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Farrukhabad News: लोहिया अस्पताल के गार्ड बने लैब व एक्सरे टेक्नीशियन
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल का भगवान की मालिक है। मरीजों, तीमारदारों, डॉक्टरों की सहूलियत के लिए भर्ती किए गए 20 गार्ड अपना काम करते नहीं दिखते। कुछ लैब और एक्सरे टेक्नीशियन बन गए और कुछ ओपीडी में ऑनलाइन पंजीकरण करते रहते हैं। अधिकतर गार्ड अपनी यूनिफार्म में नहीं आते, लिहाजा उन्हें पहचाना नहीं जा सकता। इसका खामियाजा मरीजों को ही भुगतना पड़ता है।
लोहिया जिला अस्पताल में 11 अलग-अलग स्थानों पर गार्डों की तैनाती की गई है। इनका काम सुरक्षा व्यवस्था कायम रखना है। मगर कई गार्डों से गंभीर तरीके के काम लिए जा रहे हैं। मसलन 75 नंबर कमरे की लैब में तैनात गार्ड मरीजों को लाइन में लगाने की जिम्मेदारी की बजाय मरीजों के नमूने निकालता दिखता है। यह काम सिर्फ मेडिकल काॅलेजों से कोर्स करने के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में कभी भी मरीज को दिक्कत खड़ी हो सकती है। जिस वक्त गार्ड नमूना निकालता है, तो जिम्मेदार एलटी वहीं आराम भरमाते दिखता है।
इसके अलावा एक्सरे में भीड़ नियंत्रित करने में लगे गार्ड से मशीन के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह गार्ड मरीज के पास ही खड़ा रहता है। लिहाजा एक्सरे के वक्त निकलने वाली घातक किरणें कभी भी अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं।
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ओपीडी में मरीजों के ऑनलाइन पंजीकरण की जिम्मेदारी पर्चा काउंटर पर तैनात कर्मियों की है। मगर यहां दो गार्डों को बिना वर्दी के तैनात किया गया है। वह कुर्सी पर बैठकर पंजीकरण का काम करते रहते हैं। इमरजेंसी में तैनात महिला गार्ड कोविड हेल्प काउंटर पर बैठी रहती है। इस दौरान डॉक्टरों के कमरों के बाहर और अंदर धक्का मुक्की होना आम बात हो गई है।
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अस्पताल में तैनात 20 गार्डों की यहां लगी सुरक्षा ड्यूटी
ओपीडी रजिस्ट्रेशन- 1
ओपीडी कमरा नंबर तीन- 1
एक्सरे रूम- 1
पैथोलॉजी- 1
मुख्य गेट- 1
जनरल पार्किंग - 1
सीएमएस के साथ- 1
ऊपर जनरल वार्ड (तीन शिफ्ट)- 3
इमरजेंसी गेट (तीन शिफ्ट) - 6
इमरजेंसी वार्ड (तीन शिफ्ट)- 3
इमरजेंसी कोविड हेल्प डेस्क- 1
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-गार्डों की अलग-अलग तैनाती है। उनका काम सुरक्षा और मरीजों की सहायता करना है। मगर नमूने लेना और एक्सरे रूम के अंदर रहना गंभीर बात है। वह इसकी जांच करवाएंगे।
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया जिला अस्पताल
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लोहिया जिला अस्पताल में 11 अलग-अलग स्थानों पर गार्डों की तैनाती की गई है। इनका काम सुरक्षा व्यवस्था कायम रखना है। मगर कई गार्डों से गंभीर तरीके के काम लिए जा रहे हैं। मसलन 75 नंबर कमरे की लैब में तैनात गार्ड मरीजों को लाइन में लगाने की जिम्मेदारी की बजाय मरीजों के नमूने निकालता दिखता है। यह काम सिर्फ मेडिकल काॅलेजों से कोर्स करने के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में कभी भी मरीज को दिक्कत खड़ी हो सकती है। जिस वक्त गार्ड नमूना निकालता है, तो जिम्मेदार एलटी वहीं आराम भरमाते दिखता है।
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इसके अलावा एक्सरे में भीड़ नियंत्रित करने में लगे गार्ड से मशीन के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह गार्ड मरीज के पास ही खड़ा रहता है। लिहाजा एक्सरे के वक्त निकलने वाली घातक किरणें कभी भी अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं।
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ओपीडी में मरीजों के ऑनलाइन पंजीकरण की जिम्मेदारी पर्चा काउंटर पर तैनात कर्मियों की है। मगर यहां दो गार्डों को बिना वर्दी के तैनात किया गया है। वह कुर्सी पर बैठकर पंजीकरण का काम करते रहते हैं। इमरजेंसी में तैनात महिला गार्ड कोविड हेल्प काउंटर पर बैठी रहती है। इस दौरान डॉक्टरों के कमरों के बाहर और अंदर धक्का मुक्की होना आम बात हो गई है।
अस्पताल में तैनात 20 गार्डों की यहां लगी सुरक्षा ड्यूटी
ओपीडी रजिस्ट्रेशन- 1
ओपीडी कमरा नंबर तीन- 1
एक्सरे रूम- 1
पैथोलॉजी- 1
मुख्य गेट- 1
जनरल पार्किंग - 1
सीएमएस के साथ- 1
ऊपर जनरल वार्ड (तीन शिफ्ट)- 3
इमरजेंसी गेट (तीन शिफ्ट) - 6
इमरजेंसी वार्ड (तीन शिफ्ट)- 3
इमरजेंसी कोविड हेल्प डेस्क- 1
-गार्डों की अलग-अलग तैनाती है। उनका काम सुरक्षा और मरीजों की सहायता करना है। मगर नमूने लेना और एक्सरे रूम के अंदर रहना गंभीर बात है। वह इसकी जांच करवाएंगे।
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया जिला अस्पताल