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45 दिन बाद खुली कचहरी, देरी से शुरू हुई थर्मल स्क्रीनिंग

Fri, 08 May 2020 09:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 09:03 PM IST
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Open office after 45 days, delay in thermal screening
45 दिन बाद खुली कचहरी, थर्मल स्क्रीनिंग में देरी
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फर्रुखाबाद। उच्च न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को 45 दिन बाद कचहरी खुलने पर अधिकारी, कर्मचारी, वकील व वादकारी आने शुरू हो गए हैं। पहले दिन स्वास्थ्य कर्मियों के देर से आने से कई लोग बगैर थर्मल स्क्रीनिंग के ही परिसर में प्रवेश कर गए। इससे नोडल अधिकारी ने कचहरी खुलने से पहले स्वास्थ्य कर्मियों को भेजने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है।
लॉकडाउन में बंद कचहरी शुक्रवार से हाईकोर्ट के आदेश पर सुबह सात से खुल गई। कर्मचारी पौने सात बजे से आने लगे। गेट पर स्वास्थ्य कर्मी न होने से कई कर्मचारी थर्मल स्क्रीनिंग कराए बगैर प्रवेश कर गए। 7.15 बजे एंबुलेंस से एक कर्मचारी कचहरी गेट पर पहुंचे और फिर थर्मल स्क्रीनिंग शुरू की।
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सोशल डिस्टेंस बनाए रखने को जागरूक करने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। दो वकीलों का निधन होने से वकील न्यायिक कार्य से विरत रहे। पहले दिन काम नहीं हुआ। कोविड-19 नोडल अधिकारी अपर जिला जज हर्षवर्धन ने सीएमओ को पत्र भेजा है।
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इसमें पहले दिन थर्मल स्क्रीनिंग को स्वास्थ्य कर्मी के समय से न आने पर नाराजगी जताई है। आगे से कचहरी गेट पर दो स्वास्थ्य कर्मी समय से भेजने को कहा है। यही व्यवस्था कायमगंज सिविल जज कोर्ट गेट पर करने के आदेश दिए हैं।
ई-कोर्ट एप से देख सकते हैं मुकदमे की स्थिति
फर्रुखाबाद। कोरोना वायरस से बचाव को उच्च न्यायालय ने वकील और वादकारियों के लिए ई-कोर्ट एप लांच किया है। इस एप के माध्यम से कोर्ट में लगे वादों, कागजों की लिस्ट को वकील व वादकारी अपने मोबाइल पर देख सकते हैं। नोडल अधिकारी कंप्यूटर विशेष न्यायाधीश विजय कुमार गुप्ता प्रथम ने उच्च न्यायालय से आए आदेशों का पत्र बार एसोसिएशन के सूचना पट पर चस्पा कराया है। इसमें कहा गया कि सभी न्यायालयों से संबंधित नवीन वाद व प्रार्थना पत्र सीधे कंप्यूटर कक्ष में दिए जाएंगे।

इसमें वकील व वादकारी का पूरा विवरण और मोबाइल नंबर दर्ज होना अनिवार्य है। पंजीकृत होने के बाद संबंधित कोर्ट में नया वाद व प्रार्थना पत्र भेज दिया जाएगा। ई-कोर्ट एप से वकील व वादकारी मुकदमे की स्थिति देख सकते हैं। मुकदमे में लिखित बहस भी कंप्यूटर कक्ष में दी जाएगी। वहीं से संबंधित न्यायालय में भेज कर मुकदमे में दाखिल कराई जाएगी। जनपद न्यायालय की ई-मेल आईडी पर जमानत, अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, लिखित बहस एवं अन्य आवश्यक प्रार्थना को भी भेजा जा सकता है।
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