{"_id":"57c718b54f1c1b7f7c2cb260","slug":"many-of-the-landless-rural-intersection-of-ramganga","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामगंगा की कटान से कई ग्रामीण हुए भूमिहीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामगंगा की कटान से कई ग्रामीण हुए भूमिहीन
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Wed, 31 Aug 2016 11:19 PM IST
विज्ञापन
रामगंगा के कटान को देखता ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामगंगा में आई बाढ़ से गांव अलादपुर भटौली में खेत और कुछ ग्रामीणों के मकान कट गए है। बेघर और भूमिहीन हुए ग्रामीणों की खैर खबर लेने गए अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ आश्वासन देकर लौट गए। खोखले आश्वासन से ग्रामीण नाराज है।।
अमृतपुर तहसील क्षेत्र का गांव अलादपुर भटौली में रामगंगा में आई बाढ़ से कटान हुआ था। इस कटान से महावीर और नेकसे का मकान बह गया था। मोरपाल, नन्हे और बलवीर का मकान गिर गया था। कई ग्रामीणों के खेत और इसमेें खड़ी फसल बाढ़ में बर्बाद हो गई थी। बाढ़ पीड़ितों को मदद देने के नाम से प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव का निरीक्षण करने पहुंचे।
वह गांव के बाहद से निरीक्षण कर और बेघर होने वालों को रहने की जगह देने तथा जिन लोगों की फसल नष्ट हो गई, उनको परिवार का पालन पोषण करने के लिए अनाज दिलाने का आश्वासन दिया था। वहां से लौटने के बाद जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पीड़ितों को भूल गए।
विज्ञापन
इस कारण बेघर और भूमिहीन ग्रामीणों को परिवार का पालन पोषण करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अफसरों और जनप्रतिनिधियों के झूठे आश्वासनों को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
विज्ञापन
अमृतपुर तहसील क्षेत्र का गांव अलादपुर भटौली में रामगंगा में आई बाढ़ से कटान हुआ था। इस कटान से महावीर और नेकसे का मकान बह गया था। मोरपाल, नन्हे और बलवीर का मकान गिर गया था। कई ग्रामीणों के खेत और इसमेें खड़ी फसल बाढ़ में बर्बाद हो गई थी। बाढ़ पीड़ितों को मदद देने के नाम से प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव का निरीक्षण करने पहुंचे।
विज्ञापन
वह गांव के बाहद से निरीक्षण कर और बेघर होने वालों को रहने की जगह देने तथा जिन लोगों की फसल नष्ट हो गई, उनको परिवार का पालन पोषण करने के लिए अनाज दिलाने का आश्वासन दिया था। वहां से लौटने के बाद जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पीड़ितों को भूल गए।
विज्ञापन
इस कारण बेघर और भूमिहीन ग्रामीणों को परिवार का पालन पोषण करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अफसरों और जनप्रतिनिधियों के झूठे आश्वासनों को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।