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मौसम की मार से आलू का 20 प्रतिशत उत्पादन घटा
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गांव सिंधौली में झुलसा से बर्बाद आलू की फसल। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। करीब 20 दिन से बिगड़े मौसम से सभी फसलों पर प्रभाव पड़ा है। झुलसा रोग लगने से आलू की फसल नष्ट हो गई है। इससे 20 फीसदी उत्पादन घटना तय माना जा रहा है। सोमवार को उप कृषि निदेशक ने क्षेत्र का भ्रमण कर फसलों में नुकसान की जानकारी ली।
जिले में पांच जनवरी से मौसम का मिजाज बिगड़ गया। इसके बाद 22 जनवरी तक एक-दो दिन छोड़कर धूप के दर्शन तक नहीं हुए। तीन-चार दिन बारिश भी हुई। इससे आलू की फसल में इस कदर झुलसा रोग लगा कि पौधे ही सूख गए। सरसों, गेहूं व हरी सब्जी की फसलें भी खासी प्रभावित हुईं। जिला कृषि अधिकारी राजकुमार ने नवाबगंज क्षेत्र के गांव नगला बारंग सहित कई गांवों में फसलों का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि किसानों से बातचीत में आलू की फसल में करीब 15 से 20 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी मिली है। सरसों व गेहूं की फसलों में कोई खास नुकसान नहीं हैं। बताया जिन किसानों का फसल बीमा है, उन्हें बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा मिलेगा। सरसों व गेहूं की फसलों में मार्च-अप्रैल में उत्पादन के आधार पर नुकसान का आंकलन किया जाएगा। जिले में ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल आपदा राहत कोष से किसानों को मुआवजा मिलने की संभावना नहीं है।
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कमालागंज। कई दिनों से खराब मौसम के कारण आलू की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बारिश व कोहरा से झुलसा व परपरा रोग फैला है। इससे आलू की बेल में पत्तियां पीली हो गई हैं। अधिक प्रकोप वाले पौधों के डंठल भी झुलस गए हैं।
करीब 25 दिन से बादल, कोहरा व बूंदाबांदी से आलू की फसल पर परपरा रोग व झुलसा का कहर है। सफेद किस्म के पुखराज व ख्याती आदि की फसल कम दिनों में तैयार होती है। इसके कारण इस किस्म की फसल को अधिक नुकसान नहीं पहुंचा है। इनके पौधों में आलू लगभग पूरे आकार में आ चुका है। इसमें चेचक लगने की ही आशंका है। वहीं सबसे ज्यादा नुकसान चिपसोना में है।
इस किस्म की फसल में पौधों के नीचे कुड़ी में आलू बनकर अभी बढ़ना शुरू हुआ है। इसकी फसल तैयार होकर पकने में अभी करीब डेढ़ माह लगेगा। हालैंड व लाल गुलाल जैसी अधिक दिनों की प्रजाति वाली आलू की फसल को भी झुलसा से काफी नुकसान हुआ है। पट्टीकतरौली, सिंधौली, सदरियापुर, पूरनपुर, कैंटहा, पहला, गगनी, दरौरा आदि गांव में भी नुकसान से किसान सदमे में हैं।
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जिले में पांच जनवरी से मौसम का मिजाज बिगड़ गया। इसके बाद 22 जनवरी तक एक-दो दिन छोड़कर धूप के दर्शन तक नहीं हुए। तीन-चार दिन बारिश भी हुई। इससे आलू की फसल में इस कदर झुलसा रोग लगा कि पौधे ही सूख गए। सरसों, गेहूं व हरी सब्जी की फसलें भी खासी प्रभावित हुईं। जिला कृषि अधिकारी राजकुमार ने नवाबगंज क्षेत्र के गांव नगला बारंग सहित कई गांवों में फसलों का निरीक्षण किया।
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उन्होंने बताया कि किसानों से बातचीत में आलू की फसल में करीब 15 से 20 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी मिली है। सरसों व गेहूं की फसलों में कोई खास नुकसान नहीं हैं। बताया जिन किसानों का फसल बीमा है, उन्हें बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा मिलेगा। सरसों व गेहूं की फसलों में मार्च-अप्रैल में उत्पादन के आधार पर नुकसान का आंकलन किया जाएगा। जिले में ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल आपदा राहत कोष से किसानों को मुआवजा मिलने की संभावना नहीं है।
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कमालागंज। कई दिनों से खराब मौसम के कारण आलू की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बारिश व कोहरा से झुलसा व परपरा रोग फैला है। इससे आलू की बेल में पत्तियां पीली हो गई हैं। अधिक प्रकोप वाले पौधों के डंठल भी झुलस गए हैं।
करीब 25 दिन से बादल, कोहरा व बूंदाबांदी से आलू की फसल पर परपरा रोग व झुलसा का कहर है। सफेद किस्म के पुखराज व ख्याती आदि की फसल कम दिनों में तैयार होती है। इसके कारण इस किस्म की फसल को अधिक नुकसान नहीं पहुंचा है। इनके पौधों में आलू लगभग पूरे आकार में आ चुका है। इसमें चेचक लगने की ही आशंका है। वहीं सबसे ज्यादा नुकसान चिपसोना में है।
इस किस्म की फसल में पौधों के नीचे कुड़ी में आलू बनकर अभी बढ़ना शुरू हुआ है। इसकी फसल तैयार होकर पकने में अभी करीब डेढ़ माह लगेगा। हालैंड व लाल गुलाल जैसी अधिक दिनों की प्रजाति वाली आलू की फसल को भी झुलसा से काफी नुकसान हुआ है। पट्टीकतरौली, सिंधौली, सदरियापुर, पूरनपुर, कैंटहा, पहला, गगनी, दरौरा आदि गांव में भी नुकसान से किसान सदमे में हैं।