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जान मोहम्मद शिवभक्ति में, अवधेश गिरी सेवें मजार
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Thu, 26 Nov 2015 11:30 PM IST
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फर्रुखाबाद। असहिष्णुता पर सियासी गरमाहट के बीच नवाबगंज ब्लाक के बरतल गांव में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम है। यहां के रहने वाले जान मोहम्मद शिव व हनुमान के भक्त हैं और मंगलवार को उपवास रखते हैं। वहीं, अवधेश गिरी छोटे बड़े सरकार की मजारों की सेवा करते हैैं। वह मजार के साथ ही मंदिर में भी नियमित दीया जलाते हैं।
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बरतल गांव निवासी जान मोहम्मद की उम्र करीब 50 साल की है। चार बीघा खेती है। पत्नी बिटान बेगम 24 साल पहले चल बसीं। इकलौती बेटी जयनम का निकाह करवा दिया। अब घर में मां हफीजन और पिता अबरार हैं। जान मोहम्मद को बचपन से ही शिव व हनुमान में श्रद्धा थी। इससे वह रामायण व गीता पढ़ने लगे। स्कूल गए तो ज्यादातर साथी हिंदू ही रहे। परिवार के लोगों ने शुरुआती दौर में ऐसा न करने की नसीहत दी, लेकिन वे नहीं मानें।
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हाईस्कूल में फेल होने के बाद खेती बाड़ी में लग गए। उन्हें सुंदरकांड की चौपाइयां याद हैं। कीर्तन मंडली में भी जाते हैं। शिव मंदिर में सुबह शाम आरती करते हैं। मंगलवार को उपवास रहकर प्रसाद चढ़ाते हैं। पर्वों पर गंगा स्नान करने जाते हैं। जान मोहम्मद कहते हैं कि वह नमाजी नहीं हैं। रोजा भी कभी नहीं रखा। हालांकि उनके परिवार के लोग नमाज पढ़ते हैं और रोजा भी रखते हैं। इसके पीछे वजह पूछने पर जान मोहम्मद कहते हैं कि क्या ईश्वर, क्या खुदा, सब एक ही माया हैं। जिसकी शरण में जाने को दिल करे, उसी की शरण में रहना चाहिए।
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इसी गांव के दूसरे किरदार हैं, अवधेश गिरी। 40 साल के अवधेश गिरी गांव में ही स्थित छोटे बड़े सरकार के मुरीद हैं। छोटे बड़े सरकार की मूल मजार बदायूं में है, लेकिन अवधेश ने अपने घर में उनकी प्रतिकृति बना रखी है। इस मजार पर वह सुबह शाम इबादत करते हैं। गुरुवार को यहां सरकार के मुरीद दुआ केे लिए पहुंचते हैं। मजारों के दरवाजे पर मक्का मदीना और रामदरबार दोनों के चित्र हैं। अवधेश 18 साल से मजारों की सेवा कर रहे हैं।
रमजान में रोजा भी रख लेते हैं। अवधेश, पत्नी रामादेवी, 6 बेटियों, 2 बेटों, मां निर्मला देवी व पिता जोधन के साथ रहते हैं। पूरा परिवार यह मानता है कि देवी व हनुमानजी के साथ छोटे बड़े सरकार की सेवा की वजह से उनके घर में खुशहाली है। घर के पीछे हनुमान व दुर्गा देवी का मंदिर है। यहां भी आरती करते हैैं। अवधेश मंगलवार व नवरातों में व्रत रहते हैं। वह कहते हैं कि मोहब्बत और ईमान से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ऊपर वाले ने सबको एक जैसा ही बनाया है। धर्म तो यहां बने हैं।