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Farrukhabad News: शीतगृहों से फेंका जा रहा किसानों का छोड़ा आलू
Sun, 28 Dec 2025 01:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 28 Dec 2025 01:24 AM IST
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फोटो-9 कमालगंज क्षेत्र में एक शीतगृह के बाहर पड़े आलू के पैकेट, गोवंश बना रहे निवाला। संवाद
फर्रुखाबाद/कमालगंज। पुराने आलू की बेकदरी और बढ़ गई है। शीतगृह खाली करने के लिए अब आलू फेंकने की नौबत आ गई है। कुछ शीतगृहों से आलू फेंका भी जाने भी लगा है। हाइब्रिड छट्ठा आलू व छोटे गोल साइज का अगेती बोआई वाला बीजा (गुल्ला) फेंका जा रहा है।
जिले में 109 शीतगृह हैं। मंदी के चलते किसानों ने शीतगृहों से अपना पूरा आलू नहीं निकाल पाया। अक्तूबर तक खाली होने वाले शीतगृहों में अभी आलू भरा है। हालांकि 30 नवंबर तक शीतगृह की मशीनें चलने का दावा किया गया। इसके बाद आलू निकाल लेने का नोटिस चस्पा किया गया। हालात यह हैं कि कई शीतगृहों में अभी पांच हजार या इससे अधिक आलू भरा होने की बात सामने आ रही है।
शुगर फ्री चैंबर में भंडारित चिपसोना आलू ज्यादा है। यह करीब 200 रुपये में 50 किलो का पैकेट बिक रहा है। इसमें 150 रुपये का शीतगृह का भाड़ा है। पचास रुपये बच सकते हैं। जो किसान कानपुर भेज रहे तो कटाई, छटाई व खराब निकले आलू का पैसा जोड़ रहे तो 50 रुपये भी नहीं बच रहे हैं। इसलिए ज्यादातर किसान चिपसोना आलू शीतगृह में ही छोड़ रहे हैं। किसान शीतगृह मालिक से कह रहे कि आलू बेचकर अपना भाड़ा निकाल लो। गांव फतेहउल्लापुर के प्रधान स्वदेश कटियार ने बताया कि तीन हजार पैकेट चिपसोना कोल्ड स्टोरेज में रह गया था। 700 पैकेट कोल्ड स्टोरेज मालिक को दे दिए। इसके 45 रुपये पैकेट के दाम मिले। 2300 पैकेट अभी भी पड़े है।
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दूसरी ओर हाइब्रिड में ख्याती व पुखराज का भाव कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा चुकाने भर का भी नहीं है। इसीलिए यह आलू फिंकने की नौबत है। आलू बीजा (छोटे साइज का गुल्ला) भी फिक रहा है। शीतगृह की मशीन बंद होने से यह तेजी से खराब हो रहा है। हालांकि अभी तक केवल 50 शीतगृह मालिकों ने ही उद्यान अधिकारी को सभी आलू निकल जाने का प्रमाण पत्र दिया है। शीतगृहों में करीब 50 हजार पैकेट आलू होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
और अधिक तेजी की उम्मीद में आलू न रोकें किसान
- गांव सबलपुर के आलू किसान व व्यापारी विपिन सिंह का कहना है कि और अधिक तेजी की उम्मीद में आलू को शीतगृह में नहीं रोकना चाहिए। जब ख्याती व पुखराज 550 से 600 रुपये व चिपसोना 700 से 800 रुपये प्रति पैकेट हुआ तो भी बहुत से किसानों ने और तेजी आने की उम्मीद में आलू नहीं बेचा था। इसके बाद बढ़ने के बजाय भाव गिरते गए। अब पुराने आलू की भरमार ने नई कच्ची फसल के आलू की भी रिकार्ड मंदी छाई है। 250 रुपये प्रति पैकेट नया आलू बिक रहा है। किसान शरद कुमार ने कहा कि शीतगृह में भरे माल में किसानों को चिपसोना में कम से कम 600 व हाइब्रिड में 500 रुपये क्विंटल के हिसाब से लागत की रकम डूब गई। वहीं कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू के अलावा कुछ हिस्सों में अन्य फसलों को भी उगाना चाहिए।
वर्जन
