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ओबामा की भारत यात्रा अच्छे दिनों की शुरुआत- दलाईलामा
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 30 Jan 2015 11:21 PM IST
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संकिसा पहुंचे बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि ओबामा की भारत यात्रा से
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अच्छे दिनों की शुरुआत हुई है। जल्द ही दोनों देशों में इसका असर भी
दिखेगा। उन्होंने कहा कि हर प्रगतिशील और औद्योगिक देश भारत से रिश्ता
चाहता है। यही वजह है कि भारत से अमेरिका के साथ ही जापान भी दोस्ती का हाथ
बढ़ा रहा है।
धर्म गुरु दलाई लामा चार्टर प्लेन से मोहम्मदाबाद हवाई पट्टी पर उतरने के बाद कार से संकिसा पहुंचे। यहां बौद्ध स्तूप पर वंदना के बाद शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया। दलाई लामा के साथ करीब 800 अनुयायियों के बुद्धं शरणमं गच्छामि, बुद्धं शरणमं गच्छामि के समवेत स्वर गूंजे। महात्मा गांधी की शहादत की तारीख पर संकिसा पहुंचे दलाई लामा ने अनुयायियों के साथ तिब्बती परंपरा में बौद्ध स्तूप की पूजा की।
उन्होंने कहा कि वह गांधी से मिले नहीं लेकिन उनसे प्रभावित हैं। बुद्ध और गांधी ने अहिंसा का संदेश दिया। महात्मा गांधी भी बुद्ध से सहमत थे। गांधी की चाहत भारत के बाहर भी है। इसी रास्ते पर चलकर विश्व का कल्याण हो सकता है। विश्व को अहिंसा व शांति की चाहत है।
नेल्सन मंडेला व लूथरकिंग भी गांधी के अनुयायी थे। बातचीत के दौरान तिब्बती व अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए दलाईलामा ने कहा कि बुद्ध की जमीन पर आकर बेहद खुश हैं। उन्हाेंने कहा कि वह सभी लोगाें को वह अपना आशीर्वाद दे रहे हैं। सभी अच्छे से रहें, शांति से रहें। सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर रहें। सभी धर्म मानवता के लिए हैं। उन्हाेंने कहा कि वह 1960 में यहां आए थे। तब लोगाें से मुलाकात की थी।
धर्म गुरु दलाई लामा चार्टर प्लेन से मोहम्मदाबाद हवाई पट्टी पर उतरने के बाद कार से संकिसा पहुंचे। यहां बौद्ध स्तूप पर वंदना के बाद शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया। दलाई लामा के साथ करीब 800 अनुयायियों के बुद्धं शरणमं गच्छामि, बुद्धं शरणमं गच्छामि के समवेत स्वर गूंजे। महात्मा गांधी की शहादत की तारीख पर संकिसा पहुंचे दलाई लामा ने अनुयायियों के साथ तिब्बती परंपरा में बौद्ध स्तूप की पूजा की।
उन्होंने कहा कि वह गांधी से मिले नहीं लेकिन उनसे प्रभावित हैं। बुद्ध और गांधी ने अहिंसा का संदेश दिया। महात्मा गांधी भी बुद्ध से सहमत थे। गांधी की चाहत भारत के बाहर भी है। इसी रास्ते पर चलकर विश्व का कल्याण हो सकता है। विश्व को अहिंसा व शांति की चाहत है।
नेल्सन मंडेला व लूथरकिंग भी गांधी के अनुयायी थे। बातचीत के दौरान तिब्बती व अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए दलाईलामा ने कहा कि बुद्ध की जमीन पर आकर बेहद खुश हैं। उन्हाेंने कहा कि वह सभी लोगाें को वह अपना आशीर्वाद दे रहे हैं। सभी अच्छे से रहें, शांति से रहें। सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर रहें। सभी धर्म मानवता के लिए हैं। उन्हाेंने कहा कि वह 1960 में यहां आए थे। तब लोगाें से मुलाकात की थी।