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Farrukhabad News: अब फसलों की सेटेलाइट से होगी निगरानी
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फर्रुखाबाद। किसानों की हर फसल की अब सेटेलाइट से निगरानी होगी। सरकार के पोर्टल पर फसलों का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज होगा। 349 टीमें सर्वे कर फसलों की जियो टैगिंग करेंगी। इससे सरकार को उत्पादन की भी जानकारी रहेगी।
दैवीय आपदा में कई बार किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। कभी बाढ़ तो कभी अत्यधिक बारिश फसलों पर आफत बनकर टूटती है। ओलावृष्टि व सूखा भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। कई बार फसल बीमा योजना के तहत किसानों को किस्त भरने के बाद भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। उन्हें मुआवजे के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। दैवीय आपदा राहत कोष से मिलने वाला नुकसान का मुआवजा कई बार ऊंट के मुंह में जीरा के समान होता है। इन सब मुसीबतों से किसानों को अब छुटकारा मिल सकेगा। सरकार एग्री स्टैक योजना के तहत फसलों का डिजिटल क्राॅप सर्वे कराएगी। राजस्व व कृषि विभाग के कर्मचारी खेतों में जाकर प्रत्येक भूखंड की फसल का सर्वे करने के साथ जियो टैग करेंगे। इसके बाद फसलों का पूरा विवरण क्षेत्रफल और लोकेशन के साथ सरकार के पोर्टल पर फीड होगा। इसकी सेटेलाइट से निगरानी की जा सकेगी। दैवीय आपदा की स्थिति में सेटेलाइट के जरिए फसलों में होने वाले नुकसान का आसानी से आंकलन किया जा सकेगा। किसान को अपनी फसल का मुआवजा भी आसानी से मिल सकेगा।
योजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय जिला स्तरीय कमेटी गठित की गई है। इसमें सीडीओ उपाध्यक्ष प्रोजेक्ट ऑफिसर व उप कृषि निदेशक सचिव बनाए गए हैं। एडीएम, जिला कृषि अधिकारी, उद्यान अधिकारी, गन्ना अधिकारी, तीनों एसडीएम, तहसीलदार आदि शामिल किए गए हैं। तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई।
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उपकृषि निदेशक अनिल कुमार यादव ने बताया कि सर्वे व जियो टैगिंग के लिए जिले में 349 टीमें गठित की गई हैं। मास्टर ट्रेनर इन टीमों को प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। एक सप्ताह के अंदर मुख्यमंत्री द्वारा योजना का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही फसलों का सर्वे और जियो टैगिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे फसलों को सेटेलाइट के जरिए भी देखा जा सकेगा।
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दैवीय आपदा में कई बार किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। कभी बाढ़ तो कभी अत्यधिक बारिश फसलों पर आफत बनकर टूटती है। ओलावृष्टि व सूखा भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। कई बार फसल बीमा योजना के तहत किसानों को किस्त भरने के बाद भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। उन्हें मुआवजे के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। दैवीय आपदा राहत कोष से मिलने वाला नुकसान का मुआवजा कई बार ऊंट के मुंह में जीरा के समान होता है। इन सब मुसीबतों से किसानों को अब छुटकारा मिल सकेगा। सरकार एग्री स्टैक योजना के तहत फसलों का डिजिटल क्राॅप सर्वे कराएगी। राजस्व व कृषि विभाग के कर्मचारी खेतों में जाकर प्रत्येक भूखंड की फसल का सर्वे करने के साथ जियो टैग करेंगे। इसके बाद फसलों का पूरा विवरण क्षेत्रफल और लोकेशन के साथ सरकार के पोर्टल पर फीड होगा। इसकी सेटेलाइट से निगरानी की जा सकेगी। दैवीय आपदा की स्थिति में सेटेलाइट के जरिए फसलों में होने वाले नुकसान का आसानी से आंकलन किया जा सकेगा। किसान को अपनी फसल का मुआवजा भी आसानी से मिल सकेगा।
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योजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय जिला स्तरीय कमेटी गठित की गई है। इसमें सीडीओ उपाध्यक्ष प्रोजेक्ट ऑफिसर व उप कृषि निदेशक सचिव बनाए गए हैं। एडीएम, जिला कृषि अधिकारी, उद्यान अधिकारी, गन्ना अधिकारी, तीनों एसडीएम, तहसीलदार आदि शामिल किए गए हैं। तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई।
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उपकृषि निदेशक अनिल कुमार यादव ने बताया कि सर्वे व जियो टैगिंग के लिए जिले में 349 टीमें गठित की गई हैं। मास्टर ट्रेनर इन टीमों को प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। एक सप्ताह के अंदर मुख्यमंत्री द्वारा योजना का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही फसलों का सर्वे और जियो टैगिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे फसलों को सेटेलाइट के जरिए भी देखा जा सकेगा।