बहुत से किसान हर साल जनवरी में ही चिपसोना आलू शीतगृह से निकालकर बेच देते हैं, वही आलू बचा है। हाइब्रिड किस्म का आलू पूरी तौर से निकल चुका है। जो शीतगृह संचालक लिखकर दे चुके कि अब उनके यहां आलू नहीं बचा। उन शीतगृहों में सफाई कराई जा रही है। सफाई वाला आलू फेंका जा रहा है। सफाई में निकलने वाले आलू के सही निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। -राघवेंद्र सिंह, जिला आलू विकास अधिकारी
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जिले में 109 शीतगृह हैं। मंदी के चलते किसानों ने शीतगृहों से अपना पूरा आलू नहीं निकाल पाया। अक्तूबर तक खाली होने वाले शीतगृहों में अभी आलू भरा है। हालांकि 30 नवंबर तक शीतगृह की मशीनें चलने का दावा किया गया। इसके बाद आलू निकाल लेने का नोटिस चस्पा किया गया। हालात यह हैं कि कई शीतगृहों में अभी पांच हजार या इससे अधिक आलू भरा होने की बात सामने आ रही है।
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शुगर फ्री चैंबर में भंडारित चिपसोना आलू ज्यादा है। यह करीब 200 रुपये में 50 किलो का पैकेट बिक रहा है। इसमें 150 रुपये का शीतगृह का भाड़ा है। पचास रुपये बच सकते हैं। जो किसान कानपुर भेज रहे तो कटाई, छटाई व खराब निकले आलू का पैसा जोड़ रहे तो 50 रुपये भी नहीं बच रहे हैं। इसलिए ज्यादातर किसान चिपसोना आलू शीतगृह में ही छोड़ रहे हैं। किसान शीतगृह मालिक से कह रहे कि आलू बेचकर अपना भाड़ा निकाल लो। गांव फतेहउल्लापुर के प्रधान स्वदेश कटियार ने बताया कि तीन हजार पैकेट चिपसोना कोल्ड स्टोरेज में रह गया था। 700 पैकेट कोल्ड स्टोरेज मालिक को दे दिए। इसके 45 रुपये पैकेट के दाम मिले। 2300 पैकेट अभी भी पड़े है।
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दूसरी ओर हाइब्रिड में ख्याती व पुखराज का भाव कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा चुकाने भर का भी नहीं है। इसीलिए यह आलू फिंकने की नौबत है। आलू बीजा (छोटे साइज का गुल्ला) भी फिक रहा है। शीतगृह की मशीन बंद होने से यह तेजी से खराब हो रहा है। हालांकि अभी तक केवल 50 शीतगृह मालिकों ने ही उद्यान अधिकारी को सभी आलू निकल जाने का प्रमाण पत्र दिया है। शीतगृहों में करीब 50 हजार पैकेट आलू होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
और अधिक तेजी की उम्मीद में आलू न रोकें किसान
- गांव सबलपुर के आलू किसान व व्यापारी विपिन सिंह का कहना है कि और अधिक तेजी की उम्मीद में आलू को शीतगृह में नहीं रोकना चाहिए। जब ख्याती व पुखराज 550 से 600 रुपये व चिपसोना 700 से 800 रुपये प्रति पैकेट हुआ तो भी बहुत से किसानों ने और तेजी आने की उम्मीद में आलू नहीं बेचा था। इसके बाद बढ़ने के बजाय भाव गिरते गए। अब पुराने आलू की भरमार ने नई कच्ची फसल के आलू की भी रिकार्ड मंदी छाई है। 250 रुपये प्रति पैकेट नया आलू बिक रहा है। किसान शरद कुमार ने कहा कि शीतगृह में भरे माल में किसानों को चिपसोना में कम से कम 600 व हाइब्रिड में 500 रुपये क्विंटल के हिसाब से लागत की रकम डूब गई। वहीं कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू के अलावा कुछ हिस्सों में अन्य फसलों को भी उगाना चाहिए।
वर्जन
बहुत से किसान हर साल जनवरी में ही चिपसोना आलू शीतगृह से निकालकर बेच देते हैं, वही आलू बचा है। हाइब्रिड किस्म का आलू पूरी तौर से निकल चुका है। जो शीतगृह संचालक लिखकर दे चुके कि अब उनके यहां आलू नहीं बचा। उन शीतगृहों में सफाई कराई जा रही है। सफाई वाला आलू फेंका जा रहा है। सफाई में निकलने वाले आलू के सही निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। -राघवेंद्र सिंह, जिला आलू विकास अधिकारी