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लिपिक को निलंबित कर रिपोर्ट लिखाने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 29 Jul 2016 10:43 PM IST
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थाने में खडे टेंपो में लदी पंजीरी की बोरियों को देखते एसडीएम सदर।
- फोटो : अमर उजाला
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एसडीएम के नाम पर व्यापारियों से अवैध वसूली करने और फर्जी आदेश बनाकर सम्मन शुल्क वसूलने की शिकायतों पर मंडी और बाल पुष्टाहार गोदाम लिपिक पर गाज गिरी। एसडीएम ने लिपिक को निलंबित कर एफआईआर के निर्देश दिए हैं। साथ मंडी सचिव को जमकर फटकार लगाई।
एसडीएम ने शुक्रवार को अचानक मंडी और बाल विकास पुष्टाहार गोदाम पर छापा मारा। गोदाम पर सुपरवाइजर मीना सिंह के उपस्थित रजिस्टर पर हस्ताक्षर थे लेकिन वह नदारद थीं। उन्हें गोदाम के बाहर टेंपो पर लदी पंजीरी की बोरियां बिना कोडिंग और अधूरी कोडिंग की मिलीं। एसडीएम ने सीडीपीओ और सुपरवाइजर से नाराजगी जाहिर करते हुए बिना कोडिंग की बोरी भरे टेंपो को थाने भिजवा दिया।
पूछने पर सीडीपीओ रामऔतार राम और सुपरवाइजर सुचेता दुबे कोडिंग की जानकारी नहीं दे पाए। सीडीपीओ ने बताया कि एक टेंपो में राजेपुर टप्पामंडल की कार्यकत्री स्नेहलता और दूसरे टेंपो में सुमित्तापुर की कार्यकत्री सरोजनी देवी और बझेरा की कार्यकत्री किरन देवी की पंजीरी की बोरियां लदी थीं। स्टॉक रजिस्टर भी अधूरा मिला। गुस्साए एसडीएम सदर ने बिना कोडिंग के बोरियां वितरण करने में लिपिक महेश चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया।
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साथ ही सीडीपीओ को लिपिक के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए। बोरियों पर दस अंको का पूरा कोड न डालने पर उन्होंने सीडीपीओ और सुपरवाइजर को जमकर हड़काया। सुपरवाइजरों ने आरोप लगाया कि लिपिक किसी को भी रजिस्टर देखने नहीं देते हैं। एसडीएम सदर ने बताया कि मंडी में और पुष्टाहार गोदाम पर उच्च अधिकारियों के नाम पर वसूली करने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
एसडीएम सदर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मंडी सचिव हरगोंविंद शुक्ला ने मंडी के व्यापारियों से यह कह कर पैसा वसूला है कि एसडीएम रोज-रोज आकर मंडी में बैठ जाते हैं। उन्हें पैसे पहुंचाने हैं। उन्होंने बताया मंडी सचिव ने एक व्यापारी से उनका फर्जी आदेश बनाकर तीन हजार रुपये का सम्मन शुल्क वसूल लिया। बिना उनकी अनुमति के आदेश पत्र पर फर्जी तरीके से लिख दिया कि सभापति यानी एसडीएम के आदेश पर तीन हजार रुपए सम्मन शुल्क वसूला जाता है।
उधर, मंडी सचिव ने गुरुवार को एक ही जगह दो लोगों को आवंटित कर दी, जिससे दोनों पक्षों के बीच जगह की सफाई को लेकर विवाद हो गया था। शिकायत पर मंडी सचिव ने एक पक्ष के साथ गालीगलौच किया। एसडीएम ने बताया कि जांच में मंडी सचिव द्वारा फोन पर गाली गलौच की शिकायत की भी पुष्टि हुई। मंडी सचिव ने एसडीएम को बताया कि पूर्व सचिव ने उन्हें अभी तक चार्ज नही दिया है।
इस पर एसडीएम ने पूर्व सचिव सुरेश चौहान को 30 जुलाई तक चार्ज सौंपने के निर्देश दिए हैं। उपस्थित रजिस्टर में हेराफेरी पर एसडीएम ने चौकीदार कश्मीर सिंह को उपस्थित रजिस्टर सौंप दिया। एसडीएम ने बताया कि मंडी सचिव की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
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एसडीएम ने शुक्रवार को अचानक मंडी और बाल विकास पुष्टाहार गोदाम पर छापा मारा। गोदाम पर सुपरवाइजर मीना सिंह के उपस्थित रजिस्टर पर हस्ताक्षर थे लेकिन वह नदारद थीं। उन्हें गोदाम के बाहर टेंपो पर लदी पंजीरी की बोरियां बिना कोडिंग और अधूरी कोडिंग की मिलीं। एसडीएम ने सीडीपीओ और सुपरवाइजर से नाराजगी जाहिर करते हुए बिना कोडिंग की बोरी भरे टेंपो को थाने भिजवा दिया।
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पूछने पर सीडीपीओ रामऔतार राम और सुपरवाइजर सुचेता दुबे कोडिंग की जानकारी नहीं दे पाए। सीडीपीओ ने बताया कि एक टेंपो में राजेपुर टप्पामंडल की कार्यकत्री स्नेहलता और दूसरे टेंपो में सुमित्तापुर की कार्यकत्री सरोजनी देवी और बझेरा की कार्यकत्री किरन देवी की पंजीरी की बोरियां लदी थीं। स्टॉक रजिस्टर भी अधूरा मिला। गुस्साए एसडीएम सदर ने बिना कोडिंग के बोरियां वितरण करने में लिपिक महेश चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया।
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साथ ही सीडीपीओ को लिपिक के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए। बोरियों पर दस अंको का पूरा कोड न डालने पर उन्होंने सीडीपीओ और सुपरवाइजर को जमकर हड़काया। सुपरवाइजरों ने आरोप लगाया कि लिपिक किसी को भी रजिस्टर देखने नहीं देते हैं। एसडीएम सदर ने बताया कि मंडी में और पुष्टाहार गोदाम पर उच्च अधिकारियों के नाम पर वसूली करने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
एसडीएम सदर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मंडी सचिव हरगोंविंद शुक्ला ने मंडी के व्यापारियों से यह कह कर पैसा वसूला है कि एसडीएम रोज-रोज आकर मंडी में बैठ जाते हैं। उन्हें पैसे पहुंचाने हैं। उन्होंने बताया मंडी सचिव ने एक व्यापारी से उनका फर्जी आदेश बनाकर तीन हजार रुपये का सम्मन शुल्क वसूल लिया। बिना उनकी अनुमति के आदेश पत्र पर फर्जी तरीके से लिख दिया कि सभापति यानी एसडीएम के आदेश पर तीन हजार रुपए सम्मन शुल्क वसूला जाता है।
उधर, मंडी सचिव ने गुरुवार को एक ही जगह दो लोगों को आवंटित कर दी, जिससे दोनों पक्षों के बीच जगह की सफाई को लेकर विवाद हो गया था। शिकायत पर मंडी सचिव ने एक पक्ष के साथ गालीगलौच किया। एसडीएम ने बताया कि जांच में मंडी सचिव द्वारा फोन पर गाली गलौच की शिकायत की भी पुष्टि हुई। मंडी सचिव ने एसडीएम को बताया कि पूर्व सचिव ने उन्हें अभी तक चार्ज नही दिया है।
इस पर एसडीएम ने पूर्व सचिव सुरेश चौहान को 30 जुलाई तक चार्ज सौंपने के निर्देश दिए हैं। उपस्थित रजिस्टर में हेराफेरी पर एसडीएम ने चौकीदार कश्मीर सिंह को उपस्थित रजिस्टर सौंप दिया। एसडीएम ने बताया कि मंडी सचिव की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।