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अधजले आलू से बच्चे भर रहे पेट
ब्यूरो/ अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Mon, 13 Apr 2015 12:08 AM IST
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गांव इकलहरा में लगी भीषण आग से ग्रामीण टूट गए हैं।
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यहां के लोगों के सामने बच्चों के पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है। दूसरे
दिन रविवार को पीड़ित ग्रामीण सिर छिपाने के लिए आशियाना बनाते नजर आए। भूख
से बिलबिलाते बच्चों ने आग से जले आलू खाकर पेट की आग बुझाई।
गांव में किसी के पहुंचने पर ग्रामीण उम्मीदों भरी निगाहों से देखते थे। पीड़ितों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि एसडीएम साहब कोटेदार को चावल देने की बात कहकर गए थे। अभी तक चावल नहीं दिए गए। जनप्रतिनिधि तो झांकने तक नहीं आई और न ही उन्हें कोई आर्थिक सहायता मिली है।
रविवार को इकलहरा में लगी आग से 33 लोगों की गृहस्थी स्वाहा हो गई थी। पीड़ित राजबानो पत्नी अच्छन ने बताया कि पांच बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अनाज का एक भी दाना नहीं बचा है। इधर-उधर से जुगाड़ कर बच्चों का पेट भरा है।
अब यह चिंता है कि कल कहां से बच्चों को भोजन देंगी। बिस्तर तक जल गए। रिहाना पत्नी करू ने बताया कि मुआवजे की तो छोड़ो, कोई झांकने तक नहीं आया। करू ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था। अब इतना पैसा नहीं है कि मोमिया खरीद सके। रेहाना के बच्चे आग में जले आलू के पैकेट से अधभुने आलू बीन-बीनकर खा रहे थे।
रेहाना बेगम ने रोते हुए बताया कि खाने को कुछ बचा ही नहीं है। आलू से ही बच्चों का पेट भर रही है। हसरत अली ने बताया कि एसडीएम कायमगंज निरीक्षण करने आए थे। अग्निपीड़ितों से बातचीत कर आर्थिक मदद का भरोसा देकर चले गए।
एसडीएम ने कोटेदार राजेश्वर सिंह को निर्देश दिए थे कि 10-10 किलो चावल अग्निपीड़ितों को दिए जाएं, लेकिन अभी तक कोटेदार ने चावल नहीं दिए हैं। अच्छन, सलमान और रसीद ने बताया कि कटरी से पतेल काटकर लाए हैं। इसी से रहने के लिए छप्पर बनाएंगे।
इकलहरा में लगी आग में फंसे दुधमुंहे बच्चे को बचाने के प्रयास में झुलसी मां को सीएचसी में भर्ती कराया गया। तहसीलदार ने सुबह से भूखी मां के खाने और बच्चे के कपड़ों की व्यवस्था की पर डाक्टर को तरस नहीं आया। उसने दवा बाहर से खरीदने को लिख दी।
शिकायत पर तहसीलदार भड़क गए। डाक्टर को अपने पास से दवाएं खरीदने के निर्देश दिए। शनिवार को कंपिल थाना क्षेत्र के तराई में स्थित गांव इकलहरा में 33 झोपड़ियां जल गई थीं। रियाजुद्दीन की पत्नी हाजरा छह माह के दुधमुंहे बेटे इमामुलहक को बचाने के प्रयास में झुलस गई थी।
उसे रविवार को सीएचसी में लाकर भर्ती कराया गया। चुटहिल लल्ला बाबू और शहनाज को भी भर्ती कराया गया। सीएचसी में इलाज के नाम पर मामूली दवा लगाकर डाक्टर ने बाकी दवाएं बाजार से लाने को कहा। पति रियाजुद्दीन ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं हैं।
दवा बाजार से कैसे लाएगा। यह भी बताया कि उसने 24 घंटे से कुछ भी खाया-पीया भी नहीं है। बाहर से दवा मंगाने की शिकायत किसी ने एसडीएम से कर दी। एसडीएम बीडी वर्मा ने तुरंत तहसीलदार विनोद जोशी को सीएचसी भेजा। तहसीलदार ने डाक्टर को अपने पास से दवा बाजार से मंगाने के निर्देश दिए।
