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मोदी के आदेश ने रोकी आलू बुवाई की रफ्तार

Sun, 13 Nov 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद Updated Sun, 13 Nov 2016 11:37 PM IST
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pm stopped by order of the speed of sowing potatoes
पंजाब में खेती और उत्पादन पर मॉनसून का असर - फोटो : फाइल फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 500 व 1000 का नोट बंद करने का निर्णय किसानों पर भारी पड़ रहा है। आलू बुवाई के लिए बीज तैयार होने के बाद भी किसान नोट बंद होने से खाद नहीं खरीद पा रहा है। अधिकांश किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं। संकट में अन्नदाता क्या करे। यह उसके समझ नहीं आ रहा है।
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उद्योग शून्य जिले में आलू की खेती इकलौता सहारा है। अधिकांश किसान 50 से 100 बीघा तक आलू पैदा करते हैं। अचानक नोट बंद होने से किसानों को खाद और कीटनाशक औषधियां खरीदना भारी पड़ रहा है। घारमपुर के सर्वेंद्र सिंह का कहना है कि वह 50 बीघा खेत में आलू बोने की तैयारी थी। बीज तैयार है, खाद के लिए उन्होंने जो पैसे जुटाए थे। वह एकाएक बंद होने से वह खाद नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना है कि 50 बीघा खेत में बीज को छोड़कर 52 हजार रुपये की डीएपी 50 बोरी, 20 बोरी पोटास 10 हजार रुपये, भूमि शोधन के लिए फ्योराडॉन दवा 5000, सल्फर 30 किलो 3000 रुपये, बायोजाइम 30 हजार रुपये, बुवाई की मजदूरी 15000 रुपये। खाद व दवा का कुल 88000 रुपये खर्च आता है। इसके एवज में बैंक 4000 रुपये दे रहा है। खाद न होने के कारण किसानों की आलू की फसल पिछाई हो रही है और यदि आठ दिन का और वक्त लग गया तो बीज भी सड़ जाएगा। किसानों ने कर्ज लेकर तैयार किए बीज के सड़ने से अन्नदाता करोड़ों के कर्ज में डूब जाएगा। यही हाल किसान संजू ठाकुर का है। उनका कहना है कि कर्ज लेकर बीज खरीदा। आलू तैयार किए। अब हालात यह हैं कि खाद न मिलने पर अपना आलू नहीं बो सकेगा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय ने किसानों को भारी झटका दिया है। मौजूदा समय में आलू और रबी दोनों की बुवाई चल रही है, जिसके लिए खाद खरीदने के लिए किसानों के पास पैसा नहीं रहा है। विकास खंड मोहम्मदाबाद के गांव मौधा के रहने वाले किसान धर्म सिंह का कहना है कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपनी फसलों में खाद लगा सके। खाद के दुकानदारों ने उधार देने से साफ मना कर दिया है। किसानों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोज मजदूरी करके खाने वाले मजदूरों को मजदूरी तो मिल रही है लेकिन बड़े किसान उन्हें 1000 और 500 का नोट दिखा रहे हैं, जो कि चलन से बाहर हो गए हैं। यही कहना आलू निर्यात समिति के सदस्य नारद सिंह कश्यप व न्यामतपुर के ग्राम प्रधान मुनेश्वर सिंह का है। उनका कहना है कि फैसला गलत समय पर लिया गया है। इस समय किसानों को सर्वाधिक पैसे की जरूरत होती है।
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