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Farrukhabad News: कानपुर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत पांच विभागों के अफसरों ने की जांच, नमूने लिए

Sun, 20 Oct 2024 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2024 12:33 AM IST
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Officers of five departments including Pollution Control Board of Kanpur investigated and took samples.
फर्रुखाबाद। शहर से सटे भैरों घाट पर नाले के पानी में गंगा के मुहाने पर मरी लाखों मछलियों की अमर उजाला में खबर छपने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत पांच विभागों के अफसरों की टीम जांच करने पहुंची। तीन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए। शनिवार सुबह शहर में पानी की आपूर्ति के वक्त नाले के पानी का बहाव तेज होने पर अधिकांश मछलियां गंगा में बह गईं। फिर भी बड़ी संख्या में मरी मछलियां दिखाई दीं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के सहायक पर्यावरण अभियंता फरेश कुमार, सहायक वैज्ञानिक योगेंद्र द्विवेदी, अनु सहायक संजीव मिश्रा, योगेंद्र कुमार, गंगा प्रदूषण कंट्रोल यूनिट के सहायक परियोजना अभियंता सौरभ शुक्ला, प्रभारी डीसी दीक्षित, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार, मत्स्य विभाग के नारद राणा, नमामि गंगे की निहारिका पटेल की टीम नमामि गंगे घाट पहुंची। यहां से दो मोटर वोट से अधिकारी घाट के किनारे जल का निरीक्षण करते हुए भैरोंघाट पहुंचे। पर्यावरण विभाग की एक टीम ने अफसरों संग नाले का निरीक्षण किया, जबकि दूसरी टीम ने तीन स्थानों से नाले के पानी के नमूने लिए। इसके बाद अधिकारी मोटरवोट से नमामि गंगे घाट होकर नगर पालिका में ईओ को दफ्तर पहुंचे। वहां शाम तक निरीक्षण आख्या तैयार की जाती रही। सहायक पर्यावरण अभियंता फरेश कुमार ने बताया कि गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही नाले के पानी का बहाव ठहर गया। मछली मरने का कारण क्या रहा, इसका पता लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। प्रदूषित जल भी मरने का कारण हो सकता है। फिलहाल कुछ स्पष्ट कहना जल्दबाजी होगी।
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वहीं जलापूर्ति के वक्त नाले के पानी का तेज बहाव होने के कारण बड़ी संख्या में मछलियां गंगा की धार में बह गईं। हालांकि हजारों मछलियां अभी भी किनारों पर पड़ी दिख रही हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में पक्षी मछलियों को भोजन बनाते दिख रहे हैं। नीवलपुर के रामबाबू ने बताया कि वह रोजाना हनुमान गढ़ी के दर्शन करने आते हैं। दो दिन से मंदिर के पीछे नाले के पानी में लाखों मछलियां उतरा रही थीं। बहाव अधिक होने पर मछलियां गंगा में जा रही हैं।
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