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नए साल में विदेश में निर्यात होगा आलू
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 30 Dec 2014 11:30 PM IST
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नए साल में आलू निर्यात होगा। इसके लिए सांसद ने पहल की है। आलू निर्यात के
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संबंध में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री व कृषि मंत्री ने हरी झंडी दिखा दी है।
अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। जिले से 2009 में नेपाल को आलू निर्यात
हुआ था। इसके बाद से ये पहल परवान नहीं चढ़ पाई। इस बार बंपर पैदावार से
किसानों की लागत वसूल नहीं हो पा रही है।
देश के आठ प्रांतों को आपूर्त हो रहे फर्रुखाबादी आलू को वर्ष 2013 को छोड़कर लगातार घाटा उठाना पड़ा है। इस बार भी किसानों को उनकी उपज का दाम मयस्सर नहीं है। मंगलवार को 511 रुपया प्रति क्विंटल की दर से आलू बिका है।
आलू किसानों की दुर्दशा को देखते हुए भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सीतारमण व कृषि मंत्री
राधामोहन से फर्रुखाबादी आलू के निर्यात का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए दोनों विभागों से हरी झंडी मिल गई है। अब केंद्रीय टीम यहां के आलू की गुणवत्ता का परीक्षण करने आएगी। सांसद खुद केंद्रीय एग्रीकल्चर कमेटी के सदस्य हैं। कमेटी के बाकी सदस्य पूर्व मंत्री हुकुमनरायन सिंह यादव, सांसद विनय कटियार, पूर्व मुख्यमंत्री यदुरप्पा ने भी फर्रुखाबादी आलू के निर्यात को केंद्रीय कृषि मंत्री से मांग की है।
सांसद ने बताया कि देश की आईटीसी एग्रो के वाइस प्रेसीडेंट अनिल राजपूत से भी आलू आधारित उद्योग लगाने की बातचीत चल रही है। इसके अलावा जिले में आलू पर आधारित फैक्ट्री की भी पैरवी की जा रही है।
फर्रुखाबादी आलू बंगाल, बिहार, उत्तरांचल, छत्तीसगढ़, असम, दिल्ली व प्रदेश की अन्य मंडियों में पहुंच रहा है।
जिले में 36 हजार हेक्टेयर रकबा में आलू की बुवाई होती है। इस वर्ष करीब 12 लाख मीट्रिक टन आलू पैदावार की संभावना है। अगैती फसल में देश के सभी बड़े राज्यों को आलू की आपूर्ति करने के बावजूद यहां के किसान के हाथों में कुछ नहीं आता है। वर्ष 2013 में आलू बिक्री की स्थिति ठीक रही थी। इस साल किसान मुनाफा में रहे थे। व्यापारी सुधीर वर्मा उर्फ रिंकू,
राकेश राजपूत और सुरेंद्र सिंह पाल कहते हैं कि फर्रुखाबादी आलू की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार हुआ है। ठोस पहल न होने से आलू पर आधारित कोई भी उद्योग जिले में नहीं लगाया जा सका। गैर प्रांतों की मंडियों में आलू भेजना रिस्क का काम है। व्यापारी वहां अपने जोखिम पर आलू भेजता है। कभी भाव गिर जाने से लोडिंग का भाड़ा तक नहीं निकलता।
बीते सालों में ये रही पैदावार
वर्ष 2009-2010 में साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2010-11 में साढ़े दस लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2011-12 में करीब 11 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2012-13 में 11 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2013-14 में करीब साढ़े 11 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।
देश के आठ प्रांतों को आपूर्त हो रहे फर्रुखाबादी आलू को वर्ष 2013 को छोड़कर लगातार घाटा उठाना पड़ा है। इस बार भी किसानों को उनकी उपज का दाम मयस्सर नहीं है। मंगलवार को 511 रुपया प्रति क्विंटल की दर से आलू बिका है।
आलू किसानों की दुर्दशा को देखते हुए भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सीतारमण व कृषि मंत्री
राधामोहन से फर्रुखाबादी आलू के निर्यात का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए दोनों विभागों से हरी झंडी मिल गई है। अब केंद्रीय टीम यहां के आलू की गुणवत्ता का परीक्षण करने आएगी। सांसद खुद केंद्रीय एग्रीकल्चर कमेटी के सदस्य हैं। कमेटी के बाकी सदस्य पूर्व मंत्री हुकुमनरायन सिंह यादव, सांसद विनय कटियार, पूर्व मुख्यमंत्री यदुरप्पा ने भी फर्रुखाबादी आलू के निर्यात को केंद्रीय कृषि मंत्री से मांग की है।
सांसद ने बताया कि देश की आईटीसी एग्रो के वाइस प्रेसीडेंट अनिल राजपूत से भी आलू आधारित उद्योग लगाने की बातचीत चल रही है। इसके अलावा जिले में आलू पर आधारित फैक्ट्री की भी पैरवी की जा रही है।
फर्रुखाबादी आलू बंगाल, बिहार, उत्तरांचल, छत्तीसगढ़, असम, दिल्ली व प्रदेश की अन्य मंडियों में पहुंच रहा है।
जिले में 36 हजार हेक्टेयर रकबा में आलू की बुवाई होती है। इस वर्ष करीब 12 लाख मीट्रिक टन आलू पैदावार की संभावना है। अगैती फसल में देश के सभी बड़े राज्यों को आलू की आपूर्ति करने के बावजूद यहां के किसान के हाथों में कुछ नहीं आता है। वर्ष 2013 में आलू बिक्री की स्थिति ठीक रही थी। इस साल किसान मुनाफा में रहे थे। व्यापारी सुधीर वर्मा उर्फ रिंकू,
राकेश राजपूत और सुरेंद्र सिंह पाल कहते हैं कि फर्रुखाबादी आलू की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार हुआ है। ठोस पहल न होने से आलू पर आधारित कोई भी उद्योग जिले में नहीं लगाया जा सका। गैर प्रांतों की मंडियों में आलू भेजना रिस्क का काम है। व्यापारी वहां अपने जोखिम पर आलू भेजता है। कभी भाव गिर जाने से लोडिंग का भाड़ा तक नहीं निकलता।
बीते सालों में ये रही पैदावार
वर्ष 2009-2010 में साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2010-11 में साढ़े दस लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2011-12 में करीब 11 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2012-13 में 11 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2013-14 में करीब साढ़े 11 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।