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Farrukhabad News: बाढ़ में डूबे हैंडपंप, दूषित पानी पी रहे ग्रामीण
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अमृतपुर। बाढ़ का पानी लंबे समय से गांवों में भरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जलभराव के बीच दूषित पानी और गंदगी से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर हैंडपंप पानी में डूब गए हैं। इससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़कर 137.05 मीटर पर पहुंच गया।
नरौरा बांध से सोमवार को गंगा में 1,22,884 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का जलस्तर 137.00 मीटर से बढ़कर 137.05 मीटर पर पहुंच गया। गांव में बाढ़ के पानी में गंदगी और कचरा जमा होने से डायरिया, हैजा समेत पेट संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई दिनों से पानी भरा रहने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में नहीं आ रही हैं। सड़क किनारे ही दवा वितरण कर चले जाते हैं। गांव में बाढ़ का पानी भरा होने से हैंडपंप भी डूब चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी बन गई होती तो दूषित पानी नहीं पीना पड़ता। वे नाव पर गेहूं लेकर सड़क के किनारे ट्रैक्टर आटा चक्की से पिसवा कर ले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आधा किलोमीटर दूर गांव से सड़क पर नाव से आने के लिए काफी समय लग जाता है। रामगंगा का जलस्तर 136.00 मीटर से बढ़कर 136.10 मीटर पर पहुंच गया। खो हरेली रामनगर बैराज से 2644 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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22 गांवों की बिजली बंद, 43 में रात में मिल रही
अमृतपुर। बाढ़ के चलते 22 गांवों की बिजली पूरी तरह बंद कर दी गई है। वहीं, 43 गांवों में एहतियात के तौर पर रात आठ बजे से सुबह सात बजे तक ही बिजली दी जा रही है।
बिजली विभाग के एसडीओ ने बताया कि जिन गांवों में बाढ़ का पानी अधिक है, वहां बिजली के पोल पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे में करंट उतरने से हादसा होने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए इन गांवों की बिजली पूरी तरह बंद की गई है। वहीं, जिन गांवों में स्थिति सामान्य है, वहां भी दिन के समय बिजली बंद की जा रही है।
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अंबरपुर की मड़ैया में 38 लोगों को मिली राहत सामग्री
अमृतपुर। अंबरपुर की मड़ैया में राहत सामग्री न मिलने से ग्रामीणों ने तहसीलदार से शिकायत की थी। तहसील प्रशासन के खिलाफ नाराजगी होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। सोमवार को कानूनगो अतुल कुमार और लेखपाल रवींद्र नारायण वर्मा ने गांव पहुंचकर बाढ़ प्रभावित 38 लोगों को राहत सामग्री वितरित की।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों को खाने-पीने की सामग्री जुटाने में परेशानी हो रही थी। राहत सामग्री मिलने से कुछ समय कट जाएगा।
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नरौरा बांध से सोमवार को गंगा में 1,22,884 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का जलस्तर 137.00 मीटर से बढ़कर 137.05 मीटर पर पहुंच गया। गांव में बाढ़ के पानी में गंदगी और कचरा जमा होने से डायरिया, हैजा समेत पेट संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई दिनों से पानी भरा रहने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में नहीं आ रही हैं। सड़क किनारे ही दवा वितरण कर चले जाते हैं। गांव में बाढ़ का पानी भरा होने से हैंडपंप भी डूब चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी बन गई होती तो दूषित पानी नहीं पीना पड़ता। वे नाव पर गेहूं लेकर सड़क के किनारे ट्रैक्टर आटा चक्की से पिसवा कर ले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आधा किलोमीटर दूर गांव से सड़क पर नाव से आने के लिए काफी समय लग जाता है। रामगंगा का जलस्तर 136.00 मीटर से बढ़कर 136.10 मीटर पर पहुंच गया। खो हरेली रामनगर बैराज से 2644 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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22 गांवों की बिजली बंद, 43 में रात में मिल रही
अमृतपुर। बाढ़ के चलते 22 गांवों की बिजली पूरी तरह बंद कर दी गई है। वहीं, 43 गांवों में एहतियात के तौर पर रात आठ बजे से सुबह सात बजे तक ही बिजली दी जा रही है।
बिजली विभाग के एसडीओ ने बताया कि जिन गांवों में बाढ़ का पानी अधिक है, वहां बिजली के पोल पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे में करंट उतरने से हादसा होने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए इन गांवों की बिजली पूरी तरह बंद की गई है। वहीं, जिन गांवों में स्थिति सामान्य है, वहां भी दिन के समय बिजली बंद की जा रही है।
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अंबरपुर की मड़ैया में 38 लोगों को मिली राहत सामग्री
अमृतपुर। अंबरपुर की मड़ैया में राहत सामग्री न मिलने से ग्रामीणों ने तहसीलदार से शिकायत की थी। तहसील प्रशासन के खिलाफ नाराजगी होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। सोमवार को कानूनगो अतुल कुमार और लेखपाल रवींद्र नारायण वर्मा ने गांव पहुंचकर बाढ़ प्रभावित 38 लोगों को राहत सामग्री वितरित की।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों को खाने-पीने की सामग्री जुटाने में परेशानी हो रही थी। राहत सामग्री मिलने से कुछ समय कट जाएगा।