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4907 में से महज 33 कालेजों ने ही कराया अग्निशमन यंत्रों का नवीनीकरण
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सेठ कन्हैया लाल रामशरण रस्तोगी इंटर कॉलेज का गेट। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। गुजरात और दिल्ली में भीषण आग की घटनाओं से भी प्रशासन व शिक्षा विभाग ने सबक नहीं लिया है। स्कूलों व कालेजों में अग्नि शमन यंत्र के नाम पर एक-दो सीजफायर सिलिंडर लगे हैं। अधिकांश की वैधता भी खत्म हो गई है। इस वर्ष अग्नि शमन यंत्र के नवीनीकरण के लिए कुल 33 स्कूलों व कालेजों की ओर से आवेदन किए गए हैं। उनको ही नवीनीकरण के प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। ऐसे में नौनिहालों की जान जोखिम में डालकर जिले में स्कूल व कालेज संचालित हो रहे हैं।
जिले में प्राइमरी 1290, जूनियर हाईस्कूल 565 हैं। इसके अलावा मान्यता प्राप्त, प्राइमरी, जूनियर, इंटर कालेज, डिग्री कालेज मिलाकर 3052 स्कूल व कालेज हैं। इनमें तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। शासन ने आग की घटनाओं से बचने के लिए सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों व कालेजों में अग्निशमन यंत्र लगवाकर विभाग से प्रमाण पत्र लेने के आदेश दिए हैं। इसके साथ प्रधानाघ्यापक, प्राचार्य, प्रबंध तंत्र की ओर से अग्नि शमन यंत्र की गतिशीलता का शपथ पत्र भी बीएसए व डीआईओएस कार्यालय में जमा करवाया जाता है। प्रत्येक वर्ष स्कूलों व कालेजों में लगे अग्निशमन यंत्रों की जांच कराकर नवीनीकरण प्रमाण बनवाने के आदेश हैं। बावजूद इसके 4907 स्कूल व कालेजों में से इस वर्ष 33 की ओर से अग्निशमन यंत्र का नवीनीकरण कराया गया है।
जुलाई में ही शासन ने सभी स्कूलों व कालेजों में अग्निशमन यंत्र की जांच के लिए बीएसए और डीआईओएस को अपने स्तर से स्थलीय भ्रमण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे। शासन में रिपोर्ट शतप्रतिशत की भेज दी गई। वहीं बीएसए व डीआईओएस कार्यालय में जिन स्कूलों व कालेजों को मान्यता दी गई है उनमें से अधिकांश की फाइलों में अग्निशमन यंत्र के फर्जी प्रमाण पत्र व सिलिंडर की खरीद की रसीदें लगाई गई हैं।
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अग्निशमन यंत्र के प्रमाण प्रत्र के लिए आवेदक को सीजफायर सिलिंडर की खरीद की रसीद के साथ प्रति सिलिंडर दस रुपये के हिसाब से बैंक में चालान जमा करके आवेदन करना होता है। अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं स्कूल व कालेज में जाकर भवन व वहां लगे अग्निशमन यंत्र की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट लगाएं। यहां भी लेन देन कर जांच रिपोर्ट लगाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। अग्नि शमन विभाग के पास पूरा रिकार्ड भी नहीं है कि किस वर्ष कितने प्रमाण पत्र जारी किए गए। उसके लिए रजिस्टर नहीं बल्कि फाइलों को खंगालना पड़ता। यह एक-दो दिन में पूरा भी नहीं होता है।
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी अवधेश कुमार का कहना है कि जब स्कूल-कालेज के लोग अग्निशमन प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं करते तो कहां कहां जांच करने जाएं। विभाग के पास वैसे भी बहुत जिम्मेदारी है। इससे काम समय से पूरा नहीं हो पा रहा है
जिले में अग्निशमन विभाग में सीएफओ, अग्निशमन अधिकारी का पद खाली है। सहायक अग्निशमन अधिकारी के दो पद हैं, लेकिन तैनाती एक की है। फायरमैन के 25 पद हैं पर 15 ही तैनात हैं। लीड फायरमैन के चार पद पर एक ही तैनाती है। संसाधन के नाम पर जिले में दो दमकल की गाड़ी हैं। एक पुरानी और खराब है। उसकी नीलामी होने को है। दो छोटी गाड़ी हैं, उनमें पंप लगे हैं। एक नई बाइक भी विभाग की ओर से मुहैया कराई गई है। दौलतपुर चकई राजेपुर में एक फायर सबस्टेशन निर्माणाधीन है। कायमगंज में प्रयास के बाद भी अब तक प्रशासन जमीन नहीं मुहैया करा सका है।
अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं। मैनपावर की महकमे में ही कमी है। लेकिन हम सभी को उन संसाधनों में ही बेहतर काम करना है। उसको बेहतर करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। कई बार दमकल की टीम ने सराहनीय काम भी किए हैं। -त्रिभुवन सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
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जिले में प्राइमरी 1290, जूनियर हाईस्कूल 565 हैं। इसके अलावा मान्यता प्राप्त, प्राइमरी, जूनियर, इंटर कालेज, डिग्री कालेज मिलाकर 3052 स्कूल व कालेज हैं। इनमें तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। शासन ने आग की घटनाओं से बचने के लिए सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों व कालेजों में अग्निशमन यंत्र लगवाकर विभाग से प्रमाण पत्र लेने के आदेश दिए हैं। इसके साथ प्रधानाघ्यापक, प्राचार्य, प्रबंध तंत्र की ओर से अग्नि शमन यंत्र की गतिशीलता का शपथ पत्र भी बीएसए व डीआईओएस कार्यालय में जमा करवाया जाता है। प्रत्येक वर्ष स्कूलों व कालेजों में लगे अग्निशमन यंत्रों की जांच कराकर नवीनीकरण प्रमाण बनवाने के आदेश हैं। बावजूद इसके 4907 स्कूल व कालेजों में से इस वर्ष 33 की ओर से अग्निशमन यंत्र का नवीनीकरण कराया गया है।
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जुलाई में ही शासन ने सभी स्कूलों व कालेजों में अग्निशमन यंत्र की जांच के लिए बीएसए और डीआईओएस को अपने स्तर से स्थलीय भ्रमण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे। शासन में रिपोर्ट शतप्रतिशत की भेज दी गई। वहीं बीएसए व डीआईओएस कार्यालय में जिन स्कूलों व कालेजों को मान्यता दी गई है उनमें से अधिकांश की फाइलों में अग्निशमन यंत्र के फर्जी प्रमाण पत्र व सिलिंडर की खरीद की रसीदें लगाई गई हैं।
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अग्निशमन यंत्र के प्रमाण प्रत्र के लिए आवेदक को सीजफायर सिलिंडर की खरीद की रसीद के साथ प्रति सिलिंडर दस रुपये के हिसाब से बैंक में चालान जमा करके आवेदन करना होता है। अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं स्कूल व कालेज में जाकर भवन व वहां लगे अग्निशमन यंत्र की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट लगाएं। यहां भी लेन देन कर जांच रिपोर्ट लगाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। अग्नि शमन विभाग के पास पूरा रिकार्ड भी नहीं है कि किस वर्ष कितने प्रमाण पत्र जारी किए गए। उसके लिए रजिस्टर नहीं बल्कि फाइलों को खंगालना पड़ता। यह एक-दो दिन में पूरा भी नहीं होता है।
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी अवधेश कुमार का कहना है कि जब स्कूल-कालेज के लोग अग्निशमन प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं करते तो कहां कहां जांच करने जाएं। विभाग के पास वैसे भी बहुत जिम्मेदारी है। इससे काम समय से पूरा नहीं हो पा रहा है
जिले में अग्निशमन विभाग में सीएफओ, अग्निशमन अधिकारी का पद खाली है। सहायक अग्निशमन अधिकारी के दो पद हैं, लेकिन तैनाती एक की है। फायरमैन के 25 पद हैं पर 15 ही तैनात हैं। लीड फायरमैन के चार पद पर एक ही तैनाती है। संसाधन के नाम पर जिले में दो दमकल की गाड़ी हैं। एक पुरानी और खराब है। उसकी नीलामी होने को है। दो छोटी गाड़ी हैं, उनमें पंप लगे हैं। एक नई बाइक भी विभाग की ओर से मुहैया कराई गई है। दौलतपुर चकई राजेपुर में एक फायर सबस्टेशन निर्माणाधीन है। कायमगंज में प्रयास के बाद भी अब तक प्रशासन जमीन नहीं मुहैया करा सका है।
अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं। मैनपावर की महकमे में ही कमी है। लेकिन हम सभी को उन संसाधनों में ही बेहतर काम करना है। उसको बेहतर करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। कई बार दमकल की टीम ने सराहनीय काम भी किए हैं। -त्रिभुवन सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक