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Farrukhabad News: औरैया से आ रहा धान, चार दिन में 300 रुपये टूटा भाव
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कमालगंज। धान की फसल तैयार होने वाली है। इस बीच औरैया जिले के विभिन्न क्षेत्रों से धान की आमद कमालगंज मंडी में शुरू हो गई है। इससे शुरुआती दौर में ही चार दिन में धान का भाव करीब 300 रुपये क्विंटल टूट गया। मंगलवार को आढ़तियों ने किसानों का महीन बासमती वाला 1692 धान 3300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा।
किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बासमती धान के बढ़े भाव का फायदा सीधे उन्हें मिलेगा। पांच दिन पहले महीन धान 3600 रुपये प्रति क्विंटल बिका भी था, लेकिन मंगलवार को 3300 से 3400 रुपये क्विंटल तक ही किसानों को भाव मिला।
औरैया के बिधूना के किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि उनके खेत में साढ़े तीन क्विंटल बीघा के हिसाब से धान की पैदावार हुई है। पिछले साल जब किसानों की फसल मंडी में पहुंची तो धान में घनघोर मंदी का दौर था। कम रेट से किसान बुरी तरह मायूस हुए थे लेकिन दो माह बाद भाव आठ सौ से एक हजार रुपये क्विंटल तक बढ़ गए। इससे भड़सार करने वाले व्यापारियों को खासा फायदा हुआ।
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कन्नौज के उमर्दा के महादेव पुरवा निवासी किसान प्रकाश नारायण ने बताया कि औरैया में ज्यादातर कंबाइन मशीन से धान कटवाकर मंडी में लाया जा रहा है। उनके तीन बीघा खेत में 10 क्विंटल धान ही निकला। उन्होंने थ्रेसर या कंबाइन के बजाय छोटे गट्ठरों को झोर कर धान निकाला। तीन बीघा में 10 क्विंटल महीन धान हुआ। (संवाद)
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किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बासमती धान के बढ़े भाव का फायदा सीधे उन्हें मिलेगा। पांच दिन पहले महीन धान 3600 रुपये प्रति क्विंटल बिका भी था, लेकिन मंगलवार को 3300 से 3400 रुपये क्विंटल तक ही किसानों को भाव मिला।
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औरैया के बिधूना के किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि उनके खेत में साढ़े तीन क्विंटल बीघा के हिसाब से धान की पैदावार हुई है। पिछले साल जब किसानों की फसल मंडी में पहुंची तो धान में घनघोर मंदी का दौर था। कम रेट से किसान बुरी तरह मायूस हुए थे लेकिन दो माह बाद भाव आठ सौ से एक हजार रुपये क्विंटल तक बढ़ गए। इससे भड़सार करने वाले व्यापारियों को खासा फायदा हुआ।
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कन्नौज के उमर्दा के महादेव पुरवा निवासी किसान प्रकाश नारायण ने बताया कि औरैया में ज्यादातर कंबाइन मशीन से धान कटवाकर मंडी में लाया जा रहा है। उनके तीन बीघा खेत में 10 क्विंटल धान ही निकला। उन्होंने थ्रेसर या कंबाइन के बजाय छोटे गट्ठरों को झोर कर धान निकाला। तीन बीघा में 10 क्विंटल महीन धान हुआ। (संवाद)