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फर्रूखाबाद: 12 साल में बदले 10 अफसर पर नहीं की किसी ने कार्रवाई
Tue, 21 Feb 2023 01:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Tue, 21 Feb 2023 01:22 AM IST
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फतेहपुर। उद्योग विभाग के औद्योगिक क्षेत्रों के मामलों की गूंज बढ़ती ही जा रही है। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान को भूखंडों के आवंटन से लेकर निरस्त की प्रक्रिया के बाद कई अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इन 12 सालों में उद्योग उपायुक्त की कुर्सी पर 10 अधिकारी बैठे, लेकिन किसी ने कैबिनेट मंत्री के संस्थाओं के नाम पर नोटिस भेजने की कार्रवाई नहीं की।
उद्योग विभाग ने आठ औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित किया। इसमें सधुवापुर में 40 और चकहाता में 32 कुल 72 भूखंड कैबिनेट मंत्री और तत्कालीन सांसद राकेश सचान की दो शैक्षिक संस्थाओं के नाम पर वर्ष 2012 में आवंटित किए। इस आवंटन प्रक्रिया के दौरान उद्योग विभाग के उपायुक्त एनके सिंह थे। इसके बाद शिवपाल, इंद्रमोहन दुबे, सुनील भटनागर, इंद्रमोहन दुबे, एसके केशरवानी, शशि बिंदु कुमार, आलोक कुमार, विकास सिंघल, एस सिद्दीकी के बाद अंजनीश प्रताप सिंह उपायुक्त कुर्सी पर बैठे लेकिन किसी ने भी कैबिनेट मंत्री सचान की संस्थाओं को डीड या भूखंड आवंटन की नोटिस नहीं भेजी।
इन्वेस्टर्स समिट के बाद मामला प्रकाश में आया। कैबिनेट मंत्री ने स्वयं अपने भूखंडों के आवंटन निरस्त करने का एलान किया। इसके बाद उद्योग विभाग से नोटिस भेजी गई और उसके जवाब में ही तत्काल मंत्री सचान की संस्थाओं की ओर से निरस्त करने का आवेदन भी भेज दिया गया। इस मामले को लेकर जांच बैठ गई है। उद्योग विभाग से उपायुक्त अजय चौरसिया और सहायक आयुक्त संध्या जांच करने पहुंची।
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उन्होंने आवंटन से लेकर खाली भूखंडों की जानकारी ली। किस औद्योगिक क्षेत्र में कितने उद्योग संचालित हैं और कितने बंद हैं। इसकी क्रमवार सूची बनाकर रिपोर्ट तैयार की है। वे अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगी। इसमें आवंटन प्रक्रिया से लेकर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर बुधवार तक कार्रवाई भी हो सकती है। इससे अधिकारियों में सनसनी है। प्रयागराज उद्योग उपायुक्त जयश्री अभी जांच के लिए दौरा करेंगी।
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इनसेट
अन्य आवंटियों को भेजी गई नोटिस
उद्योग विभाग के अधिकारियों ने भूखंड आवंटन के बाद कई आवंटियों को नोटिस भेजी। आवंटियों को 2015 से लेकर 2018 तक नोटिस भेजी गईं। लेकिन इस सूची में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान का नाम नहीं है। कुछ ऐसे भी भूखंड सामने आए हैं, जो उच्च अधिकारिक दबाव में अब तक निरस्त नहीं किए जा सके हैं।
भेजी गई अंतिम नोटिस
जगतसराय में कुल 46 भूखंडों में 45 आवंटितहैं। यहां सिर्फ दो इकाइयां ही कार्यरत हैं। यहां पर खाली भूखंडों के आवंटितों को अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है। इसी तरह रामपुरथरियांव में कुल 48 में 41 भूखंड आवंटित हैं। यहां सिर्फ 4 उद्योग संचालित हैं। यहां पर 11 आवंटितों को अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है। इसके बाद त्रिलोकीपुर, सुजरही(खागा केपास), इटरोरा-पिलकिनी, चौडगरा में भी अंतिम नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। चकहाता और सदुवापुर के आवंटित भूखंडों को निरस्त करने के लिए कैबिनेट मंत्री की ओर से संस्थाओं ने आवेदन उद्योग विभाग को सौंप दिया है।
जगत सराय पर मुश्किल बढ़ी
फतेहपुर। औद्योगिक क्षेत्र जगत सराय के डीड का मामला उलझता जा रहा है। उद्योग विभाग ने इस क्षेत्र को 30 सालों के लिए नगर पालिका से अनुबंध कर लिया था। ये मियाद पूरी हो चुकी है। इसकी फाइल भी नगर पालिका में अध्ययन की जा रही है। अधिकारी आगे की प्रक्रिया को लेकर कानूनी सलाह भी ले सकते हैं। ये मामला भी उद्योग विभाग के लिए मुश्किलें खड़ा कर रहा है। जगत सराय में कुल 46 भूखंड हैं। उद्योग विभाग ने 45 भूखंडों का आवंटन कर दिया। इन उद्यमियों से 99 साल की डीड भी बनवा ली है। लेकिन नगर पालिका से निर्धारित 30 साल के अनुबंध की सीमा को बढ़ाने की दिशा पर प्रक्रिया नहीं की गई। ये समय-सीमा अब खत्म हो चुकी है। इसके बाद कानूनी तौर पर ये जमीन नगर पालिका के कब्जे में आ चुकी है। इस मसले पर नगर पालिका के ईओ समीर कुमार कश्यप का कहना है कि वे मंगलवार को जगत सराय का मौके पर जाकर मुआयना करेंगे।
