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लोहिया अस्पताल में सीबीसी जांच ठप, मरीज बेहाल
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लोहिया अस्पताल में पर्चा काउंटर पर लगी लाइन। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल की लैबों में करीब 15 दिन से कंपलीट ब्लड काउंट (सीबीसी) जांच बंद चल रही है। कुछ अन्य जांचें भी नहीं हो पा रही हैं। जांच के लिए औसतन रोजाना आने वाले 200 मरीज निजी लैबों पर जाने के लिए मजबूर हैं। इससे गरीब मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।
दोनों लैबों का संचालन निजी कंपनी के हाथ में है। करीब 15 दिन से रीजेंट केमिकल खत्म होने की वजह से सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। पुरुष और महिला अस्पताल में रोजाना औसतन 200 नमूनों की सीबीसी जांच होती है।
गर्मी में खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों की तेजी से संख्या बढ़ रही है। सोमवार को पुरुष अस्पताल में करीब 750 मरीज पहुंचे। लैब में सीबीसी जांच के लिए नमूना देने पहुंचे मरीजों को जांच न होने की जानकारी दी गई। यहां चंद जांचों की सुविधा ही मिल पा रही है।
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डॉक्टर मरीज को जांच रिपोर्ट लाने के बाद ही दवा देने की बात कहते हैं। लिहाजा मरीज निजी लैबों में अधिक पैसे खर्च करके जांचें करवाने के लिए मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है। अस्पताल के जिम्मेदार भी समस्या के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।
लैबों पर भी बाहरी दलाल सक्रिय
अस्पताल की दोनों लैबों में कंपनी के ही कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों का निजी लैबों से भी संपर्क है। लिहाजा कई दलाल लैबों के इर्द-गिर्द सक्रिय रहते हैं। यही नहीं लैबों के भीतर भी कुछ बाहरी लोगों का जमावड़ा रहता है।
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दोनों लैबों का संचालन निजी कंपनी के हाथ में है। करीब 15 दिन से रीजेंट केमिकल खत्म होने की वजह से सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। पुरुष और महिला अस्पताल में रोजाना औसतन 200 नमूनों की सीबीसी जांच होती है।
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गर्मी में खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों की तेजी से संख्या बढ़ रही है। सोमवार को पुरुष अस्पताल में करीब 750 मरीज पहुंचे। लैब में सीबीसी जांच के लिए नमूना देने पहुंचे मरीजों को जांच न होने की जानकारी दी गई। यहां चंद जांचों की सुविधा ही मिल पा रही है।
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डॉक्टर मरीज को जांच रिपोर्ट लाने के बाद ही दवा देने की बात कहते हैं। लिहाजा मरीज निजी लैबों में अधिक पैसे खर्च करके जांचें करवाने के लिए मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है। अस्पताल के जिम्मेदार भी समस्या के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।
लैबों पर भी बाहरी दलाल सक्रिय
अस्पताल की दोनों लैबों में कंपनी के ही कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों का निजी लैबों से भी संपर्क है। लिहाजा कई दलाल लैबों के इर्द-गिर्द सक्रिय रहते हैं। यही नहीं लैबों के भीतर भी कुछ बाहरी लोगों का जमावड़ा रहता है।