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प्रसूताओं को नाश्ता न भोजन, बेडों पर चादरें तक नहीं
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सीएचसी नवाबगंज में बिना चादर के बेड पर लेटीं प्रसूताएं। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
नवाबगंज। क्षेत्र की सीएचसी में हर तरफ अव्यवस्थाएं हैं। यहां प्रसूताओं को न तो नाश्ता मिलता है और न ही भोजन। वार्ड में मात्र एक पंखा होने से प्रसूताएं गर्मी से बेहाल रहती हैं। जनरेटर खराब है। बेडों पर चादरें तक नहीं हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बीते माह मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने निरीक्षण किया था। इस दौरान व्यवस्थाएं बदहाल मिली थीं। एक सप्ताह में सुधार करने के आदेश दिए थे। करीब 15 दिन से अधिक का समय बीतने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
सोमवार को अस्पताल में सात प्रसूताएं भर्ती मिलीं। किसी के बेड पर चादरें नहीं थीं। वार्ड में लगे दो पंखों में एक ही चल रहा था। भीषण गर्मी से परेशान मरीजों ने अपने घर से पंखे मंगवाए। कुछ तो हाथ वाला पंखा झलते दिखे।
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प्रसूता बबली, देवकी, आयशा, रुचि, रंजना, वंदना, विमला ने बताया कि रविवार को प्रसव हुआ था। सोमवार दोपहर तक उन लोगों को अस्पताल से न तो नाश्ता दिया गया और न ही भोजन। बिजली जाने पर पंखा भी बंद हो जाता है। वह लोग अपने घरों से भोजन व नाश्ता मंगा रहे हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों को रुकने के निर्देश हैं, लेकिन रुकता कोई नहीं है। आसपास के दर्जनों गांवों के लोग यहां आते हैं, लेकिन सुविधाएं न मिलने से मायूस हो जाते हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि बेड़ों पर चादरें बिछाने के निर्देश दिए हैं। ठेकेदार या उसके कर्मचारी भोजन व नाश्ता देने नहीं आते हैं। इस बारे में सीएमओ को अवगत करा दिया है। सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि वह फिर निरीक्षण करेंगे और अव्यवस्थाएं मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बीते माह मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने निरीक्षण किया था। इस दौरान व्यवस्थाएं बदहाल मिली थीं। एक सप्ताह में सुधार करने के आदेश दिए थे। करीब 15 दिन से अधिक का समय बीतने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
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सोमवार को अस्पताल में सात प्रसूताएं भर्ती मिलीं। किसी के बेड पर चादरें नहीं थीं। वार्ड में लगे दो पंखों में एक ही चल रहा था। भीषण गर्मी से परेशान मरीजों ने अपने घर से पंखे मंगवाए। कुछ तो हाथ वाला पंखा झलते दिखे।
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प्रसूता बबली, देवकी, आयशा, रुचि, रंजना, वंदना, विमला ने बताया कि रविवार को प्रसव हुआ था। सोमवार दोपहर तक उन लोगों को अस्पताल से न तो नाश्ता दिया गया और न ही भोजन। बिजली जाने पर पंखा भी बंद हो जाता है। वह लोग अपने घरों से भोजन व नाश्ता मंगा रहे हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों को रुकने के निर्देश हैं, लेकिन रुकता कोई नहीं है। आसपास के दर्जनों गांवों के लोग यहां आते हैं, लेकिन सुविधाएं न मिलने से मायूस हो जाते हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि बेड़ों पर चादरें बिछाने के निर्देश दिए हैं। ठेकेदार या उसके कर्मचारी भोजन व नाश्ता देने नहीं आते हैं। इस बारे में सीएमओ को अवगत करा दिया है। सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि वह फिर निरीक्षण करेंगे और अव्यवस्थाएं मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी।