती के पति फुलेन कुशवाहा के पास भेजा। फुलेन जब उसको लेने के लिए फतेहगढ़ बुधवार को पहुंचे थे, तो वे दंग रह गए। वह दस वर्ष पहले खोई पत्नी को साथ लेकर चले गए। राजमती ने बताया कि वह किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती है। नवाबगंज में जिसके साथ वह रही थीं। उससे भी उन्हें कोई शिकायत नहीं है। एसओजी प्रभारी जेपी शर्मा ने बताया कि महिला ने किसी के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है।
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