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निजी स्कूलों में एक भी बच्चे को नहीं मिला एडमिशन
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:29 PM IST
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वालों को उनका हक नहीं मिला। गरीब परिवार का एक भी बच्चा निजी स्कूल की
दहलीज तक नहीं पहुंच सका है। इसका कारण कान्वेंट स्कूल संचालकों का शिक्षा
विभाग के अफसरों पर दबाव बनाना माना जा रहा है। शिक्षा महकमे के अफसर अभी
तक यह तय नहीं कर पाए कि
कितने निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दायरे में हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक सर्वे ही नहीं किया। वर्ष 2013 से अभी तक फर्रुखाबाद में गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में एडमिशन की प्रगति शून्य है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम केे तहत सभी निजी स्कूलों को 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से निर्बल परिवारों के बच्चों को
दाखिला देना है। फर्रुखाबाद जिले की तस्वीर कुछ और ही है। गरीबों को उनका हक दिलाने में शिक्षा विभाग के अधिकारी सजग नजर नहीं आ रहे हैं। तभी खंड शिक्षा अधिकारियों ने जिले में मानकों के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की सूची तैयार नहीं की। जानकारों की मानें तो प्राइवेट स्कूलों का विभागीय अधिकारियों पर दबाव है। वह गरीब परिवार के बच्चों
को अपने विद्यालय में प्रवेश देना नहीं चाहते हैं। इसी से वर्ष 2013 से अभी तक शिक्षा विभाग के अफसर जिले में संचालित किसी भी निजी स्कूल में गरीब बच्चों का दाखिला नहीं करा पाए हैं। विभागीय अधिकारियों के पास जिले में कितने निजी स्कूल संचालित हैं, इसकी स्पष्ट रिपोर्ट तक नहीं है। 25 फीसदी सीटों पर दाखिला कराने में शिक्षा विभाग के अफसरों की
दिलचस्पी न होने के कारण जिले में शिक्षा अधिकार अधिनियम फेल हो गया है। इस कारण गरीब शिक्षा के अधिकार से काफी दूर हैं। गरीबों का यह अधिकार अफसरों की फाइलों में दब कर दम तोड़ रहा है।
बीईओ को पत्र लिखने तक निभाई जिम्मेदारी
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटो पर आर्थिक रूप से निर्बल बच्चों को दाखिला दिलाने की जिम्मेदारी जिले में कागजों पर निभाई गई। यही कारण है कि जिले में गरीब तबके के तमाम अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा का हक नहीं मिल सका।
2013 में आए थे चार आवेदन
शिक्षा का अधिकार पाने के लिए वर्ष 2013 में चार अभिभावकों ने बीएसए कार्यालय में आवेदन किया था। यह आवेदन विभागीय फाइलों में एक माह तक एक से दूसरे पटल पर घूमते रहे। बाद में मानकों में न आने का कारण बताकर आवेदन निरस्त कर दिए गए।
क्या कहते जिम्मेदार
अधिनियम के तहत गरीब तबके के बच्चों को निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटों पर दाखिला कराने में गंभीरता दिखाने को खंड शिक्षा अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा है। अगर कोई अभिभावक बीएसए कार्यालय में आवेदन करता है तो उसके बच्चे को निजी विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा। दबाव जैसी कोई बात नहीं है। - योगराज सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।
कितने निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दायरे में हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक सर्वे ही नहीं किया। वर्ष 2013 से अभी तक फर्रुखाबाद में गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में एडमिशन की प्रगति शून्य है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम केे तहत सभी निजी स्कूलों को 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से निर्बल परिवारों के बच्चों को
दाखिला देना है। फर्रुखाबाद जिले की तस्वीर कुछ और ही है। गरीबों को उनका हक दिलाने में शिक्षा विभाग के अधिकारी सजग नजर नहीं आ रहे हैं। तभी खंड शिक्षा अधिकारियों ने जिले में मानकों के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की सूची तैयार नहीं की। जानकारों की मानें तो प्राइवेट स्कूलों का विभागीय अधिकारियों पर दबाव है। वह गरीब परिवार के बच्चों
को अपने विद्यालय में प्रवेश देना नहीं चाहते हैं। इसी से वर्ष 2013 से अभी तक शिक्षा विभाग के अफसर जिले में संचालित किसी भी निजी स्कूल में गरीब बच्चों का दाखिला नहीं करा पाए हैं। विभागीय अधिकारियों के पास जिले में कितने निजी स्कूल संचालित हैं, इसकी स्पष्ट रिपोर्ट तक नहीं है। 25 फीसदी सीटों पर दाखिला कराने में शिक्षा विभाग के अफसरों की
दिलचस्पी न होने के कारण जिले में शिक्षा अधिकार अधिनियम फेल हो गया है। इस कारण गरीब शिक्षा के अधिकार से काफी दूर हैं। गरीबों का यह अधिकार अफसरों की फाइलों में दब कर दम तोड़ रहा है।
बीईओ को पत्र लिखने तक निभाई जिम्मेदारी
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटो पर आर्थिक रूप से निर्बल बच्चों को दाखिला दिलाने की जिम्मेदारी जिले में कागजों पर निभाई गई। यही कारण है कि जिले में गरीब तबके के तमाम अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा का हक नहीं मिल सका।
2013 में आए थे चार आवेदन
शिक्षा का अधिकार पाने के लिए वर्ष 2013 में चार अभिभावकों ने बीएसए कार्यालय में आवेदन किया था। यह आवेदन विभागीय फाइलों में एक माह तक एक से दूसरे पटल पर घूमते रहे। बाद में मानकों में न आने का कारण बताकर आवेदन निरस्त कर दिए गए।
क्या कहते जिम्मेदार
अधिनियम के तहत गरीब तबके के बच्चों को निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटों पर दाखिला कराने में गंभीरता दिखाने को खंड शिक्षा अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा है। अगर कोई अभिभावक बीएसए कार्यालय में आवेदन करता है तो उसके बच्चे को निजी विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा। दबाव जैसी कोई बात नहीं है। - योगराज सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।