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मेहनत से बच्चों को बनाया अफसर
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद
Updated Sun, 08 May 2016 12:28 AM IST
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कमलेश कुमारी शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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23 साल पहले कमलेश कुमारी शर्मा पर टूटा आपदाओं का पहाड़ भी उनकी कड़ी मेहनत के कारण बच्चों के भविष्य को नहीं रोक सका। पति के मरने के बाद इस मां ने बेजोड़ मेहनत कर अपने बच्चों को शिक्षित कर नौकरी पर लगा दिया। एक बेटा सैन्य अधिकारी तो दूसरा इंजीनियर है। तीन वर्ष की रही बेटी को भी शिक्षिका बनाकर अपने पैरों पर खड़ा कर दिया।
आवास विकास की रहने वाली कमलेश कुमारी शर्मा जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव की दास्तां का जिक्र करती हैं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। मूल रूप से खरहरा बटेश्वर तहसील व जिला आगरा की रहने वाली हैं। उनके पति आजाद कुमार शर्मा आरआरसी फतेहगढ़ में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे। 14 अक्तूबर 1993 को उनका निधन हो गया। उस समय दोनों बेटे अवधेश कुमार शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा और बेटी शिवानी सभी नाबालिग थे।
पति के मरने के बाद उन्हें आर्मी से जो पैसा मिला उससे उन्होंने सबसे पहले अपना मकान आवास विकास में बनवाया और इसके बाद बेटा अवधेश की शिक्षा-दीक्षा पूरी कराई। बीए करने के बाद अवधेश कुमार शर्मा सेना में भर्ती हो गए। उस समय उन्हें केवल 500 रुपये ही वेतन मिलते थे। इससे उनका अपना ही खर्च नहीं चल पाता था। लगभग 300 रुपये उनको पेंशन मिलती थी। इससे वह बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चे पूरे करने में असमर्थ थीं।
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इस पर गांव की चार बीघा खेती वह खुद संभालने लगीं। उससे जो पैसा मिलता उससे बच्चों की पढ़ाई कराने लगीं। रात-दिन मेहनत करने के बाद उन्होंने दूसरे बेटे अरविंद को भी केमिकल फैक्ट्री गुड़गांव में इंजीनियर बनवा दिया। मौजूदा समय में अवधेश कुमार शर्मा सेना भवन दिल्ली में नायब सूबेदार के रूप में कार्यरत हैं।
बेटी हिमानी को भी पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बना दिया है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य की खातिर उन्होंने अपने पति की मौत का मातम नहीं मनाया। वह बच्चों के भविष्य को संभालने में लग गईं। बेटों के अधिकारी बन जाने से वह प्रसन्न हैं लेकिन उन्हें जब 23 साल पुरानी यादें आ जाती हैं तो आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं।
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आवास विकास की रहने वाली कमलेश कुमारी शर्मा जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव की दास्तां का जिक्र करती हैं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। मूल रूप से खरहरा बटेश्वर तहसील व जिला आगरा की रहने वाली हैं। उनके पति आजाद कुमार शर्मा आरआरसी फतेहगढ़ में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे। 14 अक्तूबर 1993 को उनका निधन हो गया। उस समय दोनों बेटे अवधेश कुमार शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा और बेटी शिवानी सभी नाबालिग थे।
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पति के मरने के बाद उन्हें आर्मी से जो पैसा मिला उससे उन्होंने सबसे पहले अपना मकान आवास विकास में बनवाया और इसके बाद बेटा अवधेश की शिक्षा-दीक्षा पूरी कराई। बीए करने के बाद अवधेश कुमार शर्मा सेना में भर्ती हो गए। उस समय उन्हें केवल 500 रुपये ही वेतन मिलते थे। इससे उनका अपना ही खर्च नहीं चल पाता था। लगभग 300 रुपये उनको पेंशन मिलती थी। इससे वह बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चे पूरे करने में असमर्थ थीं।
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इस पर गांव की चार बीघा खेती वह खुद संभालने लगीं। उससे जो पैसा मिलता उससे बच्चों की पढ़ाई कराने लगीं। रात-दिन मेहनत करने के बाद उन्होंने दूसरे बेटे अरविंद को भी केमिकल फैक्ट्री गुड़गांव में इंजीनियर बनवा दिया। मौजूदा समय में अवधेश कुमार शर्मा सेना भवन दिल्ली में नायब सूबेदार के रूप में कार्यरत हैं।
बेटी हिमानी को भी पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बना दिया है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य की खातिर उन्होंने अपने पति की मौत का मातम नहीं मनाया। वह बच्चों के भविष्य को संभालने में लग गईं। बेटों के अधिकारी बन जाने से वह प्रसन्न हैं लेकिन उन्हें जब 23 साल पुरानी यादें आ जाती हैं तो आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं।