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Farrukhabad News: पांचालघाट पुल की हालत बदतर, दिख रही सरिया
Sat, 12 Jul 2025 01:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:04 AM IST
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फर्रुखाबाद। शहर के पांचालघाट स्थित गंगा नदी पर बने पुल के नीचे से प्लास्टर उखड़ गया है, जिससे लोहे की गलीं हुईं सरिया और गाटर तक नजर आने लगे हैं। इससे यह आशंका गहराने लगी है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
इटावा-बरेली हाईवे पर स्थित इस पुल का निमार्ण वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 750 मीटर लंबाई में किया था। मौजूदा समय में गंगा में आई बाढ़ के कारण पुल की संरचना पर और अधिक दबाव बना है। ऐसे में मरम्मत के बावजूद पुल की स्थिति बदतर हो गई है। मार्च 2025 में इस पुल को मरम्मत के लिए लगभग एक माह तक बंद रखा गया। यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया था।
31 मार्च को पुल को दोबारा चालू किया गया, लेकिन मात्र तीन माह बाद ही पुल की हालत फिर से खराब हो गई। खुले ज्वाइंट, उधड़े सरिये और बाहर झांकते गाटर पुल की जर्जर स्थिति को दर्शा रहे हैं। पुल से प्रतिदिन लगभग 15 हजार बड़े वाहन गुजरते हैं। फर्रुखाबाद समेत पांच जिलों इटावा, कन्नौज, बरेली, शाहजहांपुर और हरदोई के वाहनों की आवाजाही इस पुल से होती है।
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ज्वाइंट भरने के लिए कार्यदायी संस्था ने कंक्रीट डाली। लेकिन यातायात के दबाव के चलते यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। हद तो तब हो गई, जब पुल के बीचोंबीच बड़ा गड्ढा भरने के लिए उसके ऊपर प्लाई रख दी गई। इसके ऊपर से गुजर रहे वाहन कभी भी फंस सकते हैं। हादसा होने के साथ ही जाम लगने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
सेना के लिए महत्वपूर्ण है पुल
सामरिक दृष्टि से यह पुल सेना के लिए भी महत्वपूर्ण है। नेपाल और चीन की सीमा पर तनाव होने पर यहां से सेना के जवान सीधे पहुंच सकते हैं। इस पुल के अतिरिक्त बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, हरदोई, पीलीभीत आदि के लिए जाने को कोई दूसरा आसान रास्ता नहीं है।
वर्जन
पुल अब एनएचएआई को हस्तांतरित हो चुका है। पुल की नीचे से सरिया दिखना गंभीर बात है। कार्यदायी संस्था को प्लास्टर आदि करवाकर मरम्मत करवानी चाहिए। पुल हस्तांतरण होने के बाद उनके विभाग के पास अब कोई अधिकार नहीं बचा है। -मुरलीधर, अधिशासी अभियंता
इनसेट
पुल की मरम्मत के लिए डीएम से मिलीं महिला व्यापारी
फर्रुखाबाद। महिला व्यापार मंडल की जिलाध्यक्ष सोनी शुक्ला की अगुवाई में बड़ी संख्या में महिला व्यापारी शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंची। उन्होंने जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी से मुलाकात की। उन्हें पत्र देकर कहा कि गंगा पुल की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह हैं। भारी वाहन गुजरते ही पुल हिलता है। सरिया व लोहे के गर्डर दिख रहे। वाहनों का अधिक आवागमन होने से हादसे से इनकार नहीं कर सकते। कई प्रदेशों में पुल गिरने से जानें जा चुकी हैं। ऐसे में पांचाल घाट पुल की मजबूती से मरम्मत करवाई जाए, ताकि अप्रिय घटना न हो। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही पांचाल घाट की मरम्मत और रेलवे रोड का सुंदरीकरण शुरू नहीं हुआ, तो महिला व्यापारी जन आंदोलन को मजबूर होंगी। इसमें महामंत्री हेमलता मिश्रा, यशोदा सिंह, सीता भदौरिया, अर्चना दुबे, शिल्पी दीक्षित, रेखा मिश्रा, अनीता शर्मा, प्रतिभा सिंह, माला कटियार, गीता कटियार, निशा गुप्ता, शालू मिश्रा, सीमा यादव, विनीता सिंह, रीता रस्तोगी, नेहा शाक्य, मेघा सक्सेना, रेनू दीक्षित आदि थीं।
