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मनरेगा में आधी आबादी को न्याय नहीं,35 में 5 को ही मिली मैट की जिम्मेदारी

Tue, 07 Jun 2022 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 12:06 AM IST
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No justice to half the population in MNREGA, only 5 out of 35 got the responsibility of MAT
कमालगंज। मिशन शक्ति के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मेट की जिम्मेदारी दी जानी थी। इसके लिए 35 महिलाओं को ब्लाक कार्यालय पर प्रशिक्षण भी दिलाया गया था, लेकिन इनमें से केवल पांच महिलाओं के ही नाम मस्टर रोल में शामिल किए गए।
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पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने मनरेगा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मेट की जिम्मेदारी देने की घोषणा की थी। इसके तहत 118 ग्राम पंचायतों में महिला मेट तैनात होनी थीं। करीब 90 महिलाओं का चयन भी हो गया था।
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इसमें 45 को प्रशिक्षण भी दिया गया, लेकिन जिम्मेदारों की ढिलाई से नारी सशक्तिकरण की यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। केवल पांच ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा के मस्टर रोल में महिला मेट के नाम शामिल हुए।
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गांव में मनरेगा से काम में श्रमिक को तो 213 रुपये मिलते हैं, जबकि मेट को 325 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक निर्धारित है। महिलाओं ने हर माह आठ से नौ हजार रुपये पारिश्रमिक मिलने की उम्मीद लगाई गई थी।

मनरेगा के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गौरव सिंह ने बताया कि उन्होंने हाल में ही कार्यभार संभाला है। अमृत सरोवर योजना में जो भी मनरेगा से काम होंगे, उसमें मेट का काम महिला को ही दिया जाएगा। 20 श्रमिक से अधिक के काम करने पर मेट का प्रावधान है।
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