{"_id":"580f94904f1c1b944ebc2982","slug":"patients-with-serious-illnesses-are-simple-return","type":"story","status":"publish","title_hn":"साधारण रोगी भी गंभीर बीमारियां लेकर लौट रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साधारण रोगी भी गंभीर बीमारियां लेकर लौट रहे
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Tue, 25 Oct 2016 10:51 PM IST
विज्ञापन
फोटो- 40, लोहिया अस्पताल में खून की जांच कराने को लगी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में साधारण रोगों की दवा लेने आए रोगी बड़ी बीमारियां लेकर लौट रहे हैं। मामूली से जख्म की मरहम-पट्टी कराने आए लोग सैप्टिक व गैंगिंग के शिकार हो रहे हैं। यहां व्याप्त गंदगी के चलते जिले के आलाधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बायोवेस्ट कचरे को बोरियों में भरकर वार्ड में ही रख दिया जाता है। सफाईकर्मी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सबसे ज्यादा गंदगी महिला यूनिट में है। यहां कुत्ते सरेआम घूमते हैं। गंदगी के वार्डों में अंबार लगे हैं। यही हाल कमोवेश लोहिया के पुरुष चिकित्सालय का है।
यहां शौचालयों से मलमूत्र बहकर वार्डों में पहुंच रहा है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो इमरजेंसी वार्ड का है। इस संबंध में जब महिला यूनिट की चिकित्साधीक्षक डा. सरोजबाला सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में ठेका होने के कारण सफाई कर्मचारी उनकी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
लोहिया अस्पताल का ठेका उठाने का काम मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन आता है। फिलहाल सीएमएस, सीएमओ और सीएमओ, सीएमएस पर टाल रहे हैं। इस टालमटोल के चलते लोहिया अस्पताल खुद बीमार है। डाक्टरों की कमी के चलते यहां मरीजों को भी ठीक से नहीं देखा जा रहा है।
खून की उल्टियां कर रहे रोगी बिना किसी देखरेख के वार्ड में पड़े हुए हैं। महिला अस्पताल में व्याप्त गंदगी के चलते सूबेदार सिंह की पुत्रवधू निवासी नगला जसू को सैप्टिक हो गई और उसके टांके टूट गए। गंभीर अवस्था में उसे सैफई मेडिकल कालेज ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई
इसी तरह से गुंजन निवासी नगला गुलाल को सैप्टिक हो गया। गंभीर अवस्था में उसे मेडिकल कालेज कानपुर रेफर किया गया। इसी तरह कई महिलाएं और पुरुष सैप्टिक का शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन
डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बायोवेस्ट कचरे को बोरियों में भरकर वार्ड में ही रख दिया जाता है। सफाईकर्मी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सबसे ज्यादा गंदगी महिला यूनिट में है। यहां कुत्ते सरेआम घूमते हैं। गंदगी के वार्डों में अंबार लगे हैं। यही हाल कमोवेश लोहिया के पुरुष चिकित्सालय का है।
विज्ञापन
यहां शौचालयों से मलमूत्र बहकर वार्डों में पहुंच रहा है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो इमरजेंसी वार्ड का है। इस संबंध में जब महिला यूनिट की चिकित्साधीक्षक डा. सरोजबाला सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में ठेका होने के कारण सफाई कर्मचारी उनकी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
लोहिया अस्पताल का ठेका उठाने का काम मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन आता है। फिलहाल सीएमएस, सीएमओ और सीएमओ, सीएमएस पर टाल रहे हैं। इस टालमटोल के चलते लोहिया अस्पताल खुद बीमार है। डाक्टरों की कमी के चलते यहां मरीजों को भी ठीक से नहीं देखा जा रहा है।
खून की उल्टियां कर रहे रोगी बिना किसी देखरेख के वार्ड में पड़े हुए हैं। महिला अस्पताल में व्याप्त गंदगी के चलते सूबेदार सिंह की पुत्रवधू निवासी नगला जसू को सैप्टिक हो गई और उसके टांके टूट गए। गंभीर अवस्था में उसे सैफई मेडिकल कालेज ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई
इसी तरह से गुंजन निवासी नगला गुलाल को सैप्टिक हो गया। गंभीर अवस्था में उसे मेडिकल कालेज कानपुर रेफर किया गया। इसी तरह कई महिलाएं और पुरुष सैप्टिक का शिकार हो रहे हैं।