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इटावा-बरेली हाईवे पर स्थित इस पुल का निमार्ण वर्ष 1971 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 750 मीटर लंबाई में किया था। मौजूदा समय में गंगा में आई बाढ़ के कारण पुल की संरचना पर और अधिक दबाव बना है। ऐसे में मरम्मत के बावजूद पुल की स्थिति बदतर हो गई है। मार्च 2025 में इस पुल को मरम्मत के लिए लगभग एक माह तक बंद रखा गया। यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया था।
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31 मार्च को पुल को दोबारा चालू किया गया, लेकिन मात्र तीन माह बाद ही पुल की हालत फिर से खराब हो गई। खुले ज्वाइंट, उधड़े सरिये और बाहर झांकते गाटर पुल की जर्जर स्थिति को दर्शा रहे हैं। पुल से प्रतिदिन लगभग 15 हजार बड़े वाहन गुजरते हैं। फर्रुखाबाद समेत पांच जिलों इटावा, कन्नौज, बरेली, शाहजहांपुर और हरदोई के वाहनों की आवाजाही इस पुल से होती है।
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ज्वाइंट भरने के लिए कार्यदायी संस्था ने कंक्रीट डाली। लेकिन यातायात के दबाव के चलते यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। हद तो तब हो गई, जब पुल के बीचोंबीच बड़ा गड्ढा भरने के लिए उसके ऊपर प्लाई रख दी गई। इसके ऊपर से गुजर रहे वाहन कभी भी फंस सकते हैं। हादसा होने के साथ ही जाम लगने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
सेना के लिए महत्वपूर्ण है पुल
सामरिक दृष्टि से यह पुल सेना के लिए भी महत्वपूर्ण है। नेपाल और चीन की सीमा पर तनाव होने पर यहां से सेना के जवान सीधे पहुंच सकते हैं। इस पुल के अतिरिक्त बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, हरदोई, पीलीभीत आदि के लिए जाने को कोई दूसरा आसान रास्ता नहीं है।
वर्जन
पुल अब एनएचएआई को हस्तांतरित हो चुका है। पुल की नीचे से सरिया दिखना गंभीर बात है। कार्यदायी संस्था को प्लास्टर आदि करवाकर मरम्मत करवानी चाहिए। पुल हस्तांतरण होने के बाद उनके विभाग के पास अब कोई अधिकार नहीं बचा है। -मुरलीधर, अधिशासी अभियंता
इनसेट
पुल की मरम्मत के लिए डीएम से मिलीं महिला व्यापारी
फर्रुखाबाद। महिला व्यापार मंडल की जिलाध्यक्ष सोनी शुक्ला की अगुवाई में बड़ी संख्या में महिला व्यापारी शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंची। उन्होंने जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी से मुलाकात की। उन्हें पत्र देकर कहा कि गंगा पुल की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह हैं। भारी वाहन गुजरते ही पुल हिलता है। सरिया व लोहे के गर्डर दिख रहे। वाहनों का अधिक आवागमन होने से हादसे से इनकार नहीं कर सकते। कई प्रदेशों में पुल गिरने से जानें जा चुकी हैं। ऐसे में पांचाल घाट पुल की मजबूती से मरम्मत करवाई जाए, ताकि अप्रिय घटना न हो। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही पांचाल घाट की मरम्मत और रेलवे रोड का सुंदरीकरण शुरू नहीं हुआ, तो महिला व्यापारी जन आंदोलन को मजबूर होंगी। इसमें महामंत्री हेमलता मिश्रा, यशोदा सिंह, सीता भदौरिया, अर्चना दुबे, शिल्पी दीक्षित, रेखा मिश्रा, अनीता शर्मा, प्रतिभा सिंह, माला कटियार, गीता कटियार, निशा गुप्ता, शालू मिश्रा, सीमा यादव, विनीता सिंह, रीता रस्तोगी, नेहा शाक्य, मेघा सक्सेना, रेनू दीक्षित आदि थीं।