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अतिक्रमण होने से नाले की तरह दिख रही बूढ़ी गंगा

Sat, 29 Jan 2022 10:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 10:42 PM IST
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Old Ganga looking like a drain due to encroachment
कंपिल-अटैना मार्ग पर कारब मोड़ के पास बदहाल बूढ़ी गंगा। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
कंपिल। लाखों किसानों की जीवनदायिनी के जीवन पर ही संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कई स्थानों पर बूढ़ी गंगा (गंगा की उप धारा) लुप्तप्राय हो गई है। लोगों ने जगह-जगह इसके क्षेत्र को पाट कर खेतों में शामिल कर लिया है। इससे किसानों की फसलों को ही भरपूर पानी देने वाली इस नदी का स्वरूप एक छोटे नाले जैसा दिखने लगा है।
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जिला कासगंज के सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र से निकली करीब 45 किलोमीटर लंबी गंगा की उपधारा कारब गांव के आगे गंगा की मुख्य धारा में मिलती थी। बूढ़ी गंगा के पानी से कंपिल क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांव संतृप्त होते थे। किसानों के खेतों की सिंचाई का ये बड़ा साधन थी, लेकिन गंगा की इस उपधारा के आसपास हुए बालू खनन से खतरा पैदा हुआ। इससे आज बूढ़ी गंगा विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई।
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क्षेत्र के विनोद, रामसिंह, राजवीर आदि किसानों ने बताया कि गंगा की धारा का पानी फसलों के लिए अमृत था। पूरे साल इसमें पानी भरा रहता था। 20 वर्ष पूर्व तक बारिश व बाढ़ में बूढ़ी गंगा में उफान रहता था। छाती तक पानी होने से तैर कर बूढ़ी गंगा को पार करना पड़ता था। अब बूढ़ी गंगा को लोग पैदल ही पार कर जाते है।
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बारिश व बाढ़ के दिनों में कभी कभी पानी आ जाता है, जो सिंचाई के काम भी नहीं आता। बीडीओ मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनकी एक माह पूर्व तैनाती हुई है। मामला उनके संज्ञान में नहीं है। नदी के सीमांकन का काम राजस्व विभाग करेगा। वह नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने का प्रयास करेंगे।
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