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आलू व्यापारियों ने किया मुंबई का रुख
Fri, 04 Jan 2019 12:05 AM IST
मनोज कुमार
farrukhabad
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Published by: मनोज कुमार
Updated Fri, 04 Jan 2019 12:05 AM IST
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potato
मंदी की मार झेल रहे कच्चे आलू का कोई पुरसा हाल नहीं है। 14 दिन से भाव 400-450 पर टिका है। किसानों को मिल रहे इन भाव से बमुश्किल लागत ही निकल पा रही है। कच्चा आलू का सीजन किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। असम में यहां का आलू पिटने बाद व्यापारियों ने मुंबई का रुख किया है।
आलू के शुरुआती कच्चे सीजन में किसानों को भाव 600 रुपये क्विंटल तक मिला। मौसम साफ होने की वजह से किसानों ने जमकर आलू की खोदाई की। जैसे-जैसे मंडी में आलू की आवक बढ़ती गई भाव गिरता गया। 600-650 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाले आलू का भाव 20 दिसंबर के बाद से 400-450 रुपये प्रति क्विंटल पर टिका है।
किसानों की मानें तो दो माह तक कड़ी मशक्कत के बाद इन्हें उम्मीद थी कि कच्चा सीजन कुछ लाभ देकर जाएगा, लेकिन यहां लागत निकालना भी मुश्किल पड़ गया है। किसानों की मानें तो गेहूं की फसल के लिए आलू खोदना उनकी मजबूरी है। आवक अधिक होने से आलू का कारोबार करने वाले व्यापारी भी परेशान हैं। इसका प्रमुख कारण यहां के आलू की मांग असम से नहीं हो रही है। व्यापारियों ने असम में यहां के आलू के पिटने के बाद अब मुंबई की ओर रुख किया है।
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बुधवार व गुरुवार को व्यापारियों ने मुंबई के लिए कई आलू ट्रक रवाना किए हैं। व्यापारी बंटी यादव ने बताया कि यदि मुंबई को यहां का आलू भा गया तो कुछ आस जागेगी। हालांकि भाव सस्ता होने से प्रदेश की अन्य मंडियों के साथ छत्तीसगढ़, बिहार में मजबूरन आलू भेजना पड़ रहा है, लेकिन इन मंडियों में जो लाभ होना चाहिए था वह नहीं मिल पा रहा है। आढ़ती सुधीर वर्मा ने बताया कि अब मुंबई पर ही दारोमदार टिका है।
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आलू के शुरुआती कच्चे सीजन में किसानों को भाव 600 रुपये क्विंटल तक मिला। मौसम साफ होने की वजह से किसानों ने जमकर आलू की खोदाई की। जैसे-जैसे मंडी में आलू की आवक बढ़ती गई भाव गिरता गया। 600-650 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाले आलू का भाव 20 दिसंबर के बाद से 400-450 रुपये प्रति क्विंटल पर टिका है।
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किसानों की मानें तो दो माह तक कड़ी मशक्कत के बाद इन्हें उम्मीद थी कि कच्चा सीजन कुछ लाभ देकर जाएगा, लेकिन यहां लागत निकालना भी मुश्किल पड़ गया है। किसानों की मानें तो गेहूं की फसल के लिए आलू खोदना उनकी मजबूरी है। आवक अधिक होने से आलू का कारोबार करने वाले व्यापारी भी परेशान हैं। इसका प्रमुख कारण यहां के आलू की मांग असम से नहीं हो रही है। व्यापारियों ने असम में यहां के आलू के पिटने के बाद अब मुंबई की ओर रुख किया है।
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बुधवार व गुरुवार को व्यापारियों ने मुंबई के लिए कई आलू ट्रक रवाना किए हैं। व्यापारी बंटी यादव ने बताया कि यदि मुंबई को यहां का आलू भा गया तो कुछ आस जागेगी। हालांकि भाव सस्ता होने से प्रदेश की अन्य मंडियों के साथ छत्तीसगढ़, बिहार में मजबूरन आलू भेजना पड़ रहा है, लेकिन इन मंडियों में जो लाभ होना चाहिए था वह नहीं मिल पा रहा है। आढ़ती सुधीर वर्मा ने बताया कि अब मुंबई पर ही दारोमदार टिका है।