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रमजान में रोजा रख बच्चे से बुजुर्ग तक अल्लाह की इबादत में लगे
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 22 Jun 2015 11:17 PM IST
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भीषण गर्मी के बाद भी रमजान में रोजेदार पूरी शिद्दत से इबादत कर रहे हैं।
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दिनभर कामकाज करने के बावजूद रोजादार रोजा जरूर रख रहे हैं। अल्लाह ने
रोजादारों के लिए रोजा फर्ज भी किया है। इसके चलते रोजा रखने वालों में भी
गजब का उत्साह है। रमजान माह में रोजा रखने वाले दुकानदारों व कामकाजी
लोगों की दिनचर्या भी बदली है।
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक रोजा रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। मस्जिदें अल्लाहु अकबर की सदाओं से गूंज रही हैं। रमजान के चलते सुबह होते ही मस्जिदों में इबादत शुरू हो जाती है। शहर में जगह-जगह रोजा इफ्तार की पार्टियों का आयोजन भी शुरू हो गया है। रोजा इफ्तार पार्टियों में अकीदतमंद उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। शाम को इफ्तार के दौरान बाजार में
भी अच्छीखासी चहल-पहल रहती है। फास्ट फूड से लेकर फलों की ठेलियों पर भी मुस्लिम भाइयों की भीड़ नजर आती है।
रोजेदारों की दिनचर्या भी बदल गई है। ये शाम को जल्दी सो जाते हैं और रात तीन, साढ़े तीन बजे तक जागकर सहरी करते हैं। कामकाज और रोजा रखे दुकानदारों ने भी दिनचर्या में फेरबदल किया है। गढ़ी कोहना में फास्ट फूड की दुकान किए जावेद
खां कहते हैं कि सुबह 7 से लेकर 11 बजे तक दुकान खोलते थे। रोजा के चलते वह सुबह 8.30 बजे दुकान खोलते हैं। दोपहर में मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए आधा, पौन घंटा तक दुकान बंद रखते हैं। तड़के उठना होता है इसलिए रात को आठ, साढ़े आठ बजे दुकान बंद कर देते हैं।
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक रोजा रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। मस्जिदें अल्लाहु अकबर की सदाओं से गूंज रही हैं। रमजान के चलते सुबह होते ही मस्जिदों में इबादत शुरू हो जाती है। शहर में जगह-जगह रोजा इफ्तार की पार्टियों का आयोजन भी शुरू हो गया है। रोजा इफ्तार पार्टियों में अकीदतमंद उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। शाम को इफ्तार के दौरान बाजार में
भी अच्छीखासी चहल-पहल रहती है। फास्ट फूड से लेकर फलों की ठेलियों पर भी मुस्लिम भाइयों की भीड़ नजर आती है।
रोजेदारों की दिनचर्या भी बदल गई है। ये शाम को जल्दी सो जाते हैं और रात तीन, साढ़े तीन बजे तक जागकर सहरी करते हैं। कामकाज और रोजा रखे दुकानदारों ने भी दिनचर्या में फेरबदल किया है। गढ़ी कोहना में फास्ट फूड की दुकान किए जावेद
खां कहते हैं कि सुबह 7 से लेकर 11 बजे तक दुकान खोलते थे। रोजा के चलते वह सुबह 8.30 बजे दुकान खोलते हैं। दोपहर में मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए आधा, पौन घंटा तक दुकान बंद रखते हैं। तड़के उठना होता है इसलिए रात को आठ, साढ़े आठ बजे दुकान बंद कर देते हैं।