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उद्योग विभाग ने आठ औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित किया। इसमें सधुवापुर में 40 और चकहाता में 32 कुल 72 भूखंड कैबिनेट मंत्री और तत्कालीन सांसद राकेश सचान की दो शैक्षिक संस्थाओं के नाम पर वर्ष 2012 में आवंटित किए। इस आवंटन प्रक्रिया के दौरान उद्योग विभाग के उपायुक्त एनके सिंह थे। इसके बाद शिवपाल, इंद्रमोहन दुबे, सुनील भटनागर, इंद्रमोहन दुबे, एसके केशरवानी, शशि बिंदु कुमार, आलोक कुमार, विकास सिंघल, एस सिद्दीकी के बाद अंजनीश प्रताप सिंह उपायुक्त कुर्सी पर बैठे लेकिन किसी ने भी कैबिनेट मंत्री सचान की संस्थाओं को डीड या भूखंड आवंटन की नोटिस नहीं भेजी।
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इन्वेस्टर्स समिट के बाद मामला प्रकाश में आया। कैबिनेट मंत्री ने स्वयं अपने भूखंडों के आवंटन निरस्त करने का एलान किया। इसके बाद उद्योग विभाग से नोटिस भेजी गई और उसके जवाब में ही तत्काल मंत्री सचान की संस्थाओं की ओर से निरस्त करने का आवेदन भी भेज दिया गया। इस मामले को लेकर जांच बैठ गई है। उद्योग विभाग से उपायुक्त अजय चौरसिया और सहायक आयुक्त संध्या जांच करने पहुंची।
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उन्होंने आवंटन से लेकर खाली भूखंडों की जानकारी ली। किस औद्योगिक क्षेत्र में कितने उद्योग संचालित हैं और कितने बंद हैं। इसकी क्रमवार सूची बनाकर रिपोर्ट तैयार की है। वे अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगी। इसमें आवंटन प्रक्रिया से लेकर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर बुधवार तक कार्रवाई भी हो सकती है। इससे अधिकारियों में सनसनी है। प्रयागराज उद्योग उपायुक्त जयश्री अभी जांच के लिए दौरा करेंगी।
इनसेट
अन्य आवंटियों को भेजी गई नोटिस
उद्योग विभाग के अधिकारियों ने भूखंड आवंटन के बाद कई आवंटियों को नोटिस भेजी। आवंटियों को 2015 से लेकर 2018 तक नोटिस भेजी गईं। लेकिन इस सूची में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान का नाम नहीं है। कुछ ऐसे भी भूखंड सामने आए हैं, जो उच्च अधिकारिक दबाव में अब तक निरस्त नहीं किए जा सके हैं।
भेजी गई अंतिम नोटिस
जगतसराय में कुल 46 भूखंडों में 45 आवंटितहैं। यहां सिर्फ दो इकाइयां ही कार्यरत हैं। यहां पर खाली भूखंडों के आवंटितों को अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है। इसी तरह रामपुरथरियांव में कुल 48 में 41 भूखंड आवंटित हैं। यहां सिर्फ 4 उद्योग संचालित हैं। यहां पर 11 आवंटितों को अंतिम नोटिस भेजी जा चुकी है। इसके बाद त्रिलोकीपुर, सुजरही(खागा केपास), इटरोरा-पिलकिनी, चौडगरा में भी अंतिम नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। चकहाता और सदुवापुर के आवंटित भूखंडों को निरस्त करने के लिए कैबिनेट मंत्री की ओर से संस्थाओं ने आवेदन उद्योग विभाग को सौंप दिया है।
जगत सराय पर मुश्किल बढ़ी
फतेहपुर। औद्योगिक क्षेत्र जगत सराय के डीड का मामला उलझता जा रहा है। उद्योग विभाग ने इस क्षेत्र को 30 सालों के लिए नगर पालिका से अनुबंध कर लिया था। ये मियाद पूरी हो चुकी है। इसकी फाइल भी नगर पालिका में अध्ययन की जा रही है। अधिकारी आगे की प्रक्रिया को लेकर कानूनी सलाह भी ले सकते हैं। ये मामला भी उद्योग विभाग के लिए मुश्किलें खड़ा कर रहा है। जगत सराय में कुल 46 भूखंड हैं। उद्योग विभाग ने 45 भूखंडों का आवंटन कर दिया। इन उद्यमियों से 99 साल की डीड भी बनवा ली है। लेकिन नगर पालिका से निर्धारित 30 साल के अनुबंध की सीमा को बढ़ाने की दिशा पर प्रक्रिया नहीं की गई। ये समय-सीमा अब खत्म हो चुकी है। इसके बाद कानूनी तौर पर ये जमीन नगर पालिका के कब्जे में आ चुकी है। इस मसले पर नगर पालिका के ईओ समीर कुमार कश्यप का कहना है कि वे मंगलवार को जगत सराय का मौके पर जाकर मुआयना करेंगे।