इस पर डाक्टर ने सीएचसी से दवा देकर इलाज किया। तहसीलदार ने हाजरा को एक दिन सीएचसी रोकने के निर्देश दिए। साथ ही अपने कर्मचारी को 500 रुपये देकर खाने-पीने और बच्चे के कपड़ों की व्यवस्था करने को कहा।
गांव में किसी के पहुंचने पर ग्रामीण उम्मीदों भरी निगाहों से देखते थे। पीड़ितों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि एसडीएम साहब कोटेदार को चावल देने की बात कहकर गए थे। अभी तक चावल नहीं दिए गए। जनप्रतिनिधि तो झांकने तक नहीं आई और न ही उन्हें कोई आर्थिक सहायता मिली है।
रविवार को इकलहरा में लगी आग से 33 लोगों की गृहस्थी स्वाहा हो गई थी। पीड़ित राजबानो पत्नी अच्छन ने बताया कि पांच बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अनाज का एक भी दाना नहीं बचा है। इधर-उधर से जुगाड़ कर बच्चों का पेट भरा है।
अब यह चिंता है कि कल कहां से बच्चों को भोजन देंगी। बिस्तर तक जल गए। रिहाना पत्नी करू ने बताया कि मुआवजे की तो छोड़ो, कोई झांकने तक नहीं आया। करू ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था। अब इतना पैसा नहीं है कि मोमिया खरीद सके। रेहाना के बच्चे आग में जले आलू के पैकेट से अधभुने आलू बीन-बीनकर खा रहे थे।
रेहाना बेगम ने रोते हुए बताया कि खाने को कुछ बचा ही नहीं है। आलू से ही बच्चों का पेट भर रही है। हसरत अली ने बताया कि एसडीएम कायमगंज निरीक्षण करने आए थे। अग्निपीड़ितों से बातचीत कर आर्थिक मदद का भरोसा देकर चले गए।
एसडीएम ने कोटेदार राजेश्वर सिंह को निर्देश दिए थे कि 10-10 किलो चावल अग्निपीड़ितों को दिए जाएं, लेकिन अभी तक कोटेदार ने चावल नहीं दिए हैं। अच्छन, सलमान और रसीद ने बताया कि कटरी से पतेल काटकर लाए हैं। इसी से रहने के लिए छप्पर बनाएंगे।
इकलहरा में लगी आग में फंसे दुधमुंहे बच्चे को बचाने के प्रयास में झुलसी मां को सीएचसी में भर्ती कराया गया। तहसीलदार ने सुबह से भूखी मां के खाने और बच्चे के कपड़ों की व्यवस्था की पर डाक्टर को तरस नहीं आया। उसने दवा बाहर से खरीदने को लिख दी।
शिकायत पर तहसीलदार भड़क गए। डाक्टर को अपने पास से दवाएं खरीदने के निर्देश दिए। शनिवार को कंपिल थाना क्षेत्र के तराई में स्थित गांव इकलहरा में 33 झोपड़ियां जल गई थीं। रियाजुद्दीन की पत्नी हाजरा छह माह के दुधमुंहे बेटे इमामुलहक को बचाने के प्रयास में झुलस गई थी।
उसे रविवार को सीएचसी में लाकर भर्ती कराया गया। चुटहिल लल्ला बाबू और शहनाज को भी भर्ती कराया गया। सीएचसी में इलाज के नाम पर मामूली दवा लगाकर डाक्टर ने बाकी दवाएं बाजार से लाने को कहा। पति रियाजुद्दीन ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं हैं।
दवा बाजार से कैसे लाएगा। यह भी बताया कि उसने 24 घंटे से कुछ भी खाया-पीया भी नहीं है। बाहर से दवा मंगाने की शिकायत किसी ने एसडीएम से कर दी। एसडीएम बीडी वर्मा ने तुरंत तहसीलदार विनोद जोशी को सीएचसी भेजा। तहसीलदार ने डाक्टर को अपने पास से दवा बाजार से मंगाने के निर्देश दिए।
इस पर डाक्टर ने सीएचसी से दवा देकर इलाज किया। तहसीलदार ने हाजरा को एक दिन सीएचसी रोकने के निर्देश दिए। साथ ही अपने कर्मचारी को 500 रुपये देकर खाने-पीने और बच्चे के कपड़ों की व्यवस्था करने को कहा।