लोहिया अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में होता है काम

farrukhabad Updated Thu, 27 Sep 2018 11:46 PM IST
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मोबाइल की रोशनी में काम करता स्वास्थ्य कर्मी।
मोबाइल की रोशनी में काम करता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला

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लोहिया अस्पताल में न ही डाक्टर की संख्या पूरी है और न ही सुविधाएं सही। हालात ये हैं कि रात में बिजली जाते ही वार्डों में अंधेरा पसर जाता है। जनरेटर नहीं चलने से तीमारदार मोबाइल की रोशनी में अपने मरीजों को दवा आदि देते हैं। कर्मचारी भी मोबाइल की रोशनी में काम करते हैं। गर्मी अधिक होने पर अखबार आदि से ही हवा करते हैं। हालांकि इमर्जेंसी व डाक्टरों के कक्षों में इनवर्टर लगे हैं।
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शहर में बुधवार रात लाइन में फाल्ट होने से सप्लाई बाधित हो गई थी। तीमारदार मोबाइल की टार्च जला कर रोशनी कर रहे थे। कुछ तीमारदारों ने मोमबत्ती जला ली थी। बाथरूम आदि के लिए बाहर निकलने या मरीज को दवा देने में लोगों को समस्या हुई। जिला हरदोई के मिरगवां निवासी सोनू ने बताया कि वह चार दिन पहले भर्ती हुआ था। रात में बिजली चले जाने पर जनरेटर चालू नहीं होता है। इससे गर्मी में हालत खराब हो जाती है। अमृतपुर के गांव भुडे़रा निवासी नन्हें कुमार ने बताया कि तीन दिन पहले उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया था। लाइट जाने पर मोमबत्ती से रोशनी करते हैं।
मऊदरवाजा के गांव रसीदपुर निवासी सुभाषचंद्र ने बताया कि वह आठ दिन पहले यहां भर्ती हुआ था। शुरू के दो दिन तो लाइट जाने पर जैसे तैसे काट लिए। बाद में यहां का ढर्रा पता चला तो बैटरी वाली लाइट बाजार से खरीद ली है। अब इसी से काम चलता है। शाहजहांपुर जिले के कसबा जलालाबाद के इंद्रपाल ने बताया कि बिजली के जाने के बाद टार्च से रोशनी कर लेते हैं।
सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बिजली की समस्या के लिए ईएमओ को रात में जनरेटर चालू कराने के लिए बोला है। जिससे मरीजों को समस्या न हो।

ढाई करोड़ की लागत से बना है उपकेंद्र
लोहिया अस्पताल को बिना कटौती के बिजली मिले इसके लिए ढाई करोड़ रुपये की लागत से दो वर्ष पूर्व विद्युत उपकेंद्र बनाया गया है। अस्पताल के मरीजों व कर्मचारियों की इसकी सुविधा कुछ माह ही सही से मिल पाई थी। इसके बाद वहां लगे ट्रांसफार्मर से तेल गायब हो गया था। इससे उपकेंद्र ठप हो गया था। इस पर उसे लकूला उपकेंद्र से जोड़कर बिजली दी जा रही थी। जुलाई में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लोहिया अस्पताल का निरीक्षण किया था। तब उपकेंद्र को ठीक कराया गया था। इसके बाद कुछ दिन वह सही चला। बाद में उपकेंद्र ठप हो गया। इससे अब लोहिया अस्पताल को लकूला उपकेंद्र के फीडर से ही बिजली दी जा रही है। उपकेंद्र लोहिया अस्पताल और बिजली विभाग के विवाद के कारण बंद पड़ा है। दोनों उपकेंद्र को सही कराने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है।
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