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मेडिकल वेस्ट सड़क किनारे डंप
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 17 Feb 2015 11:35 PM IST
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नर्सिंग होम बेलगाम हैं। यह पालिका को लाइसेंस शुल्क देने में भी कोताही
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बरत रहे हैं। अराजकता का हाल यह कि मेडिकल वेस्ट को सड़क के किनारे फेंका
जा रहा है। यह मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र तो
हासिल कर लेते हैं लेकिन फिर नियमाें को ठेंगा दिखाया जाता है।
पालिका ने शहर में 200 नर्सिंग होम, प्रसूति गृह, निजी अस्पताल, एक्सरे क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर चिन्हित किए हैं। इन्हें पालिका में पंजीयन कराने के बाद सालाना लाइसेंस शुल्क अदा करना है। अब तक 40 नर्सिंग होम ने ही यह लाइसेंस शुल्क जमा किया है। बाकी ऐसे ही चल रहे हैं। पालिका इन पर कोई कार्रवाई करने से बच रही है। बड़े हाकिम भी चुप्पी साधे हैं।
नर्सिंग होम मेडिकल वेस्ट का भी नियमानुसार निस्तारण नहीं कर रहे हैं। जिले में 77 नर्सिंग होम हैं। एक नर्सिंग होम में तकरीबन 25 किलोग्राम मेडिकल वेस्ट निकलता है। मेडिकल वेस्ट में सिरिंज, ड्रेसिंग पट्टी, यूज्ड एेंपुल, मांस जैसी चीजें शामिल हैं। इनसे संक्रमण का खतरा बना रहता है। नर्सिंग होम का मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी से कचरा उठाने का करार है।
प्रति बेड 3 रुपया क ी दर से शुल्क तय है। नर्सिंग होम संचालकाें का कहना होता है कि एजेंसी कचरा उठाने नहीं आती है। वहीं एजेंसी के जिम्मेदाराें का कहना है कि इस बावत अभी तक किसी ने शिकायत नहीं की है। वह कहते हैं कि नर्सिंग होम्स से जो कचरा आता है, उसमें मेडिकल वेस्ट कम, घरेलू सामान बड़े पैमाने पर होता है।
कबाड़े में बिक जाता
जानकाराें की मानें तो मेडिकल वेस्ट की बिक्री में भी कमाई है। इसे इकट्ठा कर कबाड़ी के यहां बेंच दिया जाता। कचरे में से काम का सामान निकाल लिया जाता। बाकी नर्सिंग होम के बाहर फेंक दिया जाता है। इसे पालिका ले जाती है।
वसूला जाएगा लाइसेंस शुल्क
नर्सिंग होम,प्रसूति गृह, निजी अस्पताल, एक्सरे क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर से लाइसेंस शुल्क वसूला जा रहा है। 40 संस्थाआें से लाइसेंस शुल्क लिया जा चुका है। बाकी से भी लिया जाएगा।
राजकिशोर कमल, कर निरीक्षक
कभी नहीं आई कोई शिकायत
अभी तक किसी भी नर्सिंग होम ने मेडिकल वेस्ट न उठाए जाने की शिकायत नहीं की है। अक्सर नर्सिंग होम के मेडिकल वेस्ट न उठने की शिकायतें मिलती हैं। अगर कहीं समस्या है तो निराकारण कराया जाएगा।
एमपी सिंह, इंचार्ज, मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी
पालिका का सालाना लाइसेंस शुक्ल
नर्सिंग होम (20 बेड) 2000 रुपया
नर्सिंग होम (20 बेड से अधिक) 5000 रुपया
प्रसूति गृह (20 बेड) 4000 रुपया
प्रसूति गृह (20 बेड से अधिक) 5000 रुपया
निजी अस्पताल 5000 रुपया
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पैथोलॉजी सेंटर 1000 रुपया
एक्सरे क्लीनिक 2000 रुपया
डेंटल क्लीनिक 4000 रुपया
प्राइवेट क्लीनिक 3000 रुपया
पालिका ने शहर में 200 नर्सिंग होम, प्रसूति गृह, निजी अस्पताल, एक्सरे क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर चिन्हित किए हैं। इन्हें पालिका में पंजीयन कराने के बाद सालाना लाइसेंस शुल्क अदा करना है। अब तक 40 नर्सिंग होम ने ही यह लाइसेंस शुल्क जमा किया है। बाकी ऐसे ही चल रहे हैं। पालिका इन पर कोई कार्रवाई करने से बच रही है। बड़े हाकिम भी चुप्पी साधे हैं।
नर्सिंग होम मेडिकल वेस्ट का भी नियमानुसार निस्तारण नहीं कर रहे हैं। जिले में 77 नर्सिंग होम हैं। एक नर्सिंग होम में तकरीबन 25 किलोग्राम मेडिकल वेस्ट निकलता है। मेडिकल वेस्ट में सिरिंज, ड्रेसिंग पट्टी, यूज्ड एेंपुल, मांस जैसी चीजें शामिल हैं। इनसे संक्रमण का खतरा बना रहता है। नर्सिंग होम का मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी से कचरा उठाने का करार है।
प्रति बेड 3 रुपया क ी दर से शुल्क तय है। नर्सिंग होम संचालकाें का कहना होता है कि एजेंसी कचरा उठाने नहीं आती है। वहीं एजेंसी के जिम्मेदाराें का कहना है कि इस बावत अभी तक किसी ने शिकायत नहीं की है। वह कहते हैं कि नर्सिंग होम्स से जो कचरा आता है, उसमें मेडिकल वेस्ट कम, घरेलू सामान बड़े पैमाने पर होता है।
कबाड़े में बिक जाता
जानकाराें की मानें तो मेडिकल वेस्ट की बिक्री में भी कमाई है। इसे इकट्ठा कर कबाड़ी के यहां बेंच दिया जाता। कचरे में से काम का सामान निकाल लिया जाता। बाकी नर्सिंग होम के बाहर फेंक दिया जाता है। इसे पालिका ले जाती है।
वसूला जाएगा लाइसेंस शुल्क
नर्सिंग होम,प्रसूति गृह, निजी अस्पताल, एक्सरे क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर से लाइसेंस शुल्क वसूला जा रहा है। 40 संस्थाआें से लाइसेंस शुल्क लिया जा चुका है। बाकी से भी लिया जाएगा।
राजकिशोर कमल, कर निरीक्षक
कभी नहीं आई कोई शिकायत
अभी तक किसी भी नर्सिंग होम ने मेडिकल वेस्ट न उठाए जाने की शिकायत नहीं की है। अक्सर नर्सिंग होम के मेडिकल वेस्ट न उठने की शिकायतें मिलती हैं। अगर कहीं समस्या है तो निराकारण कराया जाएगा।
एमपी सिंह, इंचार्ज, मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी
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पालिका का सालाना लाइसेंस शुक्ल
नर्सिंग होम (20 बेड) 2000 रुपया
नर्सिंग होम (20 बेड से अधिक) 5000 रुपया
प्रसूति गृह (20 बेड) 4000 रुपया
प्रसूति गृह (20 बेड से अधिक) 5000 रुपया
निजी अस्पताल 5000 रुपया
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पैथोलॉजी सेंटर 1000 रुपया
एक्सरे क्लीनिक 2000 रुपया
डेंटल क्लीनिक 4000 रुपया
प्राइवेट क्लीनिक 3000 रुपया