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Farrukhabad News: मरीजों की नहीं हो रही जांच लाखों की सामग्री डंप
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फर्रुखाबाद। शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व आरोग्य मंदिरों में लाखों रुपये की जांच सामग्री डंप है। एलटी की तैनाती न होने से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है।
शहर में 12 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ वेलनेस सेंटर) व छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर लाखों रुपये कीमत की 15 प्रकार की जांच सामग्री भेजी जाती है। इसमें एचबी स्टि्रप 500, ग्लूको स्टि्रप 1000, ब्लड ग्रुप जांच स्टि्रप 100-100, ग्लास स्लाइड 5000, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट 200, टाइफाइड रैपिड टेस्ट किट 200, यूरिन स्टि्रप 500 आदि शामिल हैं। हालात यह हैं कि सभी 12 हेल्थ वेलनेस सेंटरों में किसी पर एलटी की तैनाती नहीं है, जबकि डॉक्टर तैनात हैं।
इसके अलावा पीएचसी नवदिया व आईटीआई पर भी एलटी की तैनाती न होने से अलमारी में भरी लाखों रुपये की जांच सामग्री स्वास्थ्य इकाइयों की शोभा बढ़ा रही है। पीएचसी आईटीआई व नवदिया में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व एएनएम की तैनाती हाेने के बावजूद प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। प्रसव के लिए भी पूरी सामग्री, उपकरण व संसाधन भरे पड़े हैं।
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इन सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रतिदिन औसतन 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जांच किसी की भी नहीं होती है। इससे अलमारी में रखी लाखों रुपये की जांच सामग्री एक्सपायर होकर बर्बाद होना तय है।
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शहर में 12 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ वेलनेस सेंटर) व छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर लाखों रुपये कीमत की 15 प्रकार की जांच सामग्री भेजी जाती है। इसमें एचबी स्टि्रप 500, ग्लूको स्टि्रप 1000, ब्लड ग्रुप जांच स्टि्रप 100-100, ग्लास स्लाइड 5000, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट 200, टाइफाइड रैपिड टेस्ट किट 200, यूरिन स्टि्रप 500 आदि शामिल हैं। हालात यह हैं कि सभी 12 हेल्थ वेलनेस सेंटरों में किसी पर एलटी की तैनाती नहीं है, जबकि डॉक्टर तैनात हैं।
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इसके अलावा पीएचसी नवदिया व आईटीआई पर भी एलटी की तैनाती न होने से अलमारी में भरी लाखों रुपये की जांच सामग्री स्वास्थ्य इकाइयों की शोभा बढ़ा रही है। पीएचसी आईटीआई व नवदिया में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व एएनएम की तैनाती हाेने के बावजूद प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। प्रसव के लिए भी पूरी सामग्री, उपकरण व संसाधन भरे पड़े हैं।
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इन सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रतिदिन औसतन 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जांच किसी की भी नहीं होती है। इससे अलमारी में रखी लाखों रुपये की जांच सामग्री एक्सपायर होकर बर्बाद होना तय है।
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