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कर्बला पर ज्यारत को लेकर पुलिस तीखी नोकझोंक, तालाबंदी
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फर्रुखाबाद। कर्बला पर जियारत करने को लेकर मुतबल्ली शोबी बख्श के भाई दीपू की पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई। दीपू अपने साथ पांच लोगों को अंदर ले जाना चाहते थे। बाद में वे अकेले अंदर गए और जियारत की। पुलिस ने मेहंदी भी कर्बला की ओर ले जाने की अनुमति नहीं दी। मोहर्रम के जुलूस पर पाबंदी होने से चिलसरा रोड, चौराहों-तिराहों पर पुलिस का सख्त पहरा रहा।
सुबह साढ़े नौ बजे चिलसरा रोड स्थित कर्बला के मुतबल्ली शोबी बख्श के भाई दीपू बख्श पांच लोगों के साथ कर्बला पहुंचकर गेट खोलने लगे। तैनात रायपुर चौकी प्रभारी स्वदेश कुमार ने उन्हें ताला खोलने से रोक दिया। सबके साथ अंदर जाने की इच्छुक दीपू ने विरोध किया। इस पर चौकी प्रभारी सख्त हो गए। मामला बिगड़ता देख दीपू ने अकेले अंदर जाकर जियारत की और लौट गए। कुछ लोग खेतों के रास्ते होकर कर्बला के पिछवाड़े पहुंचे और खेतों में इबादत करते दिखे। पुलिस ने उन्हें भी लौटा दिया। कर्बला के गेट पर ताला डाल दिया गया। इसके बाद पुलिस ने किसी को ढुइयां मोड़ पार नहीं करने दिया। जुलूस पर पाबंदी से लोगों ने घरों में इमाम हुसैन की याद में मातम किया। जिले की सुरक्षा व्यवस्था में एएसपी अजय प्रताप सिंह, सीओ सिटी मन्नीलाल गौंड, कोतवाल वेदप्रकाश पांडेय, मऊदरवाजा इंस्पेक्टर जेपी शर्मा ने संभाली।
कर्बला में न सजे फूलों के झूले
मुस्लिम शिया खवातीने मोहर्रम के दिन अलम जुलूस के पीछे सिर पर असगर का झूला लेकर आती थी। मातम के साथ अली असगर का झूला जैसे ही कर्बला पहुंचता, हर कोई गमजदा हो जाता था। खवातीने मजलिस का एहतमाम करतीं थीं, लोग अली असगर और इमाम हुसैन की याद में आंसू बहाने लगते थे। मातम सुबह नौ बजे से शुरू होकर आधी रात के बाद तक चलता था। कोविड की वजह से इस बार ऐसा नहीं हो सका।
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मायूस होकर लौटे
शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी, मुन्तजार हुसैन, आफताब हुसैन, सैफ अली छह बाइकों पर सवार होकर गलियों से गुजरते हुए रकाबगंज पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें रोक। इसके बाद मौलाना फरहत अली जैदी अकेले ढुइयां तक गए। वहां भी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। मौलाना ने सीओ सिटी से मोबाइल पर इबादत करने जाने की अनुमति मांगी, लेकिन नहीं मिली। वे मायूस होकर लौट गए। उन्होंने प्रतिबंध पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कहा कि यह पुलिस की ज्यादती है। पीस कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि पांच-पांच की शक्ल में जाने की इजाजत होगी। भीड़ नहीं लगेगी। आदेशों का पालन किया गया। मगर कर्बला नहीं जाने दिया गया। यह अन्याय है।
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सुबह साढ़े नौ बजे चिलसरा रोड स्थित कर्बला के मुतबल्ली शोबी बख्श के भाई दीपू बख्श पांच लोगों के साथ कर्बला पहुंचकर गेट खोलने लगे। तैनात रायपुर चौकी प्रभारी स्वदेश कुमार ने उन्हें ताला खोलने से रोक दिया। सबके साथ अंदर जाने की इच्छुक दीपू ने विरोध किया। इस पर चौकी प्रभारी सख्त हो गए। मामला बिगड़ता देख दीपू ने अकेले अंदर जाकर जियारत की और लौट गए। कुछ लोग खेतों के रास्ते होकर कर्बला के पिछवाड़े पहुंचे और खेतों में इबादत करते दिखे। पुलिस ने उन्हें भी लौटा दिया। कर्बला के गेट पर ताला डाल दिया गया। इसके बाद पुलिस ने किसी को ढुइयां मोड़ पार नहीं करने दिया। जुलूस पर पाबंदी से लोगों ने घरों में इमाम हुसैन की याद में मातम किया। जिले की सुरक्षा व्यवस्था में एएसपी अजय प्रताप सिंह, सीओ सिटी मन्नीलाल गौंड, कोतवाल वेदप्रकाश पांडेय, मऊदरवाजा इंस्पेक्टर जेपी शर्मा ने संभाली।
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कर्बला में न सजे फूलों के झूले
मुस्लिम शिया खवातीने मोहर्रम के दिन अलम जुलूस के पीछे सिर पर असगर का झूला लेकर आती थी। मातम के साथ अली असगर का झूला जैसे ही कर्बला पहुंचता, हर कोई गमजदा हो जाता था। खवातीने मजलिस का एहतमाम करतीं थीं, लोग अली असगर और इमाम हुसैन की याद में आंसू बहाने लगते थे। मातम सुबह नौ बजे से शुरू होकर आधी रात के बाद तक चलता था। कोविड की वजह से इस बार ऐसा नहीं हो सका।
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मायूस होकर लौटे
शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी, मुन्तजार हुसैन, आफताब हुसैन, सैफ अली छह बाइकों पर सवार होकर गलियों से गुजरते हुए रकाबगंज पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें रोक। इसके बाद मौलाना फरहत अली जैदी अकेले ढुइयां तक गए। वहां भी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। मौलाना ने सीओ सिटी से मोबाइल पर इबादत करने जाने की अनुमति मांगी, लेकिन नहीं मिली। वे मायूस होकर लौट गए। उन्होंने प्रतिबंध पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कहा कि यह पुलिस की ज्यादती है। पीस कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि पांच-पांच की शक्ल में जाने की इजाजत होगी। भीड़ नहीं लगेगी। आदेशों का पालन किया गया। मगर कर्बला नहीं जाने दिया गया। यह अन्